फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जानिए क्या है IVF, जिसके कारण अंबानी फैमिली में 7 साल बाद गूंजी ईशा-आकाश की किलकारियां

Sat, 02 Feb 2019 09:42 AM IST
Mishra Mishra एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 5
mukesh ambani son
शादी के बाद पहली बार ईशा ने वोग मैगजीन के लिए फोटोशूट करवाया। फोटोशूट के अलावा ईशा ने शादी के बाद वोग फैशन मैगजीन को अपना पहला इंटरव्यू भी दिया। इस इंटरव्यू में ईशा ने अपने काम और शादी के बाद जिंदगी में आए बदलाव के बारे में बताया । इंटरव्यू में ईशा अंबानी ने खुलासा किया कि वह और उनका भाई आकाश अंबानी आईवीएफ टेक्नोलॉजी के जरिए पैदा हुए थे । नीता अंबानी ने मुकेश अंबानी से शादी के 7 साल बाद दो जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था । ये जुड़वा बच्चे ईशा और आकाश थे ।
विज्ञापन

2 of 5
Isha ambani
ईशा ने बताया, 'हमारे पैदा होने के बाद मां नीता अपना पूरा समय हमें देना चाहती थीं । जब हम पांच साल के हुए तब वह फिर से अपने काम पर लौट गईं । आज भी वो वैसी ही हैं जैसी पहले हुआ करती थीं ।' ईशा ने ये भी बताया कि पापा से ज्यादा मां कड़क स्वभाव की थीं । इन दिनों कई दंपत्ति आईवीएफ का सहारा लेकर संतान का सुख ले रहे हैं।

क्या है ये आईवीएफ टेक्नोलॉजी, जानिए अगली स्लाइड में...
विज्ञापन

3 of 5
indian ivf
IVF, इसे हम इन विट्रो फर्टिलाइजेशन के नाम से भी जानते हैं। इस प्रक्रिया के तहत पति-पत्नी अपना बच्चा पैदा कर सकते हैं। इस टेक्नोलॉजी में सबसे पहले अंडों के उत्पादन के लिए महिला को फर्टिलिटी दवाइयां दी जाती हैं। इसके बाद सर्जरी के माध्यम से अंडो को निकाल कर प्रयोगशाला में कल्चर डिश में तैयार पति के शुक्राणुओं के साथ मिलाकर निषेचन(Fertilization) के लिए रख दिया जाता है। पूरी प्रक्रिया को अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल किया जाता है। लैब में इसे दो या तीन दिन रखा जाता है, फिर पूरी जांच के बाद इससे बने भ्रूण को वापिस महिला के गर्भ में इम्प्लांट कर दिया जाता है। आईवीएफ की इस प्रक्रिया में दो से तीन हफ्ते का समय लग जाता है। बच्चेदानी में भ्रूण इम्प्लांट करने के बाद 14 दिनों में ब्लड या प्रेग्नेंसी टेस्ट के जरिए इसकी सफलता और असफलता का पता चलता है। 
 

4 of 5
आईवीएफ से किफायती नई तकनीक
कितने प्रकार का होता है आईवीएफ?
आईवीएफ की प्रक्रिया तीन तरह की होती है- नेचुरल आईवीएफ, मिनिमल स्टिमुलेशन आईवीएफ और कनवेंशनल आईवीएफ। नेचुरल आईवीएफ नेचुरल यानी कुदरती अंडे के जरिए किया जाता है, न कि स्टिमुलेशन के जरिए तैयार अंडाणु से। यह उन औरतों के लिए सही है जो बहुत ज्यादा इलाज या दवा और खर्च से बचना चाहती हैं। मिनिमल स्टिमुलेशन आईवीएफ में दवा खिला कर स्वस्थ अंडाणु तैयार कराए जाते हैं। कनवेंशनल या पारंपरिक आईवीएफ वह तकनीक है जिसमें खास माहौल में अंडाणु और वीर्य को मिलाया जाता है, जिससे प्रजनन की संभावना काफी बढ़ जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
आईवीएफ - फोटो : सोशल मीडिया
30 फीसदी तक बढ़ जाती है संतान सुख पाने की संभावना
वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे संतान सुख पाने की संभावना ताजा भ्रूण के मुकाबले 30 फीसदी तक बढ़ जाती है। एक शोध में कहा गया है कि फ्रोजन भ्रूण की मदद से संतान की इच्छा रखने वाले दंपति पर आईवीएफ तकनीक का कई बार इस्तेमाल संभव हो सकता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें