मनोज बाजपेयी-नीरज पांडे
- फोटो : सोशल मीडिया
निर्देशक से शूटिंग पर हुई बहस
मनोज बाजपेयी कहते है, ‘इस तरह की डाक्यूमेंट्री करने का फायदा यह होता है कि इसमें आपको एक्टिंग नहीं करनी पड़ती है। इसमें थोडा एक्टिंग से रीलिफ मिल जाता है। हालांकि कई बार इसकी शूटिंग के दौरान हमारी निर्देशक राघव जैरथ से बहस भी हो जाती थी, क्योंकि जिस तरह से मैं काम करना चाह रहा था, उस तरह से राघव को पसंद नहीं था। जिस तरह से राघव चाहते थे, मुझे पसंद नहीं था। खैर, यह सब तो क्रिएटिव पार्ट है, ऐसा होता रहता रहता है। हम सबकी यही कोशिश रहती है कि किसी भी तरह अच्छा काम होना चाहिए।’