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Rabindranath Tagore: फिल्मों में आज भी जिंदा हैं टैगोर के विचार, स्त्री-विमर्श के मुद्दों ने छोड़ी अमिट छाप

Wed, 07 May 2025 08:24 AM IST
कामेश द्विवेदी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Rabindranath Tagore Birth Anniversary: रवींद्रनाथ टैगोर केवल एक कवि, लेखक, चित्रकार या दार्शनिक के रूप में ही नहीं जाने जाते, बल्कि उन्हें सिनेमाई दुनिया में अहम योगदान के लिए भी पहचाना जाता है। आज टैगोर साहब की जयंती पर जानेंगे उनके सिनेमाई प्रभाव के बारे में।

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रवींद्रनाथ टैगोर - फोटो : Adobe

रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता के जोड़ासांको ठाकुरबाड़ी में हुआ था। आज बुधवार के दिन टैगोर साहब की 164वीं जयंती के रूप में मनाया जा रहा है। रवींद्रनाथ टैगोर का सिनेमा से गहरा नाता था और उन्होंने साल 1932 में आई एक फिल्म का निर्देशन भी किया था। टैगोर का सिनेमा से प्रत्यक्ष संबंध सीमित रहा, लेकिन उनकी रचनाओं और विचारों ने भारतीय फिल्मों को एक अलग नजरिया और गहराई प्रदान करने का काम किया। आइए जानते हैं टैगोर के फिल्मी योगदान के बारे में।


 
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रवींद्रनाथ टैगोर - फोटो : एक्स- @philosophors

जब नोबेल पुरस्कार विजेता ने बनाई पहली फिल्म
भारत में सिनेमा की शुरुआत साल 1913 में हुई और पहली मूक फिल्म बनी 'राजा हरिश्चंद्र', जिसे दादा साहेब फाल्के द्वारा निर्देशित किया गया था। रवींद्रनाथ टैगोर एक विचारशील व्यक्ति थे, जिन्होंने कई नाटक, उपन्यासकार लिखे थे। 1932 का वो साल था जब टैगोर साहब ने खुद के निर्देशन में एक मूक फिल्म बनाई, जिसका नाम था 'नातिर पूजा'। इस फिल्म की कहानी टैगोर के ही लिखे एक नाटक पर आधारित थी। फिल्म की शूटिंग चार दिनों में ही पूरी हो गई थी, जिसमें टैगोर साहब ने अभिनय भी किया था। इस फिल्म में नितिन बोस ने सिनेमैटोग्राफर और सुबोध मित्रा ने संपादन का काम संभाला था। हालांकि, यह फिल्म व्यावसायिक रूप से असफल रही थी।

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रवींद्रनाथ टैगोर - फोटो : एक्स

सत्यजीत रे और रवींद्रनाथ टैगोर का रहा खास नाता
रवींद्रनाथ टैगोर और सत्यजीत रे का एक अलग ही संबंध दिखता है, क्योंकि सत्यजीत रे ने टैगोर की कहानियों पर आधारित कई फिल्में बनाई हैं। साल 1961 में सत्यजीत रे ने एक फिल्म बनाई, जिसका नाम था 'तीन कन्या'। इस फिल्म की कहानी टैगोर साहब की लिखी गई तीन कहानियों 'द पोस्टमास्टर', 'मोनिहारा' और 'समाप्ति' पर आधारित थी। इसके अलावा सत्यजीत रे ने टैगोर की कहानियों पर आधारित 'चारुलता', 'घर-बाइरे' जैसी फिल्में भी बनाई। वहीं, उन्होंने साल 1961 में रवीन्द्रनाथ टैगोर पर आधारित एक डाक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाई थी।

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रवींद्रनाथ टैगोर - फोटो : एक्स

रवींद्रनाथ टैगोर की कहानियों पर आधारित चर्चित फिल्में
रवींद्रनाथ टैगोर साहब ने प्रत्यक्ष रूप से तो नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से सिनेमाई दुनिया को एक दिशा देने का काम किया है। उनकी कहानियों, नाटक और उपन्यास पर आधारित कई फिल्में बनाई गई हैं। उनकी कहानियों में ज्यादातर स्त्री विमर्श के मुद्दे देखने को मिलते हैं। कई फिल्में उनकी कहानियों को केन्द्र में रखकर बनाया गया है, जिनमें 'काबुलीवाला', 'नौकाडूबी', 'लेकिन', 'चोखेर बाली', 'चार अध्याय' आदि फिल्में शामिल हैं। इसके अलावा साल 1953 के हिंदी सिनेमा में एक फिल्म बनी 'दो बीघा जमीन', जिसे बिमल रॉय द्वारा निर्देशित किया गया था। इस फिल्म की कहानी रवींद्रनाथ टैगोर की बंगाली कविता 'दुई बीघा जोमी' पर आधारित थी। यह एक चर्चित फिल्म रही थी। 

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रवींद्रनाथ टैगोर - फोटो : एक्स- @FilmHistoryPic

भारतीय सिनेमा पर टैगोर के प्रभाव
रवींद्रनाथ टैगोर एक ऐसे विचारक और दार्शनिक थे, जिनके विचारों ने आज सिनेमा जगत को व्यापार से इतर उठकर सोचने पर मजबूर किया है। टैगोर ने बताया कि सिनेमा सिर्फ कला दिखाने का जरिया नहीं है, बल्कि मानवता और संवेदना को उजागर करने का माध्यम है। साल 1941 में टैगोर साहब ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था, लेकिन उनके विचार आज भी सिनेमाई दुनिया के लिए प्रेरणा हैं।

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