फिल्म रिव्यू: शेरनी
लेखक: आस्था टिकू, यशस्वी मिश्रा, अमित मसुरकर
कलाकार: विद्या बालन, बृजेंद्र काला, शरत सक्सेना, मुकुल चड्ढा, इला अरुण और विजय राज आदि।
निर्देशक: अमित मसुरकर
ओटीटी: प्राइम वीडियो
रेटिंग: ***1/2
'अगर विकास के साथ जीना है तो पर्यावरण को बचा नहीं सकते और अगर पर्यावरण को बचाने जाओ तो विकास बेचारा उदास हो जाता है।’ ये संवाद फिल्म ‘शेरनी’ की पूरी कहानी एक लाइन में बयां कर देता है। वह फिल्म याद है आपको? राजेश खन्ना के सुपरस्टारडम के दौर की फिल्म ‘हाथी मेरे साथी’। उसके एक गाने की लाइन है, ‘जब जानवर कोई इंसान को मारे, कहते हैं दुनिया में वहशी उसे सारे, एक जानवर की जान आज इंसान ने ली है, चुप क्यों हैं संसार…!’ संसार की इसी चुप्पी पर निर्देशक अमित मसुरकर का दिल रोया है फिल्म ‘शेरनी’ बनकर। जन, जंगल और जिंदगी के बीच झूलती अमित की ये नई फिल्म उस फिल्मकार की विकसित होती शैली की एक और बानगी है जिसकी पिछली फिल्म ‘न्यूटन’भी इन तीन मुद्दों की भूलभुलैया का रास्ता तलाश रही थी। इस बार उनके साथ हैं अपनी हर फिल्म से अदाकारी की और बड़ी लकीर खींचती विद्या बालन। एक आईएफएस विद्या विन्सेन्ट के रोल में।