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Flight Movie Review: हवाई सेवाओं के घोटालों का पर्दाफाश करती फिल्म, नए चेहरों और मोहरों पर बड़ा दांव

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फ्लाइट मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
Movie Review: फ्लाइट
कलाकार: मोहित चड्ढा, पवन मल्होत्रा, जाकिर हुसैन, विवेक वासवानी, शिबानी बेदी आदि।
निर्देशक: सूरज जोशी
रेटिंग: *1/2
फिल्ममेकिंग फन है। लेकिन, तभी तक जब तक आपका फ़न फनी न लगने लगे। हीरो बनने के लिए फिल्म बनाना और दर्शकों के मनोरंजन के लिए फिल्म बनाना दोनों अलग अलग बातें हैं। फिल्म ‘फ्लाइट’ एक बेहतरीन विचार पर बनी फिल्म है। बस फिल्म बनाते समय इसके निर्माता अपने विचार जैसी बढ़िया टीम तलाशने में चूक गए। विमानन उद्योग को केंद्रबिंदु बनाकर फिल्में कम ही बनती हैं क्योंकि इसकी शूटिंग के लिए तैयारी बहुत करनी होती है। मोहित चड्ढा ने बॉडी बनाकर हीरो बनने के लिए मनोरंजन जगत के आसमान में छलांग लगाई है। लेकिन, बिना तैयारी ऐसा कोई करतब करना हंसी खेल नहीं।
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फ्लाइट मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म ‘फ्लाइट’ कहानी है एक धनकुबेर रणवीर मल्होत्रा की। उसकी कंपनी की साख और उसका जीवन दांव पर है। वजह? नागर विमानन उद्योग में भीतर ही भीतर पनप रहा एक ऐसा घोटाला जिसमें इंसान के जान की कीमत कुछ भी नहीं। यहां सब कुछ पैसा है। पैसे के आगे लोग कुछ नहीं देखते। फिल्म देखते समय आपको ऐसी तमाम हवाई दुर्घटनाएं याद आएंगी, जिनमें कभी जहाज का महीनों पता नहीं चला या जिनकी दुर्घटनाओं के कारण कभी सामने नहीं आए। इसकी वजह की तह तक जाने की कोशिश है फिल्म ‘फ्लाइट’।

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फ्लाइट मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
नवोदित अभिनेता मोहित चड्ढा को हीरो बनाने के लिए बनी फिल्म ‘फ्लाइट’ की कहानी का मूल विचार जितना कमाल है, फिल्म की पटकथा और इसके संवाद उतने ही दोयम दर्जे के हैं। निर्देशक सूरज जोशी उस खेप के निर्देशक हैं जिन्हें किसी भी तरह फिल्म निर्देशक बनने के लिए निर्माता के सारे समझौते मंजूर हैं। फिल्म का अपना कोई ग्राफ या आर्क भी नहीं है। एक हाई बजट फिल्म दिखाने के लिए सूरज ने फिल्म की कॉस्ट्यूम और कला निर्देशन में पैसा पानी की तरह बहाया है लेकिन, इसका असर हो नहीं पाया है। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक इसकी एक और कमजोर कड़ी है।

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फ्लाइट मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘फ्लाइट’ की मेकिंग का जो मुख्य मकसद है उसमें भी फिल्म विफल रही है। मोहित चड्ढा का डील डौल अच्छा है लेकिन हीरो बनने के लिए शायद उनका समय निकल चुका है। उन्होंने तमाम हिंदी फिल्में देखकर अपना रंग रूप, चाल ढाल यहां तक कि बोलने का स्टाइल भी नए तरह से सीखा है। वह हाव भाव में शाहरुख खान की कॉपी करते हैं, बोलते हैं तो कभी अमिताभ बच्चन तो कभी रजनीकांत की सस्ती कॉपी करते हैं। एक्शन दृश्यों में वह अजय देवगन भी बनने की कोशिश करते नजर आते हैं। लेकिन, फिल्म के किसी भी सीन में वह रणवीर मल्होत्रा नहीं दिखते जो कि फिल्म का मुख्य किरदार है।
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फ्लाइट मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म को सहारे के लिए दमदार कलाकारों की जरूरत थी और इसकी भरपाई निर्देशक ने जाकिर हुसैन और पवन मल्होत्रा के जरिए की भी है। पवन मल्होत्रा अच्छे अभिनेता हैं। लेकिन, कैमरे के सामने इन दिनों वह ओवर एक्टिंग करने लगे हैं। लोगों ने उन्हें उनके सहज रूप में खूब पसंद किया है। शिबानी बेदी को किसी सही निर्देशक का साथ मिला तो वह लीक से इतर भूमिकाओं में रंग जमा सकती हैं। लेकिन, इस फिल्म से कोई खास फायदा मिलता उन्हें दिखता नहीं है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और एडीटिंग औसत है पर उससे एक खराब फिल्म को कोई मदद मिलती नहीं दिखती। 
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