राघव जुयाल {किल}
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए एक साक्षात्कार में निखिल ने बताया कि किस तरह उनके निजी अनुभव ने उन्हें किल की कहानी लिखने के लिए प्रेरित किया, उन्होंने कहा, “1994-95 में, एक छात्र के रूप में, मैं पटना से पुणे जाने वाली बॉम्बे जनता एक्सप्रेस की स्लीपर क्लास में यात्रा करता था। एक रात, मैं चौंककर जाग गया क्योंकि ट्रेन एक छोटे स्टेशन पर रुकी थी। मैंने देखा कि हम इलाहाबाद में नहीं थे, जहां हमें रुकना था। तभी खबर फैली कि एसी कोच में लूट हो रही है। मेरी गाड़ी में, दानापुर से आए सैनिकों का एक समूह हंस रहा था, उन्हें विश्वास था कि वे हमारे स्लीपर कोच में किसी भी तरह की लूट को रोक देंगे। वह घटना सालों तक मेरे साथ रही।”