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इस कलाकार ने भाई को परदे पर देख छोड़ दी पढ़ाई, फिर किया कुछ ऐसा कि हर सुपरस्टार पर पड़े भारी

Thu, 13 Feb 2020 12:09 PM IST
shrilata biswas रोहिताश सिंह परमार, मुंबई
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rajendra nath - फोटो : amar ujala
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हिंदी सिनेमा के चुनिंदा कॉमेडी कलाकारों में राजेंद्र नाथ का नाम बहुत इज्जत के साथ लिया जाता है। राजेंद्र नाथ अपने बड़े भाई प्रेम नाथ की देखा देखी एक अभिनेता बने जिसके लिए उन्होंने अपनी पढ़ाई को भी बीच में ही छोड़ दिया था। इसका नतीजा यह हुआ कि अपना पहला किरदार मिलने के लिए बहुत ज्यादा संघर्ष करना पड़ा लेकिन जब किरदार मिला तो फिर उसके बाद राजेंद्र ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज हम आपको उनके कुछ बेहतरीन किरदारों के बारे में बताते हैं। ये वो किरदार हैं जो हर दौर में फिल्म में मौजूद सुपरस्टार पर भी भारी पड़े।
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दिल देके देखो - फोटो : सोशल मीडिया
किरदार : कैलाश
फिल्म : दिल देके देखो (1959)

राजेंद्र नाथ अपने भाई अभिनेता प्रेम नाथ की देखा देखी अभिनेता तो बन गए लेकिन फिल्मों में उन्हें पहला किरदार पाने के लिए बहुत मशक्कत करनी पड़ी। तब जाकर उस समय के बड़े फिल्म निर्देशकों में से एक नासिर हुसैन ने उन्हें अपनी इस फिल्म में छुट-पुट मजाक करने वाले एक कॉमेडियन का किरदार निभाने के लिए दिया। इस फिल्म में उनकी कॉमिक टाइमिंग की बहुत तारीफें हुई, तो नासिर हुसैन ने राजेंद्र को लगातार अपनी फिल्मों में लेना शुरू कर दिया था।
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जब प्यार किसी से होता है - फोटो : अमर उजाला
किरदार : पोपट लाल / चार्ली
फिल्म : जब प्यार किसी से होता है (1961)

राजेंद्र नाथ ने अब तक कॉमेडी के कुछ छोटे-मोटे किरदार ही किए थे लेकिन इस फिल्म में उन्हें एक कॉमेडियन के रूप में मजबूत किरदार मिला जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। नासिर हुसैन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में राजेंद्र ने पोपट लाल का ऐसा किरदार निभाया, जो कहीं ना कहीं फिल्म के मुख्य नायक देव आनंद पर भी भारी पड़ा। इस फिल्म के किरदार पोपट लाल का नाम इतना पसंद किया गया कि आगे चलकर यह नाम राजेंद्र के नाम का पर्यायवाची बन गया।

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फिर वही दिल लाया हूं - फोटो : अमर उजाला
किरदार : डिफू
फिल्म : फिर वही दिल लाया हूं (1963)

निर्देशक नासिर हुसैन के साथ मिलकर राजेंद्र ने इस फिल्म में अपनी कॉमेडी की विरासत को आगे बढ़ाया। राजेंद्र नाथ का इस फिल्म में किरदार का नाम बिहारीलाल होता है, जिसे लोग प्यार से डिफू बुलाते हैं। डिफू विदेश से पढ़कर आया है। सम्पन्न परिवार से है और मोना (आशा पारेख) के माता पिता उसे बहुत पसंद करते हैं और मोना की शादी डिफू से करवाना चाहते हैं। डिफू के रूप में राजेंद्र की कॉमिक टाइमिंग को दर्शकों ने बहुत पसंद किया।
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हमराही - फोटो : अमर उजाला
किरदार : हनुमान शर्मा
फिल्म : हमराही (1963)

गंभीर किरदारों को निभाने वाले कलाकारों के बारे में तो कहा भी जा सकता है कि वह कोई भी किरदार निभा सकते हैं लेकिन एक कॉमेडियन जब एक विलेन का किरदार निभाए तो यह दांतों तले उंगली दबाने वाली बात हो सकती है। इस फिल्म में राजेंद्र ने हनुमान शर्मा के रूप में एक खूंखार विलेन का किरदार निभाया है, जो हेमलता (शशिकला) की हत्या कर देता है। जितना प्यार राजेंद्र को एक कॉमेडियन के रूप में मिला, उतना ही प्यार उन्हें विलेन बनने पर भी प्राप्त हुआ।
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मेरे सनम - फोटो : अमर उजाला
किरदार : प्यारेलाल
फिल्म : मेरे सनम (1965)

कॉमेडी तो राजेंद्र नाथ ने बहुत फिल्मों में की है लेकिन इस फिल्म में की गई कॉमिक टाइमिंग के साथ कॉमेडी उनकी सबसे अच्छी प्रस्तुतियों में से एक है। यहां उन्होंने सिर्फ कॉमेडियन का ही नहीं बल्कि एक जिम्मेदार और अच्छे दोस्त का किरदार भी भली भांति निभाया है, जिसमें वह अपनी करीबी दोस्त नीना (आशा पारेख) की उसके असली पिता से मिलने में सहायता करता है। 
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एन इवनिंग इन पेरिस - फोटो : अमर उजाला
किरदार : माखन सिंह
फिल्म : एन इवनिंग इन पेरिस (1967)

शक्ति सामंत के निर्माण और निर्देशन में बनी यह फिल्म एक रोमांटिक थ्रिलर फिल्म है, जिसके गंभीर दृश्यों में सरलता लाने का काम राजेंद्र नाथ की परदे पर मौजूदगी ने किया। उनके छोटे-छोटे चुटीले मजाक दर्शकों को बहुत पसंद आए। कहानी में दीपा (शर्मिला टैगोर) एक अमीर लड़की है, जो सच्चे प्यार की तलाश में पेरिस चली जाती है। राजेंद्र नाथ ने माखन सिंह के रूप में इसी दीपा के ड्राइवर का किरदार निभाया है, जो उसके सफर को आसान करता है।

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तीन बहुरानियां - फोटो : अमर उजाला
किरदार : कन्हैया सेल्समैन
फिल्म : तीन बहूरानियां (1968)

जैसा कि फिल्म के शीर्षक से जाहिर है कि यह फिल्म किसी घर की तीन बहुओं पर आधारित है, जिनका किरदार शोकर जानकी, कंचना और जयंती ने निभाया है। इस फिल्म में राजेंद्र नाथ का किरदार एक सेल्समैन का है जो इस घर की तीनों बहुओं को अपनी अलग-अलग स्कीमों से अपने चिर परिचित अंदाज में आकर्षित करता है। यह 'बामा विजयम' नाम की तमिल फिल्म का रीमेक है।

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जीवन मृत्यु - फोटो : अमर उजाला
किरदार : प्रेम प्रकाश
फिल्म : जीवन मृत्यु (1970)

सफल निर्देशक और निर्माता सूरज बड़जात्या के दादा और राजश्री प्रोडक्शंस को शुरू करने वाले ताराचंद बड़जात्या के निर्माण में बनी यह फिल्म धर्मेंद्र की बहुमुखी प्रतिभा को पर्दे पर उतारने के लिए जानी जाती है लेकिन इस फिल्म में प्रेम प्रकाश के रूप में राजेंद्र नाथ के सहायक किरदार को पर्दे पर मौजूद होने पर अनदेखा नहीं किया जा सकता, जिसमें वह अपने अभिनय से सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहे।

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Purab Aur Paschim
किरदार : शंकर
फिल्म : पूरब और पश्चिम (1970)

भारत में देशभक्ति का फिल्मी चेहरा बन चुके मनोज कुमार के निर्माण और निर्देशन में बनी फिल्म 'पूरब और पश्चिम' में शंकर के किरदार में राजेंद्र नाथ अपने अपने करियर का सबसे बेहतरीन अभिनय करते हुए नजर आए। हालांकि यह पूरी तरह से कॉमेडी किरदार नहीं था। गुलाम भारत के वक्त विदेश में रहने वाले इस किरदार के जरिए राजेंद्र को अपने अभिनय की दूसरी प्रतिभाओं को जाहिर करने का मौका मिला। 

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धड़कन - फोटो : अमर उजाला
किरदार : इंस्पेक्टर दर्शन के. लाल
फिल्म : धड़कन (1972)

राजेंद्र नाथ को इस फिल्म में एक पुलिस इंस्पेक्टर के रूप में सहायक भूमिका में देखा गया, जिसका नाम दर्शन के. लाल है। वह फिल्म के मुख्य किरदार सूरज प्रकाश (संजय खान) के दोस्त हैं और फिल्म के विलेन केवल शर्मा (रूपेश कुमार) को एक हत्या के लिए दोषी सिद्ध करते हैं, साथ ही साक्ष्य छुपाने के लिए सजा दिलवाने में अपने दोस्त सूरज की मदद करते हैं। यह राजेंद्र के सबसे अच्छे गंभीर किरदारों में से एक है।

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