सोनू सूद
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संतोष ने लिखा, 'सोनू सूद जी गांव में 35 लड़कियां हैं जिन्हें पढ़ने के लिए 8 से 15 किलोमीटर जंगल के रास्ते से जाना पड़ता है। सिर्फ कुछ के पास ही साइकिल है। यह नक्सल प्रभावित रास्ता है। डर से इनके परिवार वाले आगे नहीं पढ़ने देंगे। अगर आप इन सभी को साइकिल दे पाएं तो इनका भविष्य सुधर जाएगा।'