पत्नी व बेटे के साथ सुदेश भोसले
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
मौजूदा पीढ़ी के संगीतकारों में आपने संगीतकार सोहेल सेन के साथ 'हाउसफुल 4' और संगीतकार मिथुन के साथ फिल्म 'शमशेरा' में गाने गाए हैं, क्या फर्क लगता है बीते हुए कल और आज के संगीत संयोजन में?
इसे एक लाइन में ऐसे समझ सकते हैं कि पहले संगीतकार घर पर बुलाते थे, गाने समझाते थे, किसके लिए गा रहे हैं ये समझाते थे, गाने की सिचुएशन बताते थे, फिल्म में किस मूड में ये गाना गाना है, टोन क्या रखनी है, सब बताते थे, लेकिन अब तो संगीतकार रिकॉर्डिंग तक पर नहीं आते हैं। उनके संयोजक ही सब काम देख लेते हैं। न ये पता होता है कि किसके लिए गा रहे हैं, और न ये पता होता है कि फिल्म में ये गाना क्यों गाया जा रहा है। एक जमाना हमने ऐसा भी देखा है जब अमिताभ बच्चन जी खुद पर फिल्माए जाने वाले हर गाने की रिहर्सल तक पर आते थे। रिकॉर्डिंग पर तो वह सौ फीसदी मौजूद रहते थे, और फाइनल टेक वह ही फाइनल करते थे। अब तो सब मशीन है। आत्मा मर चुकी है। जो कुछ हो रहा है, सब मशीन कर रही है।
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