फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Neeraj Pandey Interview: ‘औरों में कहां दम था’ फ्लॉप होगी, मुझे पहले से पता था, निर्देशक नीरज पांडे का खुलासा

सार

Neeraj Pandey Interview: सिनेमाघरों में रिलीज उनकी पिछली फिल्म ‘औरों में कहां दम था’ फ्लॉप रही, उनकी नई फिल्म ‘सिकंदर का मुकद्दर’ सीधे ओटीटी पर रिलीज हुई। इन दोनों फिल्मों के बारे में  नीरज पांडे से ये खास बातचीत की ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने।
विज्ञापन
1 of 12
नीरज पांडे - फोटो : अमर उजाला
फिल्म ‘ए वेडनेसडे’ के लिए नवोदित निर्देशक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने वाले नीरज पांडे इन दिनों खूब प्रयोग कर रहे हैं। नीरज हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा निर्देशकों में भी शामिल रहे जिनकी फिल्में लोगों ने सिर्फ उनके नाम की वजह से देखीं। बहुत ही बेबाक किस्म के फिल्मकार रहे नीरज अपनी फिल्मों की आलोचनाओं से भी कतराते नहीं है। सिनेमाघरों में रिलीज उनकी पिछली फिल्म ‘औरों में कहां दम था’ फ्लॉप रही, उनकी नई फिल्म ‘सिकंदर का मुकद्दर’ सीधे ओटीटी पर रिलीज हुई। इन दोनों फिल्मों के बारे में  नीरज पांडे से ये खास बातचीत की ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने।
 

 
विज्ञापन

2 of 12
सिकंदर का मुकद्दर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
ऐसा कैसे होता है कि कोई फिल्म ट्रेलर में बेहतरीन नजर आती है और लोग उसे देखने के लिए उत्सुक भी हो जाते हैं, कितनी मेहनत से बनाया आपने ‘सिकंदर का मुकद्दर’ का ट्रेलर?
सच ये है कि ये ट्रेलर मैंने एडिट नहीं किया। ये मेरी टीम का काम है। ऋषि नाम के हमारे एक सहकर्मी हैं, जिन्होंने इसे एडिट किया है। आज की तारीख में सारी चीजें फिल्म और दर्शकों के बीच के पहले संवाद पर टिकी होती हैं। ये पहला संवाद ट्रेलर की शक्ल में होता है। ट्रेलर देखकर ही लोग तय करते हैं कि वे सिनेमाघर जाएं या फिल्म के ओटीटी पर आने का इंतजार करें।

 
विज्ञापन

3 of 12
नीरज पांडे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
किसी फिल्म को चलाने के लिए उसके निर्देशक के नाम की कितनी स्टार वैल्यू होती है?
किसी फिल्म को चलाने के लिए सिर्फ निर्देशक ही नहीं बल्कि बहुत सारी चीजों का महत्व होता है। निर्देशक की प्रतिष्ठा बस निर्देशकों से उस पहले संवाद के बिंदु तक ही मायने रखती है और उसके बात इसका कोई मतलब नहीं रह जाता।

 

4 of 12
नीरज पांडे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मतलब कि आप खुद को स्टार डायरेक्टर नहीं मानते, राह चलते पहचानते नहीं हैं आपको लोग?
नहीं, कभी नहीं ऐसा हुआ कि राह चलते या किसी एयरपोर्ट पर मुझे किसी ने पहचान कर रोक लिया हो। इसकी एक वजह ये भी हो सकती है कि मैं तेज चलता हूं तो लोग पहचान ही नहीं पाते।

 
विज्ञापन

5 of 12
औरों में कहां दम था - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म ‘औरों में कहां दम था’ के तुरंत बाद ‘मुकद्दर का सिकंदर’ रिलीज हुई है, दोनों पर साथ साथ काम चल रहा था?
नहीं ‘मुकद्दर का सिकंदर’ की यात्रा काफी लंबी रही  है। इस पर काफी समय से काम चल रहा था। फिर बीते साल दिसंबर में हमने तय किया कि ये फिल्म बनानी है। मार्च में इसकी शूटिंग पूरी की और अब फिल्म आपके सामने हैं। उस समय ‘औरों में कहां दम था’ की शूटिंग पूरी हो चुकी थी और उसका पोस्ट प्रोडक्शन चल रहा था।

 
विज्ञापन

6 of 12
औरों में कहां दम था - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
‘औरों में कहां दम था’ की बात चल निकली है तो इसके परिणाम के बारे में क्या कहना चाहेंगे? कोई फिल्म सिनेमाघरों में पहले सप्ताहांत पर नहीं चलती है तो क्या फिर भी उम्मीद बनी रहती है कि हो सकता है दर्शक आ जाएं...?
फिल्म ‘औरों में कहां दम था’ सिनेमाघरों में नहीं चलेगी, ये मुझे इसकी रिलीज से पहले ही पता चल गया था। इसकी रिलीज डेट तीन बार हिली थी। फिल्म तो काफी पहले से तैयार थी, लेकिन हमें लोगों ने इसकी रिलीज डेट को लेकर भ्रमित कर दिया।

 
विज्ञापन

7 of 12
औरों में कहा दम था - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बतौर निर्देशक आपकी बात फिल्म की रिलीज डेट को लेकर नहीं सुनी जाती?
बतौर किसी फिल्म का निर्देशक किसी फिल्म की रिलीज की तारीख में मेरा बस इतना हक बनता है कि मैं इसके निर्माताओं को सावधान कर सकूं। उन्हें बता सकूं कि आप अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मार रहे हैं। उसके बाद ये किसी और का फैसला हो जाता है। उनका फैसला हो जाता है जिन्होंने इस फिल्म में पैसा लगाया है। जब भी कोई फिल्म अपनी तय रिलीज डेट से खिसकती है, तो ये बड़ा अपशकुन होता है। मेरे हिसाब से तो ये अंत की शुरूआत होती है।


 

8 of 12
सिकंदर का मुकद्दर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, अविनाश तिवारी को फिल्म ‘सिकंदर का मुकद्दर’ में बतौर नायक लेने के पीछे...
(बीच में ही बात काटकर) ना, ना, ना, अविनाश तिवारी इस फिल्म के नायक नहीं है। ये एक कलाकारों का समूह है (ऑनसॉम्बल कास्ट) जिसने एक साथ काम किया है। फिल्म में कोई नायक या प्रतिनायक नहीं है।

 

9 of 12
रुस्तम फिल्म पोस्टर - फोटो : इंस्टाग्राम @rustommovie
आपकी किसी फिल्म में आपके अलावा किसी दूसरे लेखक को क्रेडिट मिलना भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं..
हां, मैंने विपुल (रावल) के साथ मिलकर ये फिल्म लिखी है। पटकथा और संवाद हमने मिलकर लिखे हैं, इस फिल्म के। विपुल ने इसके पहले हमारे लिए ‘रुस्तम’ लिखी थी, लेकिन उसे मैंने नहीं टीनू ने निर्देशित किया था। वह हमारे साथ काफी अरसे से काम कर रहे हैं और ये पहली बार है कि मैंने उनके साथ मिलकर कोई फिल्म लिखी है।
 

10 of 12
सिकंदर का मुकद्दर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, ‘औरों में कहां दम था’ की तरह ही ‘सिकंदर का मुकद्दर’ भी दो अलग अलग काल खंडों की कहानी है?
वहां 24 साल का अंतर है और वह रिश्तों की कहानी है। यहां 15 साल की कहानी है और ये डकैती की कहानी है। दोनों में कोई समानता नहीं है। 

 

11 of 12
नीरज पांडे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आप चूंकि फिल्म निर्माता भी हैं तो किसी भी फिल्म कंपनी के लिए कितना जरूरी होता है कि आने वाले दिनों की एक स्लेट (निर्माणाधीन फिल्मों की सूची) बनाकर रखे ताकि अगर एक फिल्म न चले तो दूसरी फिल्म पर उम्मीदें टिकी रहें..
हमें ये बात अच्छी तरह से पता है कि हम एक ऐसे कारोबार में हैं जहां कुछ फिल्में चलेंगी और कुछ नहीं चलेंगी। तो कभी कुछ जब चल जाता है तो हम पागल नहीं हो जाते कि अरे ये फिल्म चल गई। और, जब कोई फिल्म नहीं चलती है तो भी हम सामान्य ही रहते हैं। ये कारोबार ऐसा ही है। 

 
विज्ञापन

12 of 12
'लैला मजनू' - फोटो : इंस्टाग्राम @sajidaliog
तो जैसे आपने अविनाश तिवारी के कंधे पर हाथ रखा और उन्हें ओटीटी में लॉन्च किया, वैसे ही कोई और सितारा है जिसे लॉन्च करने की तैयारी है? या किसी नए निर्देशक के साथ आपकी कंपनी कोई फिल्म बनने जा रही हो?
अविनाश पहले से काम करते आ रहे हैं। ‘लैला मजनू’ में उनकी लॉन्चिंग हुई। हां, ओटीटी सीरीज पर हम उन्हें लेकर आए। अगर मैं गलत नहीं हूं तो यही उनकी पहली वेब सीरीज थी। नए लोगों के साथ हम काम करते रहते हैं, हालांकि इससे हमारे कारोबारी भागीदार थोड़ा असहज भी होते हैं।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें