मूवी रिव्यू: रे
लेखक: सत्यजीत रे की लघुकथाओं पर आधारित
पटकथा लेखक: सिराज अहमद, निरेन भट्ट
कलाकार: अली फजल, श्वेता बसु प्रसाद, अनिंदिता बोस, के के मेनन, बिदिता बाग, मनोज बाजपेयी, गजराज राव, हर्षवर्धन कपूर और चंदन रॉय सान्याल आदि।
निर्देशक: श्रीजीत मुखर्जी, अभिषेक चौबे और वासन बाला।
ओटीटी: नेटफ्लिक्स
रेटिंग: **
नेटफ्लिक्स को फिल्मावली (फिल्म एंथलॉजी) पकाने में आनंद आता है। सत्यजीत रे का जन्म शताब्दी वर्ष चल रहा है तो एक फिल्मावली उनकी कहानियों पर भी सही। पोस्टर बिल्कुल रे की लघु कथाओं जैसा ही है। कोई महिला किरदार नहीं। लेकिन, उनकी लघु कथाओं का रूपांतरण वैसा हो नहीं पाया जैसा कि सत्यजीत रे की पहचान रही है। सत्यजीत रे का सिनेमा मन के भीतर का सिनेमा है। अकेला इंसान क्या सोचता है, क्या दुनिया को दिखाता है और क्या उसको लोग समझ पाते हैं, ये सत्यजीत रे के सिनेमा, कथाओं, कलाकारी, कारीगिरी में चुपचाप रिसता रहता है। वहां बहाव नहीं है। धारा का वेग तो बिल्कुल नहीं। वॉयकॉम 18 की डिजिटल विंग टिपिंग प्वाइंट कोशिशें लगातार अच्छी कर रही है, लेकिन ‘शी’, ‘जमाताड़ा’ और ‘ताजमहल 1989’ में मामला कच्चा पक्का ही रहा। 2018 में घोषित हुई सत्यजीत रे की कहानियों की सीरीज का नाम तब था ‘एक्स रे: सेलेक्टेड सत्यजीत शॉर्ट्स’। कुल 12 कहानियां और निर्देशक श्रीजीत मुखर्जी।