suchitra sen
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साल 1963 में सुचित्रा सेन ने सफलता की ऐसी ऊंचाइयों को छुआ, जहां तक पहुंचने में भारत की कोई भी अभिनेत्री या अभिनेता उस वक्त तक सफल नहीं हुए थे। उन्हें तीसरे मॉस्को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के अवार्ड से नवाजा गया। किसी भी विदेशी पुरस्कार को पाने वाली सुचित्रा सेन पहली अभिनेत्री हैं। यह फिल्म 'सात पाके बांधा' थी जिसमें उनके अभिनय की बहुत सराहना हुई थी।
सुचित्रा सेन इंडस्ट्री में काम के लिए तो जानी ही जाती थीं, साथ ही वे अपनी शर्तों पर काम करने के लिए भी जानी जाती थीं। इसका जीता जागता उदाहरण है कि एक बार फिल्म निर्माता और निर्देशक सत्यजीत रे देवी चौधरानी के जीवन पर आधारित एक फिल्म बनाना चाहते थे, जिसमें वे चाहते थे कि मुख्य अभिनेत्री का किरदार सुचित्रा सेन निभाएं। उस समय सुचित्रा फिल्मों में बहुत व्यस्त थीं इसलिए उन्होंने इस फिल्म के लिए मना कर दिया। लेकिन सत्यजीत रे की भी जिद थी कि अगर वे फिल्म बनाएंगे तो सुचित्रा सेन के साथ वरना नहीं बनाएंगे। अंत में वह फिल्म बनी ही नहीं।