जख्मी
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'जख्मी' साल 1975 में रिलीज हुई और हिंदी सिनेमा में साल 75 के जो मायने हैं वे तो आप जानते ही हैं। इस साल 'शोले' रिलीज हुई थी। इसके अलावा इस साल 'जय संतोषी मां', 'संन्यासी', 'दीवार' और 'प्रतिज्ञा' जैसी फिल्मों ने खूब धूम मचाई। 'रफू चक्कर', 'वारंट', 'चोरी मेरा काम', 'धर्मात्मा', 'खेल खेल में', 'जख्मी' और 'जूली' इस साल की दूसरी कामयाब फिल्में रहीं। हिंदी सिनेमा की इन मसाला फिल्मों को मसाला फिल्में इसलिए कहते हैं क्योंकि इसमें एक तय फॉर्मूला होता है दर्शकों को रिझाने का। इस फॉर्मूले को और पुख्ता किया था सलीम जावेद की जोड़ी ने जिन्होंने पुरानी फिल्मों के किस्से कहानियों को उठाकर उन्हें नए रंग रोगन के साथ परदे पर पेश करने की शुरूआत की थी फिल्म 'हाथी मेरे साथी' में। सलीम जावेद के दौर में 'जख्मी' जैसी फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर अपनी लागत से दूनी कमाई कर ले जाना भी बड़ी कामयाबी मानी गई।