दिव्यांका त्रिपाठी
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आगे दिव्यांका लिखती हैं 'रोज सुबह की पीटी और चिलचिलाती धूप में ड्रिल अभ्यास हुआ करता था। तेज हवाओं और बारिश में हमारे टेंटों को एक साथ पकड़ते और पानी वाली सब्जी, किसी नक्शे की तरह बनी रोटियों के लिए लाइन में लगना पड़ता। और फिर शाम की चाय। क्योंकि आप जानते थे कि जीवित रहना अधिक महत्वपूर्ण है।' दिव्यांका की इन तस्वीरों को खूब पसंद किया जा रहा है। हालांकि फैंस इन तस्वीरों में दिव्यांका को पहचान भी नहीं पा रहे हैं।