अभिनव सिंह कश्यप
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वह आगे लिखते हैं 'सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने यशराज फिल्म्स के टैलंट मैनजमेंट एजेंसी की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं, जिसने हो सकता है उन्हें आत्महत्या के लिए प्रेरित किया हो। यह जांच अधिकारियों को करनी है, लेकिन यह लोग आपका करियर नहीं बनाते, आपके करियर को बर्बाद कर देते हैं। एक दशक से तो मैं खुद यह सब बर्दाशत कर रहा हूं। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि बॉलीवुड का हर टैलंट मैनजर और सभी टैलंट मैनेजमेंट एजेंसी कलाकारों के लिए मौत का फंदा होती हैं। सबसे पहले तो मुंबई के बाहर से आए प्रतिभाशालियों को इन टैलंट स्काउट (कास्टिंग डायरेक्टर) वगैरह का सामना करना पड़ता है, जो लोग अपने छोटे- मोटे संपर्कों के बदले सीधे कमीशन मांगने लगते हैं। इन प्रतिभाशालियों को बॉलीवुड पार्टियों में जाने का लालच दिया जाता है और फिर ऐसे ही किसी रेस्त्रां में लंच वगैरह के बहाने उन्हें सितारों से मिलवाया जाता है। सितारों की चकाचौंध और आसानी से पैसा कमाने का खेल शुरू हो जाता है, जिसके बारे में उसने कभी सोचा नहीं था। इन पार्टियों में प्रतिभाशाली लोगों को यह सभी नजरअंदाज करते हैं और उनके साथ बुरा व्यवहार होता है ताकि वे हतोत्साहित महसूस करें और उनका आत्मविश्वास चकनाचूर हो जाए।
जब उनका आत्मविश्वास टूट जाता है तो यह कास्टिंग डायरेक्टर्स उन्हें कई सालों के अनुबंध की पेशकश देते हैं और इस फील्ड के दरिंदों से बचाने का वादा कर या फिर छोटा-मोटा लालच देकर इसे साइन करने के लिए दबाव बनाते हैं। याद रखिए कि ऐसे अनुबंध को तोड़ने का मतलब है इन उभरते प्रतिभाशालियों के लिए भारी आर्थिक जुर्माना है। यह स्काउट अपनी दादागीरी दिखाकर ऐसे प्रतिभाशाली लोगों को यकीन दिला देते हैं कि उनके पास इसे साइन करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। पिछले कई सालों से ऐसा ही होता आ रहा है, किसी भी कलाकार की प्रतिभा को बार-बार तब तक तोड़ा जाता है जब तक कि वह आत्महत्या न कर ले या फिर प्रॉस्टिट्यूशन / एस्कॉर्ट सर्विस (मेल एस्कॉर्ट) का शिकार न हो जाए, जो अमीर और पावरफुल लोगों की जरूरतों को पूरा करता हो। हालांकि, ऐसा केवल बॉलीवुड में ही नहीं बल्कि कॉर्पोरेट जगत और राजनीति में भी यही होता है'।