राजेश खन्ना
साल 1983 वो साल है जिसे हिंदी सिनेमा में फिल्म कुली के लिए याद किया जाता है। अगर ये फिल्म बस महीने भर की देरी से रिलीज होती तो साल 1983 हमेशा के लिए राजेश खन्ना की सेकेंड इनिंग्स के बेहतरीन साल के लिए फिल्म इतिहास में दर्ज हो जाता। लेकिन, फिर भी राजेश खन्ना की फिल्मों ने उनके चाहने वालों का खूब मनोरंजन किया। फरवरी के आखिरी शुक्रवार को उस साल श्रीदेवी और जीतेंद्र की फिल्म हिम्मतवाला ने खूब हंगामा मचाया था लेकिन उसके ठीक दो हफ्ते बाद रिलीज हुई राजेश खन्ना की फिल्म अवतार ने लोगों को बताया कि संस्कार की गरिमा क्या होती है और कैसे परिवार का मुखिया अपनी बिगड़ी संतानों को राह दिखा सकता है। अमिताभ बच्चन ने कुली से पहले उस साल एक और धमाका किया था अप्रैल के दूसरे शुक्रवार को फिल्म अंधा कानून में तालियां बटोरकर। और, इसी के ठीक बाद जून के पहले शुक्रवार को रिलीज हुई हमारी आज के बाइस्कोप की फिल्म सौतन।
फिल्म सौतन में राजेश खन्ना का जो आभा मंडल है उसका असर उस साल छोटे बड़े, बूढ़े बच्चे सब पर दिखा। अनिल कपूर ने तो खैर सफेद पैंट और रंगीन शर्ट या स्वेटर का प्रचलन बहुत बाद में शुरू किया, फिल्म सौतन में सफेद जूता, सफेद पतलून, सफेद जैकेट और लाल कमीज का जो रुतबा राजेश खन्ना ने दिखाया उससे एनडीटीवी के एंकर रवीश कुमार तक प्रभावित रहे। फेसबुक की अपनी एक पोस्ट में वह लिखते हैं, 'ये एक ऐसा कॉम्बिनेशन है जिसे बहुत लोग पहनना चाहते हैं पर नहीं पहन पाते। उनका यह अधूरा ख्वाब सर्फ एक्सेल के पैसे तो बचा लेता है मगर सफेदी का यह सुख अनमोल भी तो है।' ये बात रवीश ने फिल्म सौतन के गाने 'शायद मेरी शादी का ख्याल दिल में आया है..' को यूट्यूब पर देखते हुए लिखी। रवीश कुमार की किशोरावस्था के दिनों में आई इस फिल्म के उनके जैसे करोड़ों दीवाने हैं। ये सच है कि देश में आज 65 फीसदी आबादी 35 साल से कम के लोगों की है लेकिन इसके भी तमाम लोग राजेश खन्ना के तिलिस्म की वजहों के तलबगार रहते हैं।