film Daag
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बात सन 1970 की है कि बंबई के हर दूसरे प्रोडक्शन हाउस में एक ही बात की चर्चा चलती रहती थी और वो ये कि बलदेव राज चोपड़ा यानी बी आर चोपड़ा के छोटे भाई ने अपनी अलग फिल्म कंपनी खोल ली है। यशराज चोपड़ा को अपनी नई कंपनी खोलने का ख्याल भी आया तो राजेश खन्ना की वजह से ही। आखिरकार, राजेश खन्ना का करियर डूबने से यश चोपड़ा ने ही तो बचाया था। यश चोपड़ा तब बीआर फिल्म्स के लिए काम किया करते थे और राजेश खन्ना की शुरू की पांचों फिल्में फ्लॉप हो चुकी थीं। यश चोपड़ा उन दिनों फिल्म आदमी और इंसान की शूटिंग कर रहे थे जब सायरा बानो के बीमार पड़ते ही शूटिंग रुक गई। सायरा बानो ठीक होकर लौटीं कोई महीने भर बाद और इस बीच सिर्फ 28 दिन के शूट में यश चोपड़ा ने बना डाली फिल्म इत्तेफाक, जो राजेश खन्ना के करियर की पहली हिट फिल्म बनी।
इत्तेफाक की कामयाबी का एहसान राजेश खन्ना ने फिल्म दाग से उतारा। दाग के संवाद लिखने से पहले अख्तर उल इमान तमाम सुपरहिट फिल्मों के संवाद या पटकथा या दोनों लिख चुके थे। इनमें शामिल हैं, कानून, धर्मपुत्र, गुमराह, वक्त, मेरा साया, गबन, पत्थर के सन्म, हमराज के अलावा आदमी और इंसान जैसी चर्चित फिल्में। यश चोपड़ा से उनकी पटती भी खूब थी। तो एक दिन राजेश खन्ना, यश चोपड़ा और अख्तर उल इमान मिल बैठे। दाग की कहानी गुलशन नंदा ने सुनाई जिनके उपन्यास उन दिनों देश भर के बुक स्टाल्स पर धूम मचा रहे थे। फिल्म में हीरोइन के तौर पर आईं राजेश खन्ना की फेविरट हीरोइन शर्मिला टैगोर और इसी फिल्म से यश चोपड़ा ने हिंदी सिनेमा को दिया चांदनी का किरदार। यश चोपड़ा की किसी भी फिल्म में चांदनी नाम का किरदार सबसे पहले करने का मौका मिला उन दिनों की उभरती अदाकारा राखी को।