सुशांत सिंह
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दरअसल दिल्ली हिंसा को लेकर सुशांत सिंह ने एक शायरी के जरिए अपनी बात रखी है। सुशांत ने लिखा, 'थक गए होगे तुम, सांस ले लो जरा। हिसाब लगा लो कि टोपी वाला था, या था तिलक वाला वो जो मरा। अब भी जी नहीं भरा? मुझे मार कर मिटती हो नफरत तुम्हारी, तो खुद चलकर आऊंगा तुम तक ये वादा है मेरा। बस इतनी मोहलत देना ऐ दोस्त कि जो घर तोड़े हैं तुमने, उनमें से कुछ तो मैं फिर बना दूं जरा।'