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Mahendra Kapoor: मनोज कुमार वीरों की कहानी सुनाते फिर डैडी देशभक्ति गीत गाते थे, रफी साहब को गुरु मानते थे

Thu, 09 Jan 2025 09:15 PM IST
दीक्षा पाठक अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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महेंद्र कपूर - फोटो : अमर उजाला
पद्मश्री से सम्मानित गायक महेंद्र कपूर ने अपनी हिट फिल्मों के गीतों की सफलता का कभी भी जश्न नहीं मनाया। फिल्म के गानों की सफलता के बाद वह अपनी खुशी मंदिर जाकर अपने इष्टदेव के साथ साझा करते और वहीं बैठकर देर तक मंत्रों का जाप किया करते। महेंद्र कपूर के जीवन में उनके सीनियर गायक मोहम्मद रफी का काफी प्रभाव रहा है। दोनों ने खुद ही आपस में ये तय किया  था कि वे कभी साथ में नहीं गाएंगे। लेकिन, निर्माता, निर्देशक, अभिनेता मनोज कुमार की एक जिद ने इन दोनों महान गायकों का एक गाने में संगम करा ही दिया। महेंद्र कपूर के जन्मदिन पर ‘अमर उजाला’ के पाठकों को उनकी 10 अनसुनी कहानियां सुना रहे हैं, उनके बेटे रोहन कपूर
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गोपी गीत की रिकॉर्डिंग के दौरान लता मंगेशकर, दिलीप कुमार, कल्याणजी आनंदजी के साथ महेंद्र कपूर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

10.
स्कूल में पता चला, मेरे डैडी सेलिब्रिटी हैं
ये उन दिनों की बात है जब मैं छठी कक्षा में पढ़ रहा था। मेरा वास्तविक नाम संजीव है। एक दिन प्रिंसिपल ने कहा, 'संजीव, क्या तुम्हारे पिता हमारे स्कूल के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनेंगे?’ क्रिकेटर फारुख इंजीनियर भी कार्यक्रम में आने वाले थे। मैंने सोचा कि ये लोग मेरे डैडी का सम्मान क्यों करना चाहते हैं? जब डैडी कार्यक्रम में आए तो स्कूल के सैकड़ों छात्र उनसे मिलने के लिए उनके पीछे भागे। सारे शिक्षक, प्रधानाचार्य सब डैडी का सम्मान कर रहे थे। मैं अचंभित था कि ये क्या हो रहा है? शिक्षक अक्सर डैडी के गाए गानों का जिक्र किया करते थे कि मैंने फलां फिल्म में फलां गाना देखा जिसे तुम्हारे डैडी ने गाया है। तब मुझे धीरे धीरे एहसास हुआ कि डैडी वाकई बड़ी हस्ती हैं।

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महेंद्र कपूर के सिंगिंग कॉन्सर्ट - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
09.
भारत का रहने वाला हूं..
मम्मी जब सुबह छह बजे जगाती थी तो उस समय तक डैडी का रियाज शुरू हो चुका होता था। तलत महमूद हमारे घर पर ही रहते थे। जब स्कूल से लौटता तब तक उस्ताद नियाज अहमद खान के साथ संगीत की महफिलें जम चुकी होती थीं। 24 घंटे हमारे घर में सरमग ही सुनाई देती थी। टीवी तब था नहीं तो खाना खाते वक्त हम रेडियो सुनते थे। ठीक से याद नहीं कि डैडी का पहला गाना कौन सा रेडियो पर सुना। 1965 की मेरी पैदाइश है। होश संभालने पर फिल्म ‘उपकार’ का गाना 'मेरे देश की धरती' मैंने सुना। इसके लिए डैडी को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। और, संभाला तो 'पूरब और पश्चिम' का गाना ‘भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं’ तो जमाने का गीत बन चुका था। 

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महेंद्र कपूर अपने परिवार के साथ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

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हमारी जिम्मेदारी ईश्वर की
डैडी  का मानना था कि इंसान को अपना कर्म करते रहना चाहिए, आगे मालिक के हाथ में है। वह बस अभ्यास पर जोर देते थे। मेरी मां ने मुझे बताया था कि मेरे पिताजी हनुमानजी और शिवजी के बहुत बड़े भक्त थे। जब फिल्म 'हमराज' हिट हुई तो इसके गाने (‘किसी पत्थर की मूरत से’, ‘ना मुंह छुपा के जियो’ और ‘नीले गगन के तले’) दिन भर रेडियो पर बजते रहते थे। इसका धन्यवाद देने वह सुबह चार बजे वर्ली के मार्कंडेश्वर मंदिर पहुंचे और शाम चार बजे तक मंदिर के एक कोने में बैठकर निर्जल जाप करते रहे। भगवान से कभी उन्होंने कुछ मांगा नहीं। उनका कहना था कि मांगना क्या? वह तो स्वयं हमारे पिता हैं। उनको पता है कि हमें क्या चाहिए। 

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महेंद्र कपूर, बी आर चोपड़ा, स्मिता पाटिल और राज बब्बर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

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लाइव रिकॉर्डिंग ही पुराने हिट गीतों की जान

'हमराज' के सारे गाने हिट हुए तो इसके पीछे साहिर लुधियानवी के लिखे गीत और रवि जी के संगीत का बहुत बड़ा हाथ है। सारे गानों की रिकॉर्डिंग लाइव होती थी। अगर एक भी साजिंदे से थोड़ी सी भी गलती होती थी तो पूरा गीत फिर से रिकॉर्ड करना पड़ता था। हर इंसान दिल से जुड़ा रहता था। आज ‘कट पेस्ट’ का जमाना आ गया है। जितने भी साज हैं सब मशीनी हो गए हैं। मैं ये नही कहता कि अच्छे गायक नहीं आ रहे हैं, लेकिन उनके आने का तरीका गलत है इसलिए लोग उनको याद नहीं रखते हैं।

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महेंद्र कपूर और मनोज कुमार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

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मनोज कुमार माहौल रचते थे

जब डैडी मनोज कुमार की फिल्मों के देश भक्ति गाने गाते थे तो गाने की रिकार्डिंग से पहले मनोज कुमार डैडी को देश के वीरों की कहानियां सुनाते थे। देश के वीरों की कहानियां सुनकर पिताजी के अंदर देश भक्ति की ऐसी भावना जागृत होती कि उनके भावों में सिर्फ वीर रस ही उपजता। मनोज कुमार की यह खासियत थी कि गाने की रिकॉर्डिंग से पहले वह वैसा ही माहौल गायक के सामने रच देते थे। किसी भी गाने को रिकॉर्ड करने से पहले उस पर विस्तार से चर्चा होती। मैंने कभी नहीं देखा कि स्टूडियो में आए और गाने रिकार्ड करके निकल गए। मनोज कुमार को गीत-संगीत की बहुत जानकारी है।

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महेंद्र कपूर ,मो. रफी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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मो. रफी को गुरु मानते थे
डैडी की आवाज और मोहम्मद रफी साहब की आवाज में काफी समानता थी। डैडी रफी साहब को अपना गुरु मानते थे। रफी साहब कहा करते, ‘देख बेटा, 'हम दोनों की आवाज मिलती जुलती है। लोग यहां के बहुत बदमाश हैं, हमें लड़ाने की कोशिश करेंगे। हम भाई-भाई की तरह रहेंगे। उस्ताद शागिर्द की तरह रहेंगे। हम यहां पर झगड़ा करने और तमाशे के लिए नहीं आए हैं। हम साथ ना गए तो अच्छा रहेगा।' डैडी इस बात से पूरी तरह से सहमत थे। 

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महेंद्र कपूर, दिलीप कुमार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

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इसलिए किया गाने से इन्कार
जहां तक 'आदमी' फिल्म के गाने की बात है तो इंटरनेट पर ‘कैसी हसीन आज बहारों की रात है’ को लेकर बहुत सारी गलत जानकारी है। रफी साहब और तलत साहब ये गाना पहले गा चुके थे। गाना दिलीप कुमार और मनोज कुमार पर फिल्माया गया है। दिलीप साहब के लिए रफी साहब ने गाया था और मनोज कुमार के लिए तलत साहब ने। उन दिनों तलत साहब की तबीयत ठीक नहीं थी तो गाना उनसे उतना अच्छा बन नहीं पड़ा। इससे मनोज कुमार का किरदार थोड़ा कमजोर हो रहा था तो सबकी सहमति बनी कि इस गीत को किसी और से गवाया जाए। डैडी को नौशाद साहब ने फोन करके बुलाया। सारी कहानी सुनी तो डैडी ने नौशाद साहब से माफी मांगते हुए कहा कि वह यह गीत नहीं गा सकते। इसके बाद नौशाद साहब ने तलत साहब से कहलवाया और तलत साहब ने डैडी को फोन करके कहा, 'देख बेटा, अगर तुम नहीं गाओगे तो दूसरा कोई गाएगा। अगर तुम मेरी इज्जत करते हो तो मेरी इच्छा है कि तुम ही ये गीत गाओ।'  

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महेंद्र कपूर संगीत निर्देशक ओ पी नैय्यर और बेटे रोहन के साथ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

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'राम चंद्र कह गए सिया' पर झूमे दिलीप कुमार
दिलीप कुमार की फिल्म 'गोपी' में जब जब कल्याणजी आनंदजी ने डैडी से गीत गवाना चाहा तो दिलीप कुमार ने कहा था, ‘अगर गाने मुझे पसंद आएंगे तभी फिल्म में रखे जाएंगे।’ 'गोपी' का गाना जब 'राम चंद्र कह गए सिया' से रिकॉर्ड हुआ तो यह गीत सुनकर दिलीप कुमार खुशी से झूम गए। यह गाना उन दिनों खूब लोकप्रिय हुआ। इसके बाद तो डैडी  ने दिलीप कुमार की कई फिल्मों में गए। दिलीप कुमार डैडी की बहुत इज्जत करते थे। 

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महेंद्र कपूर संगीत निर्देशक रवि मन्ना डे जगजीत सिंह और बेटे रोहन के साथ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

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हर गाने के बाद हनुमान मंदिर
हर गीत गाने के बाद डैडी हनुमान मंदिर जरूर जाते थे। हां, स्टेज शो से पहले वह हनुमान मंदिर जाते और उसके बाद ही शो करते थे। दिल्ली में जब भी वह शो करने जाते थे तो एयरपोर्ट से सीधे पहले हनुमान मंदिर जाते और उसके बाद होटल में। कोलकाता जाते तो पहले काली मंदिर में मां का दर्शन करते और फिर होटल जाते। डैडी ने जिंदगी में कभी शराब को हाथ नहीं लगाया, वह बहुत ही सात्विक इंसान थे। मैं डैडी के साथ भजन गाया करता था। उन्होंने कभी ये विचार मुझ पर नहीं थोपा कि मुझे भी गायक ही बनना चाहिए। 

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रिकॉर्डिंग स्टूडियो में मुकेश, मन्नाडे, लता, राजकपूर और अन्य के साथ महेंद्र कपूर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

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सारथी जिनके बने श्री कृष्ण भारत पार्थ की
धारावाहिक ‘महाभारत’ के शीर्षक गीत ‘कथा है पुरुषार्थ की, ये स्वार्थ की परमार्थ की, सारथी जिनके बने श्री कृष्ण भारत पार्थ की’ की जिस दिन रिकॉर्डिंग हुई तो डैडी घर आने के बाद बहुत चुप थे। मम्मी ने पूछा तो कहने लगे, 'अभी धारावाहिक ‘महाभारत’ का एक गीत रिकॉर्ड किया है। लेकिन, इन दिनों तो लोगों को रामानंद सागर की 'रामायण' बहुत पसंद आ रही है। पता नहीं उसके मुकाबले 'महाभारत' का क्या होगा?’ फिर खुद ही कहने लगे, 'जो होगा देखा जाएगा, प्रभु की इच्छा!' जब 'महाभारत' का प्रसारण शुरू हुआ तो हमने यहां तक सुना कि भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान तक की गलियां भी सूनी हो जाती थीं। डैडी के कहीं शो होते तो लोग उनसे ये गीत सुनने की फरमाइश जरूर करते थे।

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