पहेली
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अनुभव सिन्हा जैसे बिरले निर्देशक ही हुए हैं जो अपने करियर के इस शाहरुख शॉक से उबरने में कामयाब रहे। नहीं तो, शाहरुख को निर्देशित करने के बाद अपने करियर की पटरी भूल जाने वालों में आनंद एल राय, इम्तियाज अली, राहुल ढोलकिया जैसे तमाम निर्देशक शामिल रहे हैं। शाहरुख को इन दिनों अपने खुद के बनाए इसी मिथ से बाहर आने की जरूरत है, तभी शायद वह अपने करियर में फिर से वापसी कर सकेंगे और अपने फैंस को वाकई कुछ नया कर दिखाने में कामयाब रहेंगे।
खैर, हम लौटते हैं शाहरुख खान की 15 साल पहले बनी फिल्म पहेली की कहानी की तरफ। परदे पर ये कहानियां दो कठपुतलियां सुनाती हैं। एक की आवाज बनते हैं नसीरुद्दीन शाह और दूसरे की रत्ना पाठक शाह। रीयल लाइफ पति पत्नी परदे पर कठपुतली का जोड़ा बनकर जो कहानी सुनाते हैं उसमें लाछी नाम की लड़की की शादी के अगले दिन उसका पति परदेस चला जाता है कारोबार करने। नवविवाहिता के सारे अरमान उसी के साथ हवा हो जाते हैं। उसके मन और तन के तानेबाने में अटकी चाहतों को धीरे से आकर उसके पति का हमशक्ल सहला देता है। लाछी लाल हो उठती है। दोनों तमाम रंग अपनी अपनी जिंदगी के कोरे कागज में भरते हैं और जब तक लाछी समझ पाए कि उसके पति का हमशक्ल उसका पति नहीं बल्कि एक भूत है तब तक देर हो चुकी होती है। पति लौटता है। असल और नकल की परीक्षा शुरू होती है। और कहानी अपने आखिरी अध्याय तक कुछ न कुछ टोटका करके दर्शकों को अटकाए रखने की कोशिश करती है।