राजेश खन्ना
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राजेश खन्ना के स्टारडम का दौर
राजेश खन्ना ने अपने दौर में ऐसा स्टारडम देखा है, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। चेतन आनंद की फिल्म ‘आखिरी खत’ (1966) से डेब्यू करने वाले राजेश खन्ना को एक वक्त बॉक्स ऑफिस का सबसे भरोसेमंद कलाकार माना जाता था। ‘आखिरी खत’ 40वें अकादमी पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा की फिल्म थी, जो भारत में बनाई गयी थी। इसके बाद 'राज' (1967), 'औरत' (1967) , 'बहारों के सपने' (1967), 'इत्तेफाक' (1969) और 'डोली' (1970) में काका ने अभिनय किया। उन्होंने लगातार 17 ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। 'आराधना' को फिल्मफेयर बेस्ट फिल्म का पुरस्कार मिला। राज खोसला की 'दो रास्ते' (1969) ने भी उनका ध्यान खींचा। इसके बाद राजेश खन्ना ने मुड़कर नहीं देखा। एक के बाद एक हिट फिल्में दीं। अलावा 'आनंद', 'अंदाज', 'हाथी मेरे साथी', 'बावर्ची', 'जोरू का गुलाम', समेत काका की तमाम फिल्में आज भी खूब पसंद की जाती हैं।