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बाइस्कोप: जब सलमान और श्रीदेवी पर भारी पड़ी मिथुन की फिल्म, पूजा भट्ट ने दिखाए थे खतरनाक जलवे

Wed, 19 Aug 2020 05:56 PM IST
प्रतीक्षा राणावत पंकज शुक्ल, मुंबई
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नाराज - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला
19 अगस्त 1994 की तारीख हिंदी सिनेमा की यात्रा में मील का पत्थर जैसी है। इस दिन रिलीज हुई सलमान खान और श्रीदेवी की फिल्म 'चांद का टुकड़ा' सुपरफ्लॉप फिल्म रही। और, इसी दिन रिलीज हुई मिथुन चक्रवर्ती, अतुल अग्निहोत्री और पूजा भट्ट की फिल्म 'नाराज' ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी लागत के हिसाब से शानदार कारोबार किया। ये उन दिनों की बात है जब अतुल अग्निहोत्री अक्सर सलमान खान की बहन अलवीरा के साथ बांद्रा में दिख जाते थे और दोनों का रिश्ता परवान चढ़ रहा था। अतुल और अलवीरा ने 1996 में शादी की और अब दोनों के अयान व अलीजेह नाम के दो बच्चे भी हैं। सलमान खान और मिथुन चक्रवर्ती के रिश्ते भी बहुत ही भावुक रिश्ते रहे हैं। मुंबई में शूटिंग करते समय मिथुन को अगर अब भी पता चल जाए कि आसपास कहीं सलमान की शूटिंग चल रही है तो वह बीच में ब्रेक लेकर उनसे मिलने जरूर चले जाते हैं। सलमान भी मिथुन को बहुत प्यार करते हैं और उनका सम्मान करते हैं। दोनों के बॉक्स ऑफिस पर हुए इस मुकाबले में से मिथुन वाली फिल्म 'नाराज' आज के बाइस्कोप की फिल्म है।
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चांद का टुकड़ा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
दो किस्से 'चांद का टुकड़ा' के
आज का बाइस्कोप हालांकि है तो फिल्म 'नाराज' पर ही लेकिन यहां एक दो दिलचस्प किस्से 'चांद का टुकड़ा' के भी आपको बता ही देते हैं। ये फिल्म निर्माता निर्देशक सावन कुमार टाक ने अपनी सुपरहिट फिल्म 'सनम बेवफा' के तुरंत बाद शुरू की थी। 'सनम बेवफा' में भी सलमान हीरो थे और सावन कुमार की हर बात मानते थे, लेकिन 'चांद का टुकड़ा' बनाने में सावन कुमार को बहुत परेशानियां हुईं। यहां तक कि उन्हें सलमान की शिकायत लेकर उनके पिता सलीम खान के पास तक जाना पड़ा था। सलमान खान के चक्कर में श्रीदेवी को घंटों सेट पर इंतजार करना होता था। ये फिल्म तो श्रीदेवी ने किसी तरह पूरी कर ली, लेकिन फिर ये भी तय किया कि वह आगे से कभी सलमान खान के साथ कोई फिल्म नहीं करेंगी। श्रीदेवी के बारे में ये बात मशहूर रही है कि वह एक बार फैसला ले लेने के बाद उसके परिणाम की परवाह नहीं करती थी। सलमान के साथ श्रीदेवी ने फिर कभी काम नहीं किया।
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मिथुन चक्रवर्ती - फोटो : Social Media
मिथुन के 'ऊटी काल' की फिल्म
तो लौटते हैं फिल्म 'नाराज' की तरफ। ये फिल्म मिथुन के करियर के उस दौर की फिल्म है जब वह बंबई की सारी मोह माया त्याग कर ऊटी चले गए थे अपने पूरे परिवार समेत। मिथुन की बंबई छोड़ने की तमाम वजहें बताई जाती हैं लेकिन उनमें से जो सबके सामने रही वो ये कि उन्होंने अपनी लोकप्रियता का पूरा फायदा उठाते हुए दनादन फिल्में साइन करनी शुरू कर दी थीं। ये बात भी कम लोगों को ही पता है या फिर हो सकता है कि इसकी तरफ ध्यान ही कम लोगों ने दिया हो और वो ये कि मिथुन चक्रवर्ती के नाम हिंदी सिनेमा में बतौर हीरो सबसे ज्यादा फिल्मों में नजर आने का रिकॉर्ड रहा है और रिकॉर्ड ये भी है कि मिथुन की एक ही साल में 19 फिल्में रिलीज हो चुकी हैं, ये साल था 1989 का। ऊटी जाने के बाद मिथुन एक दिन में ही चार चार फिल्मों तक की शूटिंग कर दिया करते थे। उनका अपना होटल है वहां। फिल्मों की पूरी यूनिट वहीं रुकती और सस्ती दरों पर सारी सुविधाएं मिथुन की कंपनी उन्हें मुहैया कराती। 1994 में मिथुन की आठ फिल्में रिलीज हुईं, इनमें प्रमुख रहीं, निर्देशक बापू की  'परमात्मा', निर्देशक हरमेश मल्होत्रा की 'चीता', निर्देशक उमेश मेहरा की 'यार गद्दार', निर्देशक राज सिप्पी की 'तीसरा कौन' और निर्देशक महेश भट्ट की  'नाराज'।

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नाराज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सोनी राजदान और पूजा के अंदाज
निर्देशक महेश भट्ट इन दिनों सोशल मीडिया पर फिल्म इंडस्ट्री में वंशवाद के विरोध में चल रही लहर के निशाने पर हैं। लेकिन, एक जमाना ऐसा भी रहा है जब सोशल मीडिया पर उनकी तारीफों के हैशटैग ट्रेंड होते रहे हैं। साल 1999 में निर्देशन से संन्यास ले चुके अब 71 साल के हो चुके महेश भट्ट अपनी बेटी आलिया भट्ट के कहने पर ही 'सड़क 2' से निर्देशन में वापस लौटे हैं। वैसे फिल्म 'नाराज' में उनकी पहली पत्नी की बेटी पूजा भट्ट और उनकी दूसरी पत्नी सोनी राजदान दोनों ने काम किया है। दोनों ने फिल्म में इतने बिंदास रोल किए हैं कि फिल्म देखते समय आपको अचरज हो सकता है कि इस फिल्म के निर्देशक वाकई महेश भट्ट ही हैं। खासतौर से फिल्म के गाने 'रोजा रोजा सायंग सायंग रे...' में पूजा भट्ट और सोनी राजदान दोनों ने काफी बोल्ड सीन्स किए। यहां देखिए इस गाने की झलकियां..

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नाराज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कुमार गौरव संग बननी थी 'नाराज'
फिल्म 'नाराज' निर्देशक महेश भट्ट के करियर के भी उस दौर की फिल्म है जब वह अपनी तमाम कालजयी फिल्मों मसलन 'अर्थ', 'सारांश', 'नाम', 'आशिकी', 'दिल है कि मानता नहीं' और 'सड़क' के बाद दोनों हाथों से सिर्फ पैसा बटोर रहे थे। फिल्म चलेगी कि नहीं चलेगी, इससे उनको फर्क नहीं पड़ता था। महेश भट्ट का सिक्का बॉक्स ऑफिस पर चल चुका था और इसकी चमक कायम रहने तक वह इसे हर दुकान पर चला लेना चाहते थे। फिल्म 'नाराज' का सिलसिला शुरू होता है फिल्म 'नाम' की कामयाबी के बाद से। फिल्म के निर्माता राजेंद्र कुमार, लेखक सलीम खान और निर्देशक महेश भट्ट तीनों मिलकर 'नाराज' नाम की एक फिल्म पर काम शुरू कर चुके थे। इस फिल्म में तब राखी, कुमार गौरव, नसीरुद्दीन शाह और अमरीश पुरी को साइन किया गया था। ये फिल्म बनती तो महेश भट्ट और अमरीश पुरी के साथ काम करने का दस्तावेज भी होती, लेकिन ये फिल्म शुरू होने के कुछ दिनों बाद ही बंद कर दी गई। वजह सिर्फ राजेंद्र कुमार जानते हैं या महेश भट्ट। इसी फिल्म का शीर्षक बाद में महेश भट्ट ने मिथुन की फिल्म के लिए इस्तेमाल कर लिया।
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नाराज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सुर्खियों के तलबगार महेश भट्ट
राजेंद्र कुमार से अलग होने के बाद महेश भट्ट ने एक फिल्म 1992 में शुरू की थी 'कलयुग' के नाम से। फिल्म के सितारे थे, संजय दत्त, अजय देवगन, पूजा भट्ट, लीजा रे, मिंक आदि। मिंक का नाम तब तक लोगों के सामने खुलकर आने लगा था और इस फिल्म में रवीना टंडन ने मिंक को रिप्लेस भी कर दिया था। इसी के बाद महेश भट्ट लीजा रे की जगह मनीषा कोइराला को ले आए थे। फिल्म को लेकर उथल पुथल शुरू हुई और इसकी असली वजह अजय देवगन को पता चली तो उन्होंने खुद ही अपना नाम फिल्म से अलग कर लिया। उन्हीं की जगह फिल्म में अतुल अग्निहोत्री आए थे। मुंबई बम धमाकों में तब तक संजय दत्त का नाम आ चुका था और उनके पुलिस के शिकंजे में आने के बाद इस फिल्म में आ गए मिथुन चक्रवर्ती। बाद में इसी फिल्म का नाम बदलकर महेश भट्ट ने 'नाराज' कर दिया। फिल्म 'नाराज' के रिलीज होते वक्त महेश भट्ट और पूजा भट्ट का नाम खूब सुर्खियों में था, अगर आपको याद होगा तो यही वह साल है जब फरवरी महीने के फिल्म मैगजीन स्टारडस्ट के अंक के कवर पर महेश भट्ट और उनकी बेटी का एक दूसरे को किस करते हुए फोटो छपा था। महेश भट्ट का उन दिनों का चर्चित बयान था, 'अगर पूरा मेरी बेटी न होती तो मैं उससे शादी कर लेता।'
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नाराज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कहानी दोस्ती और प्यार की
फिल्म 'नाराज' की कहानी है एक रईस अजय पंडित और एक गरीब देवा के रिश्तों की कहानी। दोनों का आपसी प्यार और एक दूसरे के लिए कुछ भी कर गुजरने का जज्बा ही फिल्म की अंतरधारा है। देवा बने मिथुन चक्रवर्ती के साथ थीं फिल्म में पूजा भट्ट और अजय पंडित बने अतुल अग्निहोत्री की हीरोइन थी सोनाली बेंद्रे। महेश भट्ट के साथ मिथुन इससे पहले फिल्म 'तड़ीपार' कर चुके थे और उन दिनों एक अलग ही दुनिया में रहने लगे थे। उनके तमाम करीबी लोग मिथुन के इस दौर के बारे में कम ही जानते हैं। उन दिनों मिथुन जिस धारा में बह रहे थे, उसने निजी जिंदगी में उनको कष्ट भी काफी पहुंचाया। महेश भट्ट के कहने पर मिथुन ने उनकी फिल्म 'नाराज' कर तो ली, लेकिन फिर इसके बाद वह महेश भट्ट की किसी दूसरी फिल्म में नजर नहीं आए। हां, मिथुन, अतुल और पूजा भट्ट की तिकड़ी इसके अगले ही साल विक्रम भट्ट की फिल्म 'गुनहगार' में जरूर नजर आई।

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नाराज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कतील शिफाई का सदाबहार गाना
फिल्म 'नाराज' के लिए अनु मलिक ने काफी शानदार संगीत तैयार किया था। फिल्म में राहत इंदौरी ने मिथुन और अतुल पर फिल्माया गया गाना लिखा था, 'तेरे बिन मैं कुछ भी नहीं...।' राहत के अलावा फिल्म के लिए अनु मलिक और महेश भट्ट ने देव कोहली, फाएज अनवर, माया गोविंद, जमीर काजमी और हसरत जयपुरी से भी गाने लिखवाए। लेकिन जो गाना इस फिल्म का सुपर डुपर हिट हुआ और उस जमाने के सबसे ज्यादा लोकप्रिय गानों में शुमार हुआ वह था कतील शिफाई का लिखा गाना, 'संभाला है मैंने बहुत अपने दिल को...'

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महेश भट्ट - फोटो : Social Media
फिल्म 'नाराज' में एक गाना सिल्क स्मिता का भी होना था। लेकिन, जब ये गाना शूट हुआ तो बताते हैं कि महेश भट्ट बीमार पड़ गए। उनकी टीम ने जो गाना शूट किया वह इतना भद्दा था कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म से उसे हटाने के लिए कह दिया था। फिल्म में एक गाना और शामिल हुआ था 'अगर आसमां तक मेरे हाथ जाते..' लेकिन इन्हीं बोलों पर एक गाना फिल्म 'मेहरबान' में भी बन चुका था, लिहाजा 'नाराज' के मेकर्स ने ये गाना अपनी फिल्म से ड्रॉप कर दिया। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।

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