कैमरे के सामने आने का मौका भर मिल पाना मुंबई आने वाले संघर्षशील कलाकारों के लिए एक बड़ी उपलब्धि रहती है। हर साल देश दुनिया के तमाम स्कूलों, विद्यालयों और महंगे इंस्टीट्यूशनों से एक्टिंग सीखकर हजारों युवा हिंदी सिनेमा में किस्मत आजमाने मुंबई आते हैं। कंपटीशन आईआईटी और सीपीएमटी से भी तगड़ा होता है लेकिन सपनों की दुनिया ऐसी ही है कि एक बार जो यहां आ गया तो जल्दी जल्दी घर लौटता नहीं है। और, जब जिद ऐसी हो तो फिर सफलता भी झक मारकर पास आती ही है। ऐसी ही कहानी है पीलीभीत से निकले रंगमंच के बेहतरीन कलाकार नलनीश नील की। मुंबई में अपनी पहचान बना रहे नए कलाकारों की सफलता की कहानियां उनके गांव, गली, चौबारे तक पहुंचाने की बैठकी ‘अपना अड्डा’ में आए नलनीश नील के पास किस्से बहुत हैं, ‘अमर उजाला’ के पाठकों के लिए उन्हीं में से चंद यहां पेश हैं..