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Sunita Rajwar: ‘बनराकस’ की पत्नी ने तय किया गंदे कमरों से ‘कान’ तक का सफर, रावण के दरबार में करती थीं नृत्य

Wed, 06 Nov 2024 10:06 AM IST
सुवेश शुक्ला एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Sunita Rajwar:  आज सुनीता राजवार यानी की ‘पंचायत’ की ‘क्रांति देवी’ का जन्म दिन है। सुनीता ने ‘गुल्लक’ और ‘पंचायत’ जैसी वेब सीरीज से अपनी शानदार पहचान बनाई, लेकिन इस चमक के पीछे सुनीता का अथक संघर्ष और पीड़ा छिपी है। आइए जानते हैं सुनीता राजवार के सफर के बारे में…
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सुनीता राजवार - फोटो : अमर उजाला
'पंचायत' की क्रांति देवी और 'गुल्लक' की 'बिट्टू की मम्मी' तो याद ही होंगी आपको! इन किरदारों से घर-घर मशहूर हुईं अभिनेत्री सुनीता राजवार आज अपना 55वां जन्मदिन मना रही हैं। सुनीता को भले ही आज हम सभी उनके किरदारों से जानने और पहचानने लगे हैं, लेकिन एक समय ऐसा था कि सुनीता अभिनय छोड़ना चाहती थीं। वह अपने संघर्ष और एक ही तरह के मिल रहे किरदारों से थक चुकी थीं, लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी।

 
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सुनीता राजवार - फोटो : इंस्टाग्राम @sunita_rajwar
पिता थे फिल्मों के शौकीन
सुनीता का जन्म उत्तर प्रदेश के बरेली में हुआ, लेकिन उनका पालन पोषण उत्तराखंड के एक छोटे से कस्बे में हुआ। अपनी जिंदगी के शुरुआती 25 वर्ष उन्होंने उत्तराखंड में ही बिताए। बचपन से ही सुनीता को फिल्मी दुनिया अपनी ओर खींचती थी। उनके पिता को फिल्मों का बहुत शौक था। हर शुक्रवार को सुनीता के पिता उन्हें फिल्म दिखाने ले जाते थे। वह घर पर भी खूब फिल्में देखा करती थीं। सुनीता को अभिनय के साथ-साथ डांस का भी शौक था। गांव में होने वाली रामलीला में वह रावण के दरबार में नृत्य करती थीं। 
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सुनीता राजवार - फोटो : इंस्टाग्राम @sunita_rajwar
पिता के पेशे को रखती थी छिपाकर
सुनीता की शुरुआती जिंदगी काफी कठिन थी। उनके पिता एक ट्रक ड्राइवर थे और परिवार का भरण पोषण करने के लिए अथक परिश्रम करते थे। सुनीता ने अपने एक पुराने साक्षात्कार में बताया था कि वह अपने पिता के पेशे के बारे में बताने से हिचकिचाती थीं। वह लोगों से अपने पिता के काम के बारे में बात नहीं करती थी। हालांकि, अभिनेत्री को बाद में इस बात का एहसास हुआ की यह शर्म करने की बात नहीं है, बल्कि गर्व करने की बात है कि उनके पिता अथक परिश्रम करके अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिला रहे हैं। 

 

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सुनीता राजवार - फोटो : इंस्टाग्राम @sunita_rajwar
थिएटर ने अभिनय को निखारा
स्कूली नाटकों और नृत्य प्रतियोगिताओं से सुनीता का अभिनय के प्रति जुनून बढ़ता गया। कॉलेज में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के पूर्व छात्र ने उनकी प्रतिभा को देखा। प्रोत्साहित होकर, उन्होंने एनएसडी में दाखिला लिया, जहां तीन साल तक उन्होंने अभिनय के गुर सीखें और मनोरंजन जगत की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार किया। 

 
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सुनीता राजवार - फोटो : इंस्टाग्राम @sunita_rajwar
तंग और गंदे कमरों में गुजारे शुरुआती दिन
मन में दृढ़ संकल्प और तीस हजार रुपये लेकर सुनीता 90 के दशक के अंत में मायानगरी मुंबई की ओर चल पड़ी। यह वही नगरी थी, जहां सुनीता ने बड़े होने के ख्वाब सजाए थे, लेकिन शहर की जिंदगी इतनी आसान नहीं थी। वह एक जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर संघर्ष करती रहीं। वह साथी अभिनेताओं के साथ तंग और गंदे कमरे में रहने के लिए मजबूर थीं। उन्होंने ऐसे दिन भी देखें जब उन्हें किसी भूमिका के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था।

 
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सुनीता राजवार - फोटो : इंस्टाग्राम @sunita_rajwar
किस्मत ने लिया यू-टर्न
सुनीता वर्षों तक छोटे प्रोडक्शन में काम करती रहीं। उन्हें नौकरानी जैसे रोल मिलते रहे। इन सबसे निराश होकर उन्होंने दो साल के लिए अभिनय छोड़ दिया। बार-बार एक ही भूमिका मिलने से उनका मोहभंग हो गया। उन्होंने जैसे ही अपने करियर पर सवाल उठाया किस्मत ने उनका दरवाजा खटखटाया। उन्हें ‘गुल्लक’ में ऑडिशन के लिए बुलाया गया। ऑडिशन के बाद उन्हें 'बिट्टू की मम्मी' की भूमिका मिली। इस सीरीज के साथ सुनीता राजवार भी हिट हो गईं। हालांकि, अभिनेत्री आज भी अपनी सफलता का श्रेय उन छोटे-मोटे किरदारों को ही देती हैं, क्योंकि उनका मानना है कि उन्हीं किरदारों की वजह से वह यहां तक पहुंचीं। गुल्लक के बाद सुनीता ‘पंचायत’ सीरीज में ‘बनराकस’ की पत्नी ‘क्रांति देवी’ के किरदार में नजर आईं। यहां भी उन्होंने अपने किरदार से सभी का दिल जीत लिया।

 
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सुनीता राजवार - फोटो : इंस्टाग्राम @sunita_rajwar
सुनीता राजवार का फिल्मी सफर
सुनीता ने 'मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसके बाद वह ‘एक चालीस की लास्ट लोकल’, ‘स्त्री’, ‘केदारनाथ’ और ‘शुभ मंगल सावधान’ जैसी फिल्मों में नजर आईं। हालांकि, ओटीटी ने उन्हें स्टार बना दिया। वह लोगों की नजरों में प्रमुखता से आईं।

 
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सुनीता राजवार - फोटो : इंस्टाग्राम @sunita_rajwar
कान तक पहुंचीं सुनीता रजवार
सुनीता ने अथक संघर्षों के बाद वो मुकाम हासिल किया, शायद जिसका सपना उन्होंने देखा था। वह संध्या सूरी की फिल्म 'संतोष' का प्रतिनिधित्व करते हुए ‘77वें कान फिल्म फेस्टिवल’ में ‘रेड कॉर्पेट’ तक पहुंचीं। छोटे शहर की इस लड़की ने अपनी सफलता से ना जाने कितने ही सपने देखने वाली आंखों में नई रोशनी और उम्मीद जगा दी। वह इस क्षेत्र में आने वाली महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं। अंत में मुश्किलों की अंधेरी रात के बाद सुनीता के किस्मत का सूरज चमका और उनके सपनों का गुल्लक खुल गया।

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