शुभांगी अत्रे
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शुभांगी कहती हैं, ‘मुझे लगता है कि अब गर्मी की लंबी छुट्टियों या यहां तक कि छोटी छुट्टियों के लिए भी शायद ही समय होता है। कभी-कभी लगता है कि हमारे पास सांस लेने का भी समय नहीं है। गर्मी की छुट्टियाँ अब मुझे बचपन जैसी लगती हैं। बचपन में हम सब दो महीने की गर्मी की छुट्टियां अपनी दादी के घर बिताते थे। दादी हमारे लिए स्वादिष्ट खाना बनाती थीं और हम खूब मस्ती करते थे। अब तो ये सब सपने जैसा हो गया है।’