परिंदा
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
चलते चलते...
उस समय सिर्फ 12 लाख में बनी फिल्म ‘परिंदा’ को बाद में विधु ने अंग्रेजी में ‘ब्रोकेन हॉर्सेस’ के नाम से भी बनाया। फिल्म ‘परिंदा’ की तमाम खासियतों में से एक खासियत ये भी है कि ये फिल्म मुंबई की रीयल लोकेशंस पर शूट हुई है। अनुपम खेर के मरने का सीन मशहूर कबूतरखाना पर शूट हुआ है। फिल्म का नाम भी पहले ‘कबूतरखाना’ ही रखा गया था। विधु विनोद चोपड़ा ने इस फिल्म के कलाकारों की शूटिंग डेट्स के अलाव रिहर्सल की भी डेट्स ली थीं। इसका फायदा ये हुआ कि शूटिंग के वक्त तक हर कलाकार को अपनी लाइनें कंठस्थ हो चुकी थीं और सबने शूटिंग के समय स्क्रिप्ट खोलकर तक नहीं देखी। फिल्म में वास्तविक लोकेशन का इस्तेमाल इस कदर हुआ है कि अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित वाला क्लाइमेस सीन असल के न्यू ईयर सेलिब्रेशन पर शूट हुआ है। फिल्म को शूट होने में वैसे तो कुल 66 दिन ही लगे लेकिन ये 66 दिन मिलने में विधु को पूरे तीन साल लग गए। इस दौरान क्लामेक्स की शूटिंग के दौरान नाना घायल भी हुए और अस्पताल में भर्ती रहे। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।
(बाइस्कोप अमर उजाला डिजिटल का दैनिक कॉलम है जिसमें हम उस दिन रिलीज हुई किसी पुरानी फिल्म के बारे में चर्चा करते हैं।)