Movie Review: राम प्रसाद की तेहरवीं
कलाकार: मनोज पाहवा, विनय पाठक, परमब्रत चट्टोपाध्याय, कोंकणा सेन शर्मा, विक्रांत मैसी, दीपिका अमीन, सुप्रिया पाठक और नसीरुद्दीन शाह
लेखक, निर्देशक: सीमा पाहवा
निर्माता: जियो स्टूडियोज और दृश्यम फिल्म्स
रेटिंग: **
एक अच्छी हल्की फुल्की फिल्म और एक औसत सी चुटकुलों में हंसी तलाशती फिल्म के बीच फर्क बस बारीक सा होता है। उतना ही बारीक जितना अंक तेरह को तेहर पढ़ने में होता है या फिर तेरहवीं को तेहरवीं पढ़ने में। लेकिन, सिनेमा की बलिहारी है। यहां सब बिकता है बशर्ते बेचने वाले को बेचना आता हो। प्रोडक्ट अच्छा हो या खराब, मार्केटिंग बढ़िया तो यहां तो हर किसी के हिस्से में कामयाब। मनीष मूंदड़ा पैसा जहां से भी लाते हों, पर सिनेमा अच्छा बनाते हैं। इसी बात को लेकर उनकी जै जैकार भी होती रही है, लेकिन इन फिल्मों से पैसा भी वह बढ़िया बनाते हैं। कभी शाहरुख खान की कंपनी को अपनी फिल्मोग्राफी से चौंधियाते हैं तो कभी मुकेश अंबानी की कंपनी को। लेकिन, समय तेजी से बदल रहा है। ‘मसान’, ‘न्यूटन’ और यहां तक कि ‘कड़वी हवा’ जैसी फिल्में देखने दर्शक अब सिनेमाघर तो नहीं ही जाएंगे, हां ओटीटी पर ऐसी फिल्में वो घर में चाय पराठे के साथ इत्मीनान से देख सकते हैं। मनीष मूंदड़ा के सिनेमा का भविष्य भी वही है।