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अजय देवगन पर चढ़ा FIFA का फीवर, बनेंगे फुटबॉल टीम के कोच, टार्गेट गोल्ड पर

Thu, 12 Jul 2018 06:46 PM IST
रवि बुले
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Ajay Devgan
आज विश्व फुटबॉल के नक्शे पर भारत भले ही कहीं न हो परंतु एक दौर ऐसा था जब इसे ‘एशिया का ब्राजील’ कहा जाने लगा था। यह बात भले ही हैरान करे मगर 1950-60 के दशक में सैयद अब्दुल रहीम के रूप में ऐसा कोच भारतीय फुटबॉल को मिला था, जिसके मार्गदर्शन में खिलाड़ियों ने बड़ी सफलताएं दर्ज की थीं। दिग्गज टीमों को हराया था और 1962 के जकार्ता (इंडोनेशिया) एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था! बायोपिक फिल्मों के वर्तमान दौर में अब सैयद अब्दुल रहीम की बायोपिक बनने जा रहे हैं और अजय देवगन इस फुटबॉल कोच की भूमिका में नजर आएंगे।
 
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boney kapoor
भारतीय फुटबॉल के इस गुमनाम नायक की बायोपिक बोनी कपूर, आकाश चावला और जॉय सेनगुप्ता प्रोड्यूस कर रहे हैं। फिल्म का निर्देशन अमित शर्मा करेंगे। इससे पहले उन्होंने बोनी के लिए तेवर (2015) बनाई थी। सैयद अब्दुल रहीम की बायोपिक का नाम अभी तय नहीं है। फिल्म की स्क्रिप्ट सैवन कुदरौस और रितेश शाह ने लिखी है। 

 
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boney kapoor
बोनी के अनुसार, ‘हैरानी होती है कि फुटबॉल दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल है और हमारे यहां इसके करोड़ों फैन्स हैं परंतु भारतीय की टीम को कभी बड़े टूर्नामेंटों में खेलते नहीं देखा गया। आकाश चावला और जॉय सेनगुप्ता मेरे पास रहीम की कहानी लाए तो मुझे आश्चर्य हुआ कि देश के लोग उन्हें और उस दौर के चुन्नी गोस्वामी, पी.के. बनर्जी, बलराम, फ्रेंको और अरुण घोष जैसे खिलाड़ियों से सजी टीम की उपलब्धियों को नहीं जानते। इन दिनों देश में खेलो इंडिया अभियान चल रहा है और ऐसे में यह फिल्म बनाने का बिल्कुल सही समय है।’ अजय देवगन की कास्टिंग को उन्होंने सही ठहराते हुए कहा, ‘हमें उम्मीद है कि अजय को फुटबॉल कोच के रूप में देख लाखों युवा प्रेरित होंगे और भविष्य में हम भारत को भी विश्व कप में खेलते देख सकेंगे।’

 

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indian football team
इतिहास के पन्ने बताते हैं कि भारतीय फुटबॉल में एक वक्त सैयद अब्दुल रहीम बड़ा नाम थे। 1909 को हैदराबाद में जन्मे रहीम ने फुटबॉच के रूप में 1940 के दशक में हैदराबाद पुलिस की टीम को देश के नक्शे पर बड़ा नाम बना दिया था। आजादी के बाद 1950 में उन्हें भारतीय टीम के कोच तथा मैनेजर की जिम्मेदारी दी गई। नतीजा 1951 में ही दिखा जब भारत ने दिल्ली के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता। फाइनल में जब हमारी टीम ने ईरान को हराया तो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में मौजूद थे 1952 के मेलबर्न ओलंपिक में रहीम की कोचिंग में भारत ने ऑस्ट्रेलिया जैसी दमदार टीम को मात देकर दुनिया को चौंकाया। हालांकि कांस्य पदक मुकाबले में टीम हार कर चौथे नंबर पर रही। 

 
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syed abdul rahim
चार साल बाद रोम ओलंपिक ने भारत ने फ्रांस को 1-1 से बराबरी पर रोका और उस समय की बड़ी शक्ति हंगरी से 2-1 तथा पेरू से 3-1 से मात मिली। परंतु 1962 में भारत ने एशिया में अपनी बादशाहत दिखाई और जकार्ता एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता। जानकार मानते हैं कि मैदान पर रणनीति बनाने के मामले में रहीम समय से आगे थे। 1960 के शुरुआती दिनों में उनके फेफड़ों में कैंसर हो गया परंतु वह मैदान पर खिलाड़ियों के साथ डटे रहे। 1963 में उनका निधन हुआ। सैयद अब्दुल रहीम के कोच-मैनेजर रहते भारतीय फुटबॉल ने जो ऊंचाइयां छुई, वो बाद में आज तक नहीं दोहराई जा सकी।
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