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Bioscope S2: सही साबित हुई 21 साल पहले ‘अमर उजाला’ की भविष्यवाणी, और वाकई आ पहुंचा एक नया स्टार

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कहो ना प्यार है - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
21 साल हो गए फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ को रिलीज हुए। लेकिन, यूं लगता है कि जैसे कल ही की बात है। ये उन दिनों की बात है जब मैं ‘अमर उजाला’ की फिल्म पत्रिका ‘रंगायन’ का प्रभारी था और अखबार में छपने वाली मेरी फिल्म समीक्षाओं का दिल्ली-यूपी के फिल्म वितरण बाजार भगीरथ पैलेस में बेसब्री से इंतजार रहता। फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ का मुंबई में शो हो चुका था। फिल्मसिटी में ये फिल्म देखने वालों से शाहरुख खान की फिल्म ‘फिर भी दिल है हिंदुस्तानी’ की उसी शाम हुई पार्टी में लोग बस एक ही सवाल पूछ रहे थे, ‘राकेश रोशन के लड़के की रिपोर्ट कैसी है?’ सब बहुत प्रेशर में थे। लेकिन, मुंबई से सैकड़ों किलोमीटर दूर नोएडा में ऐसा कोई प्रेशर नहीं था। लेकिन, प्रेशर क्या होता है, ये पता चलना अभी बाकी था।
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कहो ना प्यार है - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
मैंने फिल्म ‘कहो ना प्यार है’  की समीक्षा लिख दी। पेज पर लग भी गई। लेकिन, पेज की प्रूफरीडिंग, डिजाइन चेक, फिर प्लेट बनने और प्रिंटिंग में जाने से पहले इस समीक्षा को दफ्तर में ही दर्जनों लोगों ने पढ़ डाला। सबको उत्सुकता थी कि आखिर ये नया लड़का है कितना दमदार। देर तक दफ्तर में काम करते रहने का कीड़ा शुरू से है तो मैं दफ्तर में ही था। आलम ये कि पेज छपने जाने तक तमाम लोगों ने मुझे टोका कि चाहो तो हेडिंग बदल लो। मैंने कहा, नहीं ठीक है। तो एक काफी सीनियर सहयोगी ने दफ्तर के बाहर चाय की दुकान तक टहलाया और समझाते रहे कि ऐसी भविष्यवाणी तुम्हारे करियर के लिए घातक हो सकती है। कहीं फिल्म फ्लॉप हो गई तो? एकबारगी तो मुझे भी लगने लगा कि मैं बहुत बड़ी बात लिख रहा हूं और फिल्म न चली तो। लेकिन, मुझे ऋतिक के टैलेंट पर भरोसा था, फिल्म का म्यूजिक शानदार था और बड़े भाई व छोटे भाई वाला एंगल बहुत इमोशनल था। इतने में फिल्म निकल ही जानी थी। तो, मैंने उनको यही जवाब दिया कि हेडिंग यही रहने देते हैं, फिल्म नहीं चली तो कहीं और नौकरी देखेंगे।  
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फिल्म समीक्षा की कटिंग - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
और, 14 जनवरी 2000 को रिलीज हुई फिल्म की समीक्षा रविवार 16 जनवरी के ‘अमर उजाला’ के सभी संस्करणों में छप गई और वाकई ‘आ पहुंचा एक नया स्टार’। भगीरथ पैलेस से इतने फोन मुझे पहले किसी फिल्म समीक्षा के नहीं, आए जितने सोमवार को दिन भर आए। ‘कहो ना प्यार है’ की कहानी कोई बहुत अनोखी नहीं थी फिल्म की लेकिन फिल्म का हीरो अनोखा था। एक जैसी शक्लों वाले दो लड़के एक ही लड़की के जीवन में अलग अलग मौकों पर आते हैं। वो कहते हैं ना कि इंसान को जीवन में प्यार कई बार होता है, लेकिन एक समय में वह एक से होता है। कहानी की नायिका सोनिया की कहानी भी यही थी। राज और रोहित दोनों से उसे प्यार होता है, लेकिन अलग अलग वजहों से, अलग अलग मौकों पर। फिल्म इतनी लोकप्रिय है कि अगर आप ये बाइस्कोप पढ़ रहे हैं तो फिल्म तो आपने ये अब तक देख ही रखी होगी। तो कहानी के विस्तार में न जाते हुए इसके रोचक किस्सों पर ही टिके रहते हैं।
 

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कहो ना प्यार है - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई का अपनी रिलीज के साल में तो रिकॉर्ड बनाया ही, इसने एक रिकॉर्ड सबसे ज्यादा पुरस्कार बटोरने का भी बनाया। अकेले फिल्मफेयर पुरस्कारों में इस फिल्म ने नौ पुरस्कार समेट लिए थे। ऋतिक रोशन अब तक के इकलौते ऐसे अभिनेता हैं, जिन्होंने फिल्मफेयर का बेस्ट एक्टर और बेस्ट डेब्यू मेल दोनों पुरस्कार एक ही साल मिले। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में इसकी एंट्री हुई एक ऐसी फिल्म के लिए जिसने साल 2002 तक कुल मिलाकर 92 पुरस्कार जीत लिए थे। बाद में हालांकि ये गिनती और भी बढ़ती रही। हिंदी सिनेमा की ये अब तक की सर्वाधिक पुरस्कार जीतने वाली फिल्म है। राकेश रोशन हिंदी फिल्मों में 1970 से काम करते रहे, लेकिन उनको अपने करियर का पहला फिल्मफेयर अवार्ड मिला तो फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ के लिए।
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कहो ना प्यार है - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
फिल्म को बनने में करीब दो साल का वक्त लगा। ये उन दिनों की बात है जब मशहूर हीरोइन बबीता अपनी दूसरी बिटिया करीना को लेकर फिल्म निर्माता निर्देशकों के यहां चक्कर लगाया करती थीं। सबसे उनकी जान पहचान थी। सब खूब खातिरदारी करते हुए मिलते भी थे। लेकिन, हिंदी सिनेमा में पहला मौका ही सबसे मुश्किल काम होता है। राकेश रोशन ने अपना करियर मोहन कुमार के सहायक निर्देशक के तौर पर शुरू किया था। राजेंद्र कुमार की फिल्म ‘अनजाना’ में बबीता हीरोइन थीं और राकेश रोशन उस फिल्म के सेट पर एक सहायक निर्देशक। बबीता का रुआब बताते हैं तब जैसा था वैसा ही अब भी बना रहा। राकेश रोशन फिल्म की शूटिंग की शुरुआत एक गाने से करना चाहते थे और बबीता अड़ी थी कि नहीं पहला सीन संवाद वाला होना चाहिए। बस मामला यहीं से बिगड़ना शुरू हुआ, ये बात फिल्म के पहले शेड्यूल के पहले दिन की शूटिंग शुरू होने से चार दिन पहले की है।
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कहो ना प्यार है - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ की शूटिंग शुरू होने से चार दिन पहले बबीता के साथ राकेश रोशन की जो बात हुई, उसके बाद राकेश रोशन ने करीना कपूर को फिल्म से निकाल दिया। बबीता ने हालांकि सबको यही बताया कि फिल्म करीना ने इसलिए छोड़ी क्योंकि उन्हें अमिताभ बच्चन के बेटे अभिषेक के साथ बन रही फिल्म ‘रेफ्यूजी’ बेहतर लगी। ख़ैर, करीना को फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ से निकाल तो दिया गया लेकिन आगे क्या? फिल्म का सेट लग चुका था। बजट की एक मोटी रकम उस पर खर्च हो चुकी थी। प्रोडक्शन वालों ने पूछा भी कि क्या सेट गिरा दें? संयोग से उसी शाम राकेश रोशन को एक शादी समारोह में पुराने मित्र अमित पटेल मिल गए। उनके साथ उनकी बेटी अमीषा भी थीं वो राकेश रोशन को अच्छी लगी। उन्होंने पूछा कि क्या वह फिल्मों में काम करना चाहेंगी? बस, हिंदी सिनेमा को एक और हीरोइन ऐसे मिल गई।
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कहो ना प्यार है - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ में राकेश रोशन ने सहयोगी भूमिकाओं के लिए हिंदी सिनेमा के चुनिंदा कलाकार लिए थे। ‘सरजी’ के रोल में अनुपम खेर ने अपने करियर के चंद बेहतरीन किरदारों में से एक किरदार किया है, उनकी आभा का राकेश रोशन ने शुरू में एक सकारात्मक किरदार के लिए इस्तेमाल किया, लेकिन जब इसी किरदार का रोल रिवर्सल होता है तो लोग चौंक जाते हैं। दलीप ताहिल ने भी फिल्म को अच्छा सहारा दिया। लेकिन फिल्म की खोज कहे जा सकते हैं दो और कलाकार, एक तो व्रजेश हीरजी जिन्होंने तब तक टेलीविजन में काफी नाम कमा लिया था और दूसरी तनाज ईरानी। ताज्जुब की बात देखिए फिल्म में एक खास किरदार करने वाले मोहनीश बहल इस फिल्म की शूटिंग से पहले ऋतिक रोशन से कभी मिले तक नहीं थे।

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कहो ना प्यार है - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ की कामयाबी में इसके संगीत का भी बड़ा हाथ रहा। राजेश रोशन ने फिल्म का संगीत बनाया भी बिल्कुल जमाने के चलने के हिसाब से था। राकेश रोशन ने इस फिल्म में अपने पुराने दोस्त महमूद के बेटे लकी अली को बतौर प्लेबैक सिंगर पेश किया। लकी अली के अलबम तब तक हिट हो चुके थे और युवाओं की एक बड़ी तादाद उनकी प्रशंसक भी थी। फिल्म में लकी अली ने सिर्फ दो ही गाने गाए। एक तो विजय अकेला का लिखा बेहद सूफियाना गाना, ‘इक पल का जीना, फिर तो है जाना, तोहफा क्या लेके जाएं, दिल ये बताना...!’ और, दूसरा इब्राहिम अश्क का लिखा ‘ना तुम जानो ना हम..’। दोनों गाने उस साल के ही नहीं बल्कि आने वाले कई बरसों के सुपरहिट गानों में शुमार होते रहे। फिल्म में बाबुल सुप्रियो, उदिय नारायण और कुमार शानू ने भी ऋतिक रोशन के लिए आवाजें दी। फिल्म के तीन गाने निर्देशक सावन कुमार टाक ने भी लिखे हैं। राकेश रोशन के करीबी दोस्तों जीतेंद्र और ऋषि कपूर ने फिल्म का म्यूजिक अंधेरी के द क्लब में रिलीज किया था।
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कहो ना प्यार है - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ की शूटिंग राकेश रोशन पहले फिजी में करने वाले थे, वहां बात नहीं तो वह न्यूजीलैंड चले गए। फिल्म हिट हुई तो भारत से न्यूजीलैंड जाने वालों की बाढ़ सी आ गई। वहां के वीजा के लिए इतने ज्यादा आवेदन आए कि न्यूजीलैंड सरकार के लोग भारत और वहां दोनों जगह परेशान हो गए। फिल्म के पानी के जहाज वाले दृश्यों की शूटिंग स्टार फ्लायर नामक क्रूज पर हुई और कई दिनों तक लगातार समुद्र में रहने के चलते यूनिट के तमाम लोगों की तबीयत भी इस दौरान खराब हुई। फिल्म की कहानी राकेश रोशन ने खुद एक कन्नड़ फिल्म ‘रथ सप्तमी’ देखने के बाद सोची। पटकथा इसकी हनी ईरानी की लिखी हुई है जिन्होंने फिल्म ‘सीता और गीता’ के सेट पर जावेद से शादी की थी तो जावेद को मुंबई में रहने का ठिकाना मिला था। पटकथा लेखकों में एक नाम रवि कपूर का भी है जो अभिनेता जीतेंद्र का असली नाम है।

(‘बाइस्कोप’ कॉलम में प्रकाशित आलेख बौद्धिक संपदा अधिकारों के तहत संरक्षित हैं।)
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