'आईसी 814: कंधार हाईजैक
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योजना यह थी कि ईंधन लेने से मना करके चीजों को टाला जाए और एनएसजी के आने का इंतजार किया जाए। सरबजीत को तब झटका लगा, जब कैप्टन देवी शरण ने 45 मिनट बाद उड़ान भरी, जबकि विमान में 10 मिनट से भी कम ईंधन बचा था। यह विमान लाहौर गया, ईंधन भरा गया और दुबई और फिर कंधार के लिए रवाना हुआ। शरण की बहादुरी की प्रशंसा करते हुए सरबजीत ने कहा, 'मैं देवी शरण को साहस और धैर्य के लिए पूरे नंबर दूंगा। उन्होंने डरने का नाटक किया, लेकिन मैं देख सकता था कि वह व्यक्ति जो करने की कोशिश कर रहे थे, उस पर उनका पूरा नियंत्रण था, मैं कभी नहीं सोच सकता था कि नौ मिनट के ईंधन के साथ एक आदमी उड़ान भर सकता है। मैं नो-फ्यूल-नो-टेकऑफ की अवधारणा पर काम कर रहा था, कोई भी समझदार पायलट इस तरह से उड़ान नहीं भर सकता।'