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Soul Movie Review: डिजनी ने ओटीटी पर रिलीज की साल की सबसे बेहतरीन फिल्म, मिले सबसे ज्यादा स्टार्स

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Soul Movie Review - फोटो : अमर उजाला
Movie Review: सोल
लेखक: पीट डॉक्टर, माइक जोन्स, केम्प पॉवर्स
आवाजें: जैमी फॉक्स, टीना फे, क्वेस्टलव, फिलिसिया राशद, डावीड डिग्स, एंजेला बैसेट आदि
निर्देशक: पीट डॉक्टर
निर्माता: डाना मरे
रेटिंग: ****1/2

समय कैसा भी हो, गुजर ही जाता है। साल 2020 भी ऐसा ही है। लेकिन, जाते जाते ये सिनेमा की एक ऐसी सौगात देकर जा रहा है, जिसे आने वाले बरसों में लोग एक क्लासिक एनीमेशन फिल्म के तौर पर याद करेंगे। पिछले साल पिक्सार के एमरीविले स्टूडियो में जब ऑस्कर विजेता निर्देशक पीट डॉक्टर से मुलाकात हुई तो ‘मॉन्सटर्स इंक’, ‘इनसाइड आउट’ और ‘अप’ जैसी जीवन दर्शन समझाने वाली फिल्मों के इस निर्देशक ने ‘सोल’ की प्रेरणा बाप बेटे के संवाद को बताया था। लेकिन, ये फिल्म उससे कहीं आगे की कहानी है। और, पीट इसके लिए भले इजरायल से लेकर अपने देश की धार्मिक गाथाओं में संदर्भ तलाशते रहे हों, लेकिन ये फिल्म खालिस हिंदुस्तानी है।
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Soul Movie Review - फोटो : अमर उजाला
जीने से पहले आत्मा कैसे एक शरीर पाने के लिए तैयारी करती है और शरीर छोड़ने के बाद जहां उसे जाना है, वहां क्या अपने जीवन का सपना पूरा किए बगैर वह खुशी खुशी जाना चाहेगी? स्वागत है, एक ऐसी फिल्म में जिसे आप पूरे परिवार के साथ साल बीतने की छुट्टियों के बीच देख सकते हैं। फिल्म परफेक्ट फाइव स्टार फिल्म है, लेकिन आधा स्टार इसका मैं काट ले रहा हूं कि कहीं नजर न लग जाए।
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Soul Movie Review - फोटो : अमर उजाला
डिजनी पिक्सार की फिल्म ‘सोल’ की आत्मा इसके किरदार और उनके जीवन जीने का नजरिया है। ये सितारों से आगे की बातें हैं। वहां की, जहां आत्माएं शरीर से बिछड़ने के बाद जाती हैं। पार्टटाइम म्यूजिक टीजर से फुल टाइम म्यूजिक टीचर बने जो की एक ही अभिलाषा है कि वह एक दिन किसी कंसर्ट में अपना कमाल दिखाए। उसका एक शागिर्द उसके नाम की सिफारिश न्यूयॉर्क की सबसे बड़ी जैज आर्टिस्ट से करता है। जो को वह मौका मिल जाता है जिसके लिए वह जी रहा था और फिर..! कुत्ते से बचकर भागा जो मेनहोल में गिरता है। आत्मा उसकी शरीर से अलग हो जाती है। पर वह मोक्ष नहीं पाना चाहता। उसकी आत्मा को स्वर्ग नहीं चाहिए। वह वहां से भी भागता है और गिरकर पहुंच जाता है वहां जहां आत्माएं किसी शरीर में जन्म लेने से पहले की तैयारी कर रही हैं। लेकिन, आत्मा वही धरती पर जा पाएगी, जो वहां जाने का अपना मकसद पा सके! आपको धरती पर आने का अपना मकसद याद आया क्या?

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Soul Movie Review - फोटो : अमर उजाला
फिल्म ‘सोल’ की जान इसकी पटकथा और इसके संवादों में बसती है। ध्यान रहे ये एक ऐसे निर्देशक की फिल्म है जो अपनी दो एनीमेशन फिल्मों ‘अप’ और ‘इनसाइड आउट’ के लिए ऑस्कर पुरस्कार जीत चुका है। आत्माओं को जन्म के लिए तैयार करने वाली नर्सरी या कहें कि यूथ सेमिनार में ही जो को आत्मा नंबर 22 मिलती है। उसे धरती पर आने में कोई दिलचस्पी नहीं। महात्मा गांधी से लेकर अब्राहम लिंकन और मदर टेरेसा तक की आत्माएं उसे जन्म लेने का मकसद नहीं सिखा सकीं। लेकिन, जो? सेलेब्रिटीज के पीछे भागने वाली दुनिया को जो के किरदार के जरिए पीट डॉक्टर समझाते हैं कि प्रेरणाएं हमारे आसपास भी हो सकती हैं। दूसरों से प्रेरणा ढूंढने में समय गंवाने की बजाय हम खुद दूसरों की प्रेरणा कैसे बन सकते हैं, चिंतन इस बात पर करना जरूरी है। आधुनिक ‘भक्तिकाल’ में ऐसी बातें समझाना जरूरी भी है। पीट समझाते यहां ये भी है कि ऊपर भी जो कुछ हो रहा, वह फुलप्रूफ नहीं है। गलतियां वहां भी हो सकती हैं
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Soul Movie Review - फोटो : अमर उजाला
फिल्म ‘सोल’ पिक्सार एनीमेशन स्टूडियो की पेशकश है यानी इसका सारा का सारा एनीमेशन कंप्यूटर पर बना है। इसी कंपनी में पीट डॉक्टर पिछले तीस साल से काम कर रहे हैं। वह मन लगाकर काम कर रहे हैं। कंपनी उनका करियर बना रही है। फिल्म ‘सोल’ को लेकर पिक्सार स्टूडियो में उनसे जो मुलाकात हुई उसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग मैं अक्सर सुनता रहता हूं। वह भी किसी जीवन दर्शन से कम नहीं है। ‘सोल’ की सोल ये है कि बिना किसी मकसद के जीना बेकार है और उस मकसद को पाने में जिंदगी लगा देना ही खुद से प्यार है। और, अगर ऐसा न भी हो सके तो भी दूसरों के चेहरों पर मुस्कुराहट ला पाने से बड़ी नेमत नहीं है। जो पहली कंसर्ट का मौका मिलने के तुरंत बाद जिस सैलून वाले से बात करता है, उससे जब वह अपने शरीर और 22 की आत्मा के साथ मिलता है तो दोनों का संवाद भी किसी जीवन दर्शन से कम नहीं है।
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Soul Movie Review - फोटो : अमर उजाला
फिल्म के एनीमेशन किरदारों के लिए पीट ने आवाजें भी बहुत उम्दा और बिल्कुल मुफीद तलाशी हैं। जैमी फॉक्स ने तो जैसे जो गार्डनर को अपनी आवाज़ से जी दिया है। 22 की आवाज बनी टीना फे का भी कमाल बस सुनते ही बनता है। जैमी और टीना की आवाजें किसी बेहतरीन जुगलबंदी सा माहौल बनाती हैं। ट्रेंट रेजनॉर व एटिकस रॉस का संगीत फिल्म में किसी किरदार की तरह है। फिल्म का नायक जो गार्डनर ही चूंकि एक म्यूजीशियन है, ऐसे में फिल्म का संगीत अव्वल से भी आगे का बनाने में इन दोनों ने अद्भुत योगदान किया है।
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एनीमेशन फिल्मों में सिनेमैटोग्राफी भी अब समझना जरूरी है। ये ऐसे होता है कि एनीमेशन बनने के बाद कंप्यूटर में इसका सीन ठीक वैसे ही रचा जाता है जैसे कि किसी आम फिल्म की शूटिंग होती है, फिर उसमें एक वर्चुअल कैमरा अंदर ले जाया जाता है। यहां ये कमाल मैट अस्पबरी और इयान मेगिब्बेन का है। फिल्म की वीडियो एडीटिंग इसकी रफ्तार कहीं भी सुस्त नहीं होने देती और केविन नॉल्टिंग ने ये जिम्मेदारी संभालकर फिल्म को वन गो वॉच फिल्म बना दिया है।
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क्रिसमस पर रिलीज हुई फिल्म ‘सोल’ इस साल की सबसे बेहतरीन फिल्म है। इसकी मुख्य किरदार 22 (ट्वेंटी टू) सिर्फ एक लाइन में फिल्म का पूरा फलसफा समझा देती है, ‘डोंट वरी, यू कान्ट क्रश ए सोल हियर। दैट्स व्हाट लाइफ ऑन अर्थ इज फॉर।’ (परेशान होने की जरूरत नहीं है, यहां तुम किसी की आत्मा को कुचल नहीं सकते, ये तो धरती पर जिंदगी का मकसद माना जाता है!) है ना डीप, वेरी डीप!
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