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25 किलोमीटर पैदल जाकर किताब बेचते थे 'भाबी जी' के सक्सेना, अब 'पिटने' की लेते हैं इतनी फीस

Wed, 26 Jul 2017 03:54 PM IST
amarujala.com- Written by: संगीता तोमर
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सानंद वर्मा
मिलिए टीवी की मशहूर कॉमेडी शो 'भाभी जी घर पर हैं' के अनोखे लाल सक्सेना यानि सानंद वर्मा से जिन्हें शो में लोगों से पिटने और करंट खाने में बहुत मजा आता है। 'आई लाइक इट' जैसे डॉयलॉग और अपनी बेहतरीन एक्टिंग के जरिए सक्सेना के रूप में सानंद वर्मा आज घर-घर में पहचाने जाने लगे हैं।
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सानंद वर्मा
हालांकि इसस पहले भी सानंद वर्मा ने कई टीवी शोज में काम किया है जिनमें 'सीआईडी', 'अदालत', 'आरके लक्ष्मण की दुनिया', 'तू मेरे अगल बगल है' जैसे शो शामिल हैं, लेकिन सानंद वर्मा को पॉपुलैरिटी मिली 'भाभी जी घर पर हैं' के अनोखे लाल सक्सेना के रूप में।
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सानंद वर्मा
इसके अलावा वो 200 विज्ञापनों में भी काम कर चुके हैं। कुछ फिल्मों में भी सानंद वर्मा ने अपनी एक्टिंग का हुनर दिखाया।

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सानंद वर्मा
इस शो में करंट खाने और पिटने की वजह से और साथ ही 'आई लाइक इट' जैसे वन लाइनर ने सक्सेना को बड़ा स्टार बना दिया है। आज सानंद को लोग उनके नाम से कम और उनके किरदार के नाम से ज्यादा जानते हैं।
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सानंद वर्मा
क्या आप जानते हैं कि सानंद वर्मा सक्सेना के किरदार के लिए कितनी फीस लेते हैं ? इंटरनेट पर मौजूद आंकड़ों पर गौर करें तो सानंद वर्मा सक्सेना के किरदार के लिए एक दिन के 15000 रुपए लेते हैं।
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सानंद वर्मा
सानंद वर्मा आज भले ही स्टारडम भरी जिंदगी जी रहे हैं, लेकिन उनकी जिंदगी काफी उथल-पुथल भरी रही है। मात्र 8 साल की उम्र में ही सानंद वर्मा ने काम करना शुरू कर दिया था जिसकी वजह से वो अपना स्कूल भी अटेंड नहीं कर पाते थे।
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सानंद वर्मा
बावजूद इसके उन्होंने अपनी पढ़ाई को छूटने नहीं दिया। सानंद वर्मा ने जो कुछ भी सीखा अपनी जिंदगी के अनुभवों से सीखा। अपने पिता की वजह से सानंद वर्मा कुछ भी नहीं कर पाए। उनके पिता जिस भी काम में हाथ डालते उसमें असफलता ही मिलती।

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सानंद वर्मा
इसकी वजह से सानंद वर्मा के पिता निराश थे तो वहीं खुद सानंद पर भी काफी फर्क पड़ रहा था। उनके पिता का एक छोटा सा पब्लिशिंग हाउस था और सानंद ने वहां प्रूफ रीडर से लेकर चपरासी और थोक विक्रेता का भी काम किया।

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सानंद वर्मा
मात्र 8 साल की उम्र में ही सानंद 25 किलोमीटर पैदल चलकर पटना जाते थे और किताब बेचते थे। सानंद की जिंदगी में परिस्थितियां कुछ ऐसी हो गईं थीं कि उन्हें 12 साल की उम्र में ही बच्चों को ट्यूशन देनी पड़ी थी।
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सानंद वर्मा
खैर, इन सब मुश्किलों से सानंद वर्मा घबराए नहीं और कठिनाईयों को दरिया पार कर वो मुकाम हासिल किया जिस तक पहुंचने में एक आम इंसान को सालों लग जाएंगे।

सानंद वर्मा ने जो हासिल किया है उसे देखकर ये तो जरूर कहा जा सकता है, 'कौन कहता है आसमां में सुराग नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों।'
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