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Noor Jehan: भारत में भी खूब रही पाकिस्तानी गायिका नूर जहां की दीवानगी, लता ताई रहीं इनकी फैन

Mon, 23 Dec 2024 10:42 AM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Noor Jehan Death Anniversary: अपने दौर की मशहूर अदाकारा और सुरीली आवाज की मल्लिका पाकिस्तानी गायिका नूर जहां की आज पुण्यतिथि है। हिंदुस्तान में भी उनके चाहने वाले कम न थे। इनमें एक नाम स्वर कोकिला लता मंगेशकर का भी रहा।
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नूर जहां-लता मंगेशकर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत और पाकिस्तान, दोनों मुल्कों का तब बंटवारा नहीं हुआ था। सरहदें नहीं थीं। तब 21 सितंबर 1926 को लाहौर से लगभग 45 किलोमीटर दूर कसूर में एक बालिका का जन्म हुआ। नाम रखा गया अल्लाह राखी वसाई। अल्लाह राखी जब बड़ी हुईं तो अपनी सुरीली आवाज से सभी का दिल जीत लिया। उस पर वे बला की खूबसूरत भी और अदाकारी का हुनर कुदरती रूप से मिला। आगे चलकर सिनेमा की दुनिया में उन्हें नूर जहां के रूप में जाना गया। आज उन्हीं नूर जहां की पुण्यतिथि है। बंटवारे के बाद नूर जहां अपने शौहर के साथ पाकिस्तान चली गईं। मगर, उनकी आवाज की खनक दोनों मुल्कों में आज भी बरकरार है। आइए जानते हैं उनके बारे में...

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सात दशकों तक किया दर्शकों के दिलों पर राज
नूर जहां ने करीब सात दशकों तक प्रशंसकों के दिलों पर राज किया। जब वे पाकिस्तान गईं तो भारत में बेहद मशहूर गायिका और अदाकारा थीं। ‘दोस्त’, ‘जीनत’, ‘बड़ी मां’, ‘जुगनू’, ‘खानदान’ जैसी फिल्मों से वो भारत के घर घर में जानी-पहचानी जाती थीं। नूर जहां ने महान बनने के लिए बहुत मेहनत की थी और अपनी शर्तों पर जिंदगी जी। उनकी जिंदगी में अच्छे मोड़ भी आए और बुरे भी, उन्होंने शादियां कीं, तलाक दिए, प्रेम संबंध बनाए, नाम कमाया और अपनी जिंदगी के अंतिम क्षणों में बेइंतहा तकलीफ भी झेली।

पाकिस्तान जाकर किया फिल्म का निर्माण
सिंगर बनने के साथ नूर जहां एक शानदार एक्ट्रेस बनीं। उन्होंने साल 1930 में रिलीज हुई फिल्म 'हिन्द के तारे' से अपनी शुरुआत की और एक साल बाद ही उन्होंने खुद को लोकप्रिय चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर स्थापित कर लिया था। 1930 से लेकर 1947 तक उन्होंने खुद को एक शानदार अभिनेत्री के साथ-साथ गायिका के रूप में भी स्थापित कर लिया। उन्होंने न सिर्फ कोलकाता में काम किया, बल्कि मुंबई और लाहौर में भी काम करती नजर आई थीं। लेकिन भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के दौरान शौकत रिजवी ने पड़ोसी देश जाने का फैसला किया था, जिसके बाद नूरजहां भी अपने पति के साथ पाकिस्तान में रहीं। हालांकि, पाकिस्तान में जाकर उन्होंने अपना काम जारी रखा और यहां पर भी एक से एक फिल्म में काम किया। इतना ही नहीं, पाकिस्तान जाकर नूरजहां ने फिल्म 'चैनवे' का निर्माण और निर्देशन किया।

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10 हजार से ज्यादा गाने गाए 
पाकिस्तान जाने के बाद नूरजहां ने 'गुलनार', 'फतेखान', 'लख्ते जिगर', 'इंतेजार', 'अनारकली', 'परदेसियां', 'कोयल' और मिर्जा गालिब जैसी फिल्मों में अभिनय से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। साल 1963 में उन्होंने अभिनय की दुनिया को अलविदा कह दिया था। कहा जाता है कि उन्होंने इंडस्ट्री में रहते हुए 10 हजार से भी ज्यादा गाने गाए थे। 23 दिसंबर 2000 को नूर जहां ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

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लता मंगेशकर-नूर जहां - फोटो : सोशल मीडिया
नूर जहां की फैन थीं लता ताई 
नूर जहां की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि स्वर कोकिला लता मंगेशकर खुद उनकी बहुत बड़ी फैन थीं। कहा जाता है कि लता ताई नूर जहां को अपना आदर्श मानती थीं और खाली वक्त में उनके गाने सुना करती थीं। नूर जहां ने भी लता जी की गायकी को हमेशा सराहा। स्कार्स ऑफ 1947: रियल पार्टिशन स्टोरीज किताब के अनुसार लता जी एक बार अपनी दोस्त नूर जहां से मिलने पाकिस्तान के बॉर्डर पर पहुंची थीं। उनके पास वीजा-पासपोर्ट नहीं थे तो इसलिए उन्होंने पाकिस्तान जाने से मना कर दिया था। लता ने नूरजहां से बात की तब तय हुआ कि नूरजहां भी बार्डर पर ही आ जाएं। दोनों की मुलाकात के लिए नो मेन्स लैंड को चुना गया। उधर से नूरजहां पति के साथ आईं और दोनों की मुलाकात हुई।

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लता ताई के लिए बिरयानी लेकर आईं नूर जहां
लता मंगेशकर खाने की बहुत शौकीन थी। उनसे मिलने नूर जहां अपने हाथों की बनी बिरयानी लेकर आईं। और लता जी वो बिरयानी खाना चाहती थीं। मगर बॉर्डर से कोई भी सामान का आदान-प्रदान करना मुमकिन नहीं था। लेकिन, कहा जाता है कि लता जी और नूर जहां की गुजारिश पर वाघा बॉर्डर पर स्थित नो मैन्स लैंड में दोनों पहुंचीं और दोनों ने बिरयानी खाई।

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