श्वेता त्रिपाठी
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अपनी बात को जारी रखते हुए श्वेता ने आगे कहा, “एसिड हमले की पीड़िता के रूप में मैंने कई चीजें खोजी और देखीं, जिन्हें हम अक्सर हल्के में ले लेते हैं। हमने सुंदरता का भ्रम पैदा कर लिया है, बिल्कुल वैसा ही जैसा हमारी त्वचा दिखती है और हमारे बाल जैसे दिखते हैं। यहां तक कि अगर कोई पिंपल निकल भी आए तो लोग अपने रूप-रंग को लेकर शर्मिंदगी महसूस करने लगते हैं। लेकिन, अगर हम इसे स्वीकार करते हैं, अगर हम इस तरह की किसी चीज़ से परेशान नहीं हैं, तो हम किसी भी चीज़ को वह शक्ति नहीं दे रहे हैं। पिंपल्स होना सामान्य है और त्वचा का रुखा होना भी सामान्य है।”