फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Zohra Sehgal Death Anniversary: सिनेमा से भी बड़ी थीं जोहरा सहगल, पहली महिला पायलट बनने का देखा था सपना

Sun, 10 Jul 2022 07:00 AM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 6
जोहरा सहगल - फोटो : सोशल मीडिया
इस दुनिया में आया हर शख्स एक भरी-पूरी और इज्जतदार जिंदगी जीना चाहता है। हालांकि, सबको यह नसीब नहीं होता, लेकिन जिन्हें ऐसा जीवन मिलता है, जमाना उन्हें याद करता है। ऐसे ही लोगों में शुमार हैं जोहरा सहगल। कला और फिल्मों में रुचि रखने वाले लोग इस नाम से बखूबी परिचित होंगे। पर्दे पर वह जिस जोशीले अंदाज में अपने किरदार को निभातीं उसके सामने उनकी उम्र भी शरमाती हुई नजर आती। वह जब तक जिंदा रहीं, जिंदादिली से जिंदगी को जीया और मिसाल पेश की। करीब 102 वर्ष का जीवन जीने के बाद आज ही के दिन दिल का दौरा पड़ने से वह इस दुनिया से चली गईं। मगर उनके किस्से आज भी लोग बड़े चाव से सुनते हैं। जोहरा सहगल जब तक जीवित रहीं उनकी उम्र भारतीय सिनेमा से एक साल ज्यादा रही। आइए जानते हैं उनके बारे में...
विज्ञापन

2 of 6
जोहरा सहगल - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
नवाबी खानदान से ताल्लुक
जोहरा सहगल 27 अप्रैल 1912 को रामपुर रियासत के नवाबी खानदान में पैदा हुईं। उनका पूरा नाम साहिबजादी जोहरा मुमताजुल्ला खान बेगम था। जोहरा सहगल की जिंदगी बचपन में संघर्षों भरी रही। छोटी उम्र में ही उनकी मां का निधन हो गया। उनकी मां चाहती थीं कि जोहरा लाहौर जाकर पढ़ें तो अपनी बहन के साथ वह चली गईं क्वीन मैरी कॉलेज में दाखिला लेने। इस स्कूल की प्रिंसिपल एक अंग्रेज महिला थीं। जोहरा इस स्कूल की लगातार टॉपर रहीं। यह स्कूल दसवीं तक था। इसके बाद जोहरा के विवाह की बात चल पड़ी। उनके पिता ने जोहरा की शादी करने का पक्का इरादा कर लिया था। मगर उनकी अंग्रेज प्रिंसिपल को यह बात पसंद नहीं आई। इसलिए उन्होंने लगातार तीन बार फेल किया गया, ताकि वह दसवीं में रहें। जोहरा ने स्कूल के आखिरी दिनों में नाटकों में खूब हिस्सा लिया। यहीं से जोहरा को लगा कि पढ़ाई के अलावा उनमें एक्टिंग और डांस की कला भी है।
विज्ञापन

3 of 6
जोहरा सहगल - फोटो : सोशल मीडिया
पहली महिला पायलट बनना चाहती थीं
पढ़ाई में अव्वल रहने वाली जोहरा देश की पहली महिला पायलट बनना चाहती थीं। लेकिन, शादी का सपना संजो रहे उनके पिता को यह बात बिल्कुल रास नहीं आई। उन्होंने जोहरा को इसकी इजाजत नहीं दी। फिर जोहरा के मामा ने उनके पिता से बात की। जोहरा की प्रतिभा की दुहाई देते हुए उन्होंने कहा कि आखिर जोहरा को कुछ तो बनने का मौका दिया जाए। इतना समझाने का फायदा यह हुआ कि उनके पिता राजी हो गए और जोहरा मामा के साथ इंग्लैंड चली गईं। इंग्लैंड में उन दिनों डांस का अच्छा माहौल नहीं था। इसलिए जोहरा ने जर्मनी का रुख किया और बर्लिन के एक डांस स्कूल में दाखिला ले लिया।

4 of 6
जोहरा सहगल - फोटो : सोशल मीडिया
जर्मनी में ली डांस ट्रेनिंग 
जोहरा को जर्मनी को जिंदगी काफी पसंद आई। वह हर साल स्कूल ट्रिप से दुनियाभर की सैर पर जातीं। इस दौरान उन्हें दुनिया घूमने का खूब मौका मिला। जर्मनी में जोहरा अपने डांस गुरू उदय शंकर से मिलीं और उनके डांस ग्रुप में शामिल हो गईं। उन्हीं के साथ वो अल्मोड़ा आ गईं, जहां उनकी मुलाकात कामेश्वर सहगल से हुई। बाद में कामेश्वर सहगल से शादी करके जोहरा मुमताज से वह जोहरा सहगल बन गईं। बता दें कि कामेश्वर इंदौर के रहने वाले वैज्ञानिक थे। उन्हें पेटिंग और भारतीय नृत्य का भी शौक था। दोनों की शादी का परिवार ने काफी विरोध किया था, मगर बाद में सब राजी हो गए। जोहरा के पति उनसे उम्र में आठ साल छोटे थे। 
विज्ञापन

5 of 6
जोहरा सहगल - फोटो : social media
1945 में पृथ्वी थिएटर से जुड़ीं
हिंदुस्तान के बंटवारे की आग जोहरा-कामेश्वर के घर तक भी आई। दोनों लाहौर पहुंचे और लेकिन लाहौर में उनका जिंदा बचना मुश्किल लगने लगा तो साल भर की बच्ची किरण को लेकर दोनों बंबई भाग आए। 1945 में जोहरा सहगल ने पृथ्वी थिएटर ज्वॉइन कर लिया। जोहरा सहगल ने 'बाजी', 'सीआईडी', 'आवारा' और 'नौ दो ग्यारह' जैसी सुपरहिट फिल्मों के लिए कोरियोग्राफी की। फिल्मी दुनिया से इतर जोहरा सहगल अच्छे खाने की शौकीन थीं। जोहरा सहगल को भले ही फिल्म और टीवी ने बेशुमार शोहरत दी पर उन्हें बतौर अभिनेत्री थिएटर में संतुष्टि मिलती थी। थिएटर से उन्हें प्यार था हालांकि फिल्में कमाई का अच्छा जरिया थी। आखिरी बार जोहरा सहगल साल 2007 में संजय लीला भंसाली की फिल्म 'सांवरिया' में नजर आई थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
जोहरा सहगल - फोटो : Social Media
कपूर खानदान की चार पीढ़ियों के साथ काम किया
जोहरा सहगल हिंदी सिनेमा की एक ऐसी अभिनेत्री थीं, जो अपनी जिंदादिली से कभी बूढ़ी नहीं हुईं। आजादी से पहले जोहरा का नाम उन कुछ चुनिंदा महिलाओं में शुमार रहा, जिन्होंने विश्व पटल पर भारत का नाम रोशन किया। उनके नाम एक अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने कपूर खानदान की चार पीढ़ियों के साथ अभिनय किया। उन्होंने पृथ्वीराज कपूर के साथ काम करना शुरू किया और उनके परिवार की चौथी पीढ़ी रणबीर कपूर तक काम करती रहीं। अपने 102 साल के जीवन में जोहरा को वर्ष 1998 में पद्मश्री, 2010 में पद्मविभूषण सम्मान मिला। इसके अलावा उन्हें कालिदास सम्मान और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। 10 जुलाई 2014 को दिल का दौरा पड़ने से जोहरा का निधन हो गया। मगर सिने प्रेमियों के दिलों में वह आज भी जिंदा हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें