इनकी 'गाली पर भी ताली' पड़ती है, क्योंकि इनके मन में 'गलती करने का ख्याल' भी आता है। इनकी मानें तो 'बीहड़ में बागी' मिलते हैं और 'मर्द गालियां इसलिए देते हैं, क्योंकि वो रोते कम' हैं। दरअसल, बात हो रही है तिग्मांशु धूलिया की, जिनके डायलॉग बॉलीवुड के नए नजरिए की नुमाइश पेश करते हैं। आज इन्हीं तिग्मांशु का बर्थडे है तो रूबरू होते हैं उनके बेहतरीन डायलॉग्स से, क्योंकि उनका मानना है...'जो कम बोलते हैं, वो ज्यादा जीते हैं!'
3 जुलाई 1967 को जन्मे तिग्मांशु हासिल, पान सिंह तोमर, बुलेट राजा जैसी फिल्मों का डायरेक्शन और गैंग ऑफ वासेपुर में एक्टिंग का दम दिखा चुके हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेजी, इकॉनोमिक्स और इतिहास से बीए किया है। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने दिल्ली में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से थिएटर की मास्टर डिग्री ली। इसी दौरान उनका जुड़ाव थियेटर से हो गया और चले आए बंबई अपना सपना पूरा करने। आज उनके जन्मदिन पर हम लेकर आए हैं उनके कुछ चुनिंदा डायलॉग्स...