देश भर में इस बार कोरोना फैला तो बहुत सारे लोग शहरों से अपना बिस्तर बोरिया समेट गांवों को लौट गए। बिना ये सोचे कि जिस गांव को वह बेहतर कमाई के लालच में बरसों पहले छोड़ आए थे, वहां लौटने पर उनका स्वागत होगा भी कि नहीं। तुलसीदास ऐसे ही हालात के लिए रामचरित मानस में लिखते हैं, ‘आवत ही हरषत नहीं, नयनन नहीं सनेह। तुलसी तहां न जाइए, चाहे कंचन बरसे मेह।’ लेकिन, परदेस से घर लौटने की कहानी का सिलसिला शुरू किया था रामानंद सागर ने अपनी फिल्म ‘चरस’ से। और, इसी सिलसिले को आगे बढ़ाया निर्देशक नासिर हुसैन ने अपनी फिल्म ‘हम किसी से कम नहीं’ में। दोनों फिल्मों में बस साल भर का फासला है। सामाजिक संदेश देने वाली फिल्मों ‘मदर इंडिया’ और ‘वक्त’ के बाद अगर किसी फिल्मकार ने एक साथ दर्जनों सितारे एक ही फिल्म में इकट्ठा करने का काम किया तो वो थे नासिर हुसैन और हिंदी की पहली मल्टीस्टारर मसाला फिल्म मानी जा सकती है ‘यादों की बारात’, फिल्म ‘हम किसी से कम नहीं’ में नासिर हुसैन ने अपनी मसाला कहानियों के पत्ते फिर से एक बार फेंटे और बनाई एक और सुपर डुपर हिट म्यूजिकल फिल्म। फिल्म ‘हम किसी से कम नहीं’ ही हमारी आज के बाइस्कोप की फिल्म है।