फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाइस्कोप: उर्मिला से पहले इन हीरोइनों को ऑफर हुई ‘रंगीला’, आमिर ने इस बार किया शाहरुख का ठुकराया रोल

विज्ञापन
1 of 8
रंगीला - फोटो : अमर उजाला
चलिए, आज उस फिल्म का नंबर भी आ गया जिसमें दिखे बाइस्कोप पर मैंने इस कॉलम का नाम रखा, ‘बाइस्कोप’। फिल्म का नाम- रंगीला। निर्देशक- राम गोपाल वर्मा। और, फिल्म के रंगीला राजा रहे आमिर खान। आमिर खान ने भले फिल्म में वाकई रंगीला दिखने के लिए अपने बनाए खास कपड़े पहने हों, कुछ दिन जाकर चॉल और झोपड़पट्टी में बिताए हों, और वहां की टपोरी भाषा सीखने के लिए बड़ी मेहनत की हो, लेकिन फिल्म ‘रंगीला’ का असल फायदा अगर किसी को हुआ तो वह रहीं राम गोपाल वर्मा की उस वक्त की बेहद करीबी दोस्त उर्मिला मातोंडकर। उर्मिला का नंबर इस रोल के लिए श्रीदेवी, मनीषा कोइराला और रवीना टंडन का नाम चर्चा में आने के बाद ही लगा। हालांकि, राम गोपाल वर्मा कहते हैं कि फिल्म ‘द्रोही’ में बिना किसी कोरियोग्राफर के उर्मिला ने जो कमाल का डांस अपने आप किया, उससे प्रभावित होकर उन्होंने उर्मिला को ‘रंगीला’ के लिए कास्ट किया था। फिल्म ‘रंगीला’ ऐसी फिल्म भी है, जिसकी कास्टिंग में अगर राम गोपाल वर्मा की चलती तो इसमें जोड़ी जैकी श्रॉफ और आमिर खान की नहीं बल्कि सलमान खान और शाहरुख खान की बनती। जी हां, शाहरुख खान को इस फिल्म में आमिर खान वाला और सलमान खान को जैकी श्रॉफ वाला रोल ऑफर हुआ था।

बाइस्कोप: ‘काका’ के चलते विनोद खन्ना ने नहीं किए डिंपल के साथ इंटीमेट सीन, जैकी की बेस्ट एक्टिंग

 
विज्ञापन

2 of 8
रंगीला - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
आर्थिक उदारीकरण की झलक
साल 1995 हिंदी सिनेमा में मोहब्बत का एक नया दौर शुरू करने वाला साल रहा है। ये वो साल है जिसमें रिलीज हुई फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ में सिमरन को अकेले विदेश में सैर करते दिखाया गया। और, ‘रंगीला’ में दिखाया गया कि मिली अकेले मोहल्ले के एक टपोरी टाइप के लड़के के साथ भी घूमने चली जाए तो परिवार में किसी को दिक्कत नहीं है। यहां मुन्ना घर में घुलमिल जाता है, वहां राज भी आकर घरवालों से घुलमिल जाता है। ये पी वी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह के सपनों का भारत है, जो आर्थिक उदारीकरण में बदले सपनों में हिलोरें ले रहा है। दुनिया खुल रही है। मां-बाप ने बच्चों के आसपास जकड़ी बेड़ियों भी खोल दी हैं। बच्चे सपने देख रहे हैं। गानों में ख्वाहिशें बदल रही हैं। लेकिन, आम आदमी यानी मुन्ना अब भी ब्लैक में सिनेमा की टिकटें बेचकर ही गुजारा कर रहा है। और, पुलिस वाला जब उसे पकड़ता है तो वह ताना भी मारता है कि बड़े बड़े घोटाले करने वालों को कोई नहीं पकड़ता एक आम आदमी का मेहनत करने भी जीना मुश्किल है।

Aaj Ki Awaz का बाइस्कोप: यहां देखिए राज बब्बर और स्मिता पाटिल की असली प्रेम कहानी, कैमरे की जुबानी
विज्ञापन

3 of 8
रंगीला - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
ऋषिकेश मुखर्जी के सिनेमा का सतरंगी संस्करण
गौर करके देखेंगे तो फिल्म ‘रंगीला’ एक तरह से ऋषिकेश मुखर्जी के सिनेमा का सतरंगी संस्करण है। वही आम जिंदगी की सपनीली हसरतें। इन हसरतों के पीछे भागती आम जिंदगी। फिल्म में सब कुछ अच्छा अच्छा है। मिली अच्छी है। मुन्ना अच्छा है। राज कमल भी तो अच्छा ही है। कोई विलेन नहीं है फिल्म में। ये बात जब आमिर खान ने फिल्म की कहानी के बाद पकड़ी तो फिल्म के लेखक निर्देशक राम गोपाल वर्मा को बहुत अच्छा लगा। उन्होंने आमिर खान को फिल्म की अंतर्धारा समझाई और आमिर पहली ही बार में उस रोल के लिए मान गए जिसके लिए शाहरुख खान कहते हैं कि कई बैठकों के बाद भी अपना मन नहीं बना पाए। आमिर खान का अपने किरदारों के साथ प्रयोग करने का सिलसिला उनके फिल्म ‘रंगीला’ के किरदार मुन्ना से ही माना जाता है। ये बात और है कि फिल्म में इतने जानदार अभिनय के बाद भी जब उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट एक्टर अवार्ड नहीं मिला तो उसके बाद से ही आमिर खान ने फिल्म पुरस्कार समारोहों में जाना बंद कर दिया। वैसे गुस्सा आमिर को ‘रंगीला’ से पहले फिल्म ‘जो जीता वही सिकंदर’ के लिए भी पुरस्कार न मिलने का भी रहा था। लेकिन, ‘रंगीला’ में उनकी मेहनत की उपेक्षा किए जाने ने उनका दिल तोड़ दिया।

बाइस्कोप: जब ‘रंगबाज’ अनिल कपूर ने बदली शबाना आजमी की पहली धारणा, ‘एक बार कहो’ के पूरे हुए 40 साल

4 of 8
रंगीला - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
सिनेमा की हर तकनीक का उम्दा इस्तेमाल
कहानी, निर्देशन, संगीत, संवाद, सिनेमैटोग्राफी और एडीटिंग के लिहाज से देखेंगे तो ‘रंगीला’ किसी टेक्स्ट बुक फिल्म से कम नहीं है। सिनेमा की पढ़ाई करने वालों को भी ये फिल्म दिखाई जाती है। ये फिल्म राम गोपाल वर्मा का हिंदी सिनेमा में ऐलानिया आगमन है। ‘शिवा’, ‘द्रोही’ और ‘रात’ के बाद राम गोपाल वर्मा ने बनाई थी फिल्म ‘रंगीला’। पहले की तीन फिल्मों से उन्होंने उस वक्त की बागी टाइप की युवा पीढ़ी को अपने साथ जोड़ ही लिया था, बस युवा जोड़ों को उन्हें थोड़ा और भरमाना था और ये काम ‘रंगीला’ ने कर दिया। उस वक्त की सामाजिक परिस्थितियों के सारे सपने इस फिल्म ने एक बार में ही दिखा दिए। झोपड़पट्टी में रहने वाला जिस लड़की से प्यार करता है, वह लड़की हीरोइन बनने के सपने देखती है, देश के सबसे बड़े सुपरस्टार राज कमल को वह पसंद आती है। लेकिन, मुन्ना और राजकमल जब पहली बार एक छत के नीचे होते हैं, तो वहां से हिंदुस्तान के दो पालों में बंटी तस्वीर भी साफ नजर आ ही जाती है। एक तरह है सपने देखता भारत और दूसरी तरफ है इन सपनों में रहता भारत। मुन्ना और राज कमल आर्थिक उदारीकरण की एक ऐसी तस्वीर पेश करते हैं जिसमें दोनों तरफ के चित्र रंगीन हैं, बस जिंदगी हसीन होना एक का ही नसीब है।

पढ़ें: बाइस्कोप: अमिताभ को इस फिल्म में लगा शत्रुघ्न सिन्हा की शोहरत से डर, लता मंगेशकर को देनी पड़ी धमकी
विज्ञापन

5 of 8
रंगीला - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
मुन्ना को चाहिए हर किसी की तवज्जो
‘रंगीला’ उन गिनती की हिंदी फिल्मों में से है जिनको हॉलीवुड में फिर से बनाया गया। इस फिल्म की रीमेक हॉलीवुड में ‘विन ए डेट विद टैड हैमिल्टन’ के नाम से बनी है। बाद में एक हिंदी फिल्म ‘ब्रेक के बाद’ की कहानी भी बहुत कुछ मिली और मुन्ना जैसी ही है। मुन्ना और मिली दोनों उस वक्त के समाज के दो ऐसे पहलू हैं जिन्हे राम गोपाल वर्मा ने अपनी कहानी का आदर्श बनाकर पेश किया है। मुन्ना गरीब है लेकिन दिल का राजा है। जहां भी पहुंचता है, चाहता है कि लोग उसे देखें। रेस्तरां में जाता है तो एसी घुमाने के लिए बोलता है। पिक्चर देखने जाता है तो पैर हटाने को बोलने वाले को भी टांग देता रहता है। वह आकर्षण का भूखा है। दिक्कत ये है कि तब ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक नहीं हैं। वह अपना सोशल मीडिया खुद ही है। यही आदत आज 25 साल बाद देश के हर उस इंसान में देखी जा रही है जिसे सोशल मीडिया की रत्ती भर भी लत लग चुकी है। वह हर रोज सुबह उठकर एसी घुमाने को बोल ही देता है।

पढ़ें: बाइस्कोप: मोहम्मद रफी को इस फिल्म के लिए मिला इकलौता नेशनल अवार्ड, ऋषि और जीनत की फिर नहीं बनी जोड़ी
विज्ञापन

6 of 8
रंगीला - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
रातोंरात उर्मिला बनीं सुपरस्टार
फिल्म ‘रंगीला’ ने तमाम लोगों की किस्मत में नए सितारे उस समय टांक दिए थे। फिल्म ने इसके निर्माता निर्देशक राम गोपाल वर्मा को ‘उभरते निर्देशक’ से ‘चोटी के निर्देशक’ वाली श्रेणी में पहुंचा दिया। आमिर खान जिनको उस वक्त एक हिट फिल्म की शिद्दत से तलाश थी, उनके करियर को ‘रंगीला’ ने न सिर्फ वापस पटरी पर ला दिया बल्कि उनके अंदर अपने किरदारों को लेकर प्रयोग करने का हौसला भी भर दिया। ये अलग बात है कि इस फिल्म की मेकिंग के दौरान आमिर खान और राम गोपाल वर्मा आपस में इतनी बार और इतनी बुरी तरह से उलझे कि फिर दोबारा दोनों ने एक दूसरे के साथ काम करने का मन ही नहीं बनाया। ‘रंगीला’ अपने समय की ब्लॉकबस्टर फिल्म रही। इसी फिल्म ने उर्मिला मातोंडकर को रातोंरात स्टार बना दिया। फिल्म का नाम भले ‘रंगीला’ रहा हो लेकिन अखबारों और पत्रिकाओं में ‘रंगीली गर्ल’ बनकर उर्मिला ही मशहूर हुईं। फिल्म में काम भी उन्होंने कमाल किया। फिल्म की ओपनिंग क्रेडिट्स खत्म होते ही उर्मिला एक शॉर्ट ड्रेस पहने एक बाइस्कोप में झांकती दिखती हैं और उनके कैमरे से हटने के साथ ही उनकी तरफ लोगों की जो आंखें घूमती हैं, वे फिल्म का मूड सेट करती हैं। ‘रंगीला रे’ गाने के बोल उस समय के युवाओं के सपने सेट करते हैं, एक बानगी देखिए..इस गाने में उदित नारायण भी दिखेंगे, तमाम वे ब्रांड गिनाते जो आर्थिक उदारीकरण में बच्चों के गले उतारे जा रहे थे..

इतने चेहरों में, अपने चेहरे की पहचान तो हो
बड़े बड़े नामों में अपना भी नामोनिशान तो हो
जीने में फिर तो क्या बात हो,
दिन नया और नई रात हो...


पढ़ें: बाइस्कोप: पहली ही फिल्म में सलमान का इस बात को लेकर हो गया पंगा, हीरोइन ने इंडस्ट्री ही छोड़ दी

विज्ञापन

7 of 8
रंगीला - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
ए आर रहमान का दमदार आगाज
फिल्म ‘रंगीला’ ने ए आऱ रहमान को हिंदी सिनेमा में एक नई लोकप्रियता दी। ये उनकी पहली हिंदी फिल्म भी है, इसके पहले की जिन फिल्मों में भी रहमान का संगीत सुनाई दिया था, वे सब दूसरी भाषाओं की फिल्मों के लिए बना संगीत था जिनमें हिंदी के बोल बिठाने का कमाल का काम किया था गीतकार महबूब ने। महबूब ने ही फिल्म ‘रंगीला’ के गाने भी लिखे। रहमान की संगीतबद्ध हिंदी फिल्मों में बाद में गुलजार ने भी तमाम फिल्मों के गाने लिखे, लेकिन बोलों के लिहाज से जो सबसे दमदार हिंदी फिल्म रहमान की फिल्मोग्राफी में है, वह है ‘रंगीला’। फिल्म का एक और गाना है जिसमें उर्मिला ने अपने हुस्न का कमाल दिखाया है, ‘तन्हा तन्हा जीना ये भी कोई बात है..!’ इसे गाते समय आशा भोसले 61 साल की थीं। आशा भोसले की एक आदत रही है वह गाना गाने से पहले हीरोइन का नाम जरूर पूछती हैं जिन पर ये गाना फिल्माया जाएगा। जब इस गाने की रिकॉर्डिंग पर उनको उर्मिला का नाम पता चला तो उन्होंने फिर पूरा गाना एक दुबली पतली लड़की के अंदाज में ही गाया। ये गाना उनको एक बार फिर मुख्य धारा के पार्श्वगायन में भी ले आया था। लता मंगेशकर की तरह उन्होंने भी नए गायकों के लिए खुद पुरस्कारों से दूरी बना ली थी लेकिन इस गाने के लिए उन्हें स्पेशल मेंशन अवार्ड दिया गया। ये गाना फिल्म में सरोज खान ने कोरियाग्राफ किया है और फिल्म का सबसे हिट गाना भी यही है। ये अलग बात है कि इस गाने की शूटिंग के दौरान ही रामू और सरोज खान की खटपट हो गई जिसके बाद सरोज खान के असिस्टेंट अहमद खान को रामू ने फिल्म का कोरियोग्राफर बना दिया। इसी झगड़े के चलते ‘तन्हा तन्हा’ गाना भी आधा गोवा में और आधा मुंबई में शूट हुआ है।

पढ़ें: बाइस्कोप: जब जॉन की हेयरस्टाइल का जमाना हुआ दीवाना और अभिषेक ने रिमी सेन के साथ की ‘डर्टी डांसिंग’

विज्ञापन

8 of 8
रंगीला - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
चलते चलते...
आमिर खान, उर्मिला मातोंडकर और जैकी श्रॉफ के अभिनय के अलावा ए आर रहमान के संगीत ने फिल्म ‘रंगीला’ में एक किरदार की तरह काम किया। ये अलग बात है आमिर खान को तब इस फिल्म का संगीत बिल्कुल पसंद नहीं आया था। रहमान ने फिल्म ‘रंगीला’ के संगीत के लिए दो फिल्मफेयर पुरस्कार जीते। फिल्म ने कुल मिलाकर सात फिल्मफेयर पुरस्कार उस साल जीते थे। फिल्म में कुल सात गाने हैं और फिल्म का ऑडियो लॉन्च रहमान की मां करीमा ने किया था। फिल्म ‘रंगीला’ का साउंडट्रैक हिंदी सिनेमा के सबसे बेहतरीन संगीत में गिना जाता है। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।

पढ़ें: बाइस्कोप: रेखा की नाक के नीचे से मौसमी ले उड़ीं ये रोल, समझिए क्यों जरूरी है बीवी को समय देते रहना

(बाइस्कोप अमर उजाला डिजिटल का दैनिक कॉलम है जिसमें हम उस दिन रिलीज हुई किसी पुरानी फिल्म के बारे में चर्चा करते हैं।)

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें