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बाइस्कोप: अमिताभ, रेखा और जया की 'सिलसिला' को हुए 39 साल, देखिए शूटिंग लोकेशन की दिलचस्प तस्वीरें

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सिलसिला - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला
बाइस्कोप में आज की जो फिल्म है, उसे लिखने की शुरूआत करने को मेरे पास कम से कम 10 ऐसी बातें हैं जिनमें से हर बात उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि दूसरी बात। लेकिन मैं आज के बाइस्कोप की शुरुआत करता हूं इस फिल्म के सिनेमैटोग्राफर के जी यानी कोरेगांवकर के किस्से से। केजी ने अपना पहला नाम सिनेमा में कम ही इस्तेमाल किया, वह इसी नाम से जाने जाते थे। बी आर फिल्म्स से अलग होकर जब यश चोपड़ा ने अपना अलग बैनर 1970 में शुरू किया और जिसके इस साल 50 साल पूरे हो रहे हैं, तो वह अपने साथ अपने कुछ भरोसेमंद भी यशराज फिल्म्स में ले गए। केजी के बेटे राजू केजी ने मेरे साथ काम किया है तो मैं समझ सकता हूं कि उनके पिता कितने अनुशासनप्रिय और सज्जन व्यक्ति रहे होंगे। आज के बाइस्कोप की फिल्म है 'सिलसिला'। फिल्म 'इत्तेफाक' से शुरू हुए एक निर्देशक और एक सिनेमैटोग्राफर की दोस्ती के सिलसिले की ये आखिरी फिल्म है। यश चोपड़ा के सिनेमा में कुदरती नजारे इसके बाद भी लोगों ने देखे लेकिन परदे पर जिंदगी उतार देने वाले केजी जैसे सिनेमैटोग्राफर कम ही हुए।

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सिलसिला - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अमिताभ और यश चोपड़ा का 'सिलसिला'
बात दोस्ती की ही चल रही है तो लगे हाथ इसी एहसास का दूसरा पहलू भी समझ ही लेते हैं और फिर आगे बढ़ते हैं। हिंदी सिनेमा के शौकीन ये तो जानते ही हैं कि यश चोपड़ा और अमिताभ बच्चन का बहुत गहरा दोस्ताना फिल्मों में रहा है। राजेश खन्ना के साथ 'इत्तेफाक' और 'दाग' बनाने के बाद यश चोपड़ा ने देव आनंद के साथ 'जोशीला' बनाई थी। और, उसके बाद उन्होंने जो फिल्म 'दीवार' बनाई, उसने अमिताभ बच्चन को फिल्म 'जंजीर' में मिले एंग्री यंगमैन के तमगे पर सुनहरा वर्क चढ़ा दिया। सन 75 से शुरू हुआ ये सिलसिला फिल्म 'कभी कभी', 'त्रिशूल', 'काला पत्थर' से होता हुआ 'सिलसिला' पर आकर ही टूटा। यश चोपड़ा और अमिताभ बच्चन का नाम इसके बाद एक साथ फिल्म 'मोहब्बतें' में परदे पर दिखा, जिसके यश चोपड़ा निर्माता थे। और, दिखा फिल्म 'वीर जारा' में जहां यश चोपड़ा ने उनको शाहरुख खान के सामने हाशिये पर खड़ा कर दिया। तो आखिर ऐसा क्या हुआ 'सिलसिला' की मेकिंग के दौरान, कि यश चोपड़ा और अमिताभ बच्चन में मनभेद हो गए और इसके बावजूद दोनों इस फिल्म में पार्टनर भी थे।
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सिलसिला - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कास्टिंग में फेरबदल से आया भूचाल
अमिताभ बच्चन और यश चोपड़ा की मोहब्बत के किस्से बहुत हैं, लेकिन दोनों की अदावत का पहला किस्सा वहां से शुरू होता है जब यश चोपड़ा को फिल्म 'सिलसिला' की दोनों हीरोइनों स्मिता पाटिल और परवीन बाबी को श्रीनगर से फिल्म की शूटिंग शुरू हो जाने के बाद वापस भेजना पड़ा था। अपने आखिरी जन्मदिन पर मुंबई में तमाम लोगों के सामने यश चोपड़ा ने ये किस्सा सुनाया था कि कैसे इस फिल्म में स्मिता की जगह जया बच्चन और परवीन बाबी की जगह रेखा ने ले ली थी। परवीन बाबी ने तो खैर इस बात के लिए उफ भी नहीं की क्योंकि दिल टूटने की उनको आदत हो चुकी थी। स्मिता पाटिल इस बात को लेकर अरसे तक अमिताभ बच्चन और यश चोपड़ा दोनों से नाराज रहीं कि दोनों ने ये बात उनसे खुद क्यों नहीं की। बताते हैं कि ये फैसला स्मिता पाटिल तक पहुंचाने के लिए यश चोपड़ा ने शशि कपूर की मदद ली थी। कास्टिंग में इस फेरबदल का ठीकरा यश चोपड़ा ने अमिताभ बच्चन के सिर फोड़ा था।

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सिलसिला - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
होने वाली भाभी बनी बीवी
फिल्म 'सिलसिला' की कहानी तो आपको याद ही होगी। ये इकलौती फिल्म है जिसमें शशि कपूर ने अमिताभ बच्चन के बड़े भाई का रोल किया है, नहीं तो उम्र में बड़े होने के बावजूद शशि कपूर फिल्मों में उनके छोटे भाई ही बनते रहे। तो फिल्म में दो भाई हैं, दोनों अपने अपने क्षेत्र में दिग्गज बन चुके हैं। एक का साहित्य की जमीन पर नाम उग चुका है। दूसरा आसमान में अपना नाम लिख चुका है। दोनों की शादियां नजदीक हैं और फिर हो जाता है एक हादसा...! छोटा भाई अपनी प्रेमिका को भूल बड़े भाई की पसंद से शादी कर लेता है। दोनों का परिवार चल निकलता है और फिर एक दिन छोटे के जीवन में लौट आती है उसकी प्रेमिका। दोनों फिर मिलते हैं। फिर दिल खिलते हैं। रातें गुलजार होती हैं। सबेरे शानदार होते हैं। लेकिन, कब तक? प्यार पूरा ही हो जाए तो फिर प्यार कैसा? तमाम अंधेरी संकरी सुरंगों से गुजरती हुई ये प्रेम कहानी जिस सामाजिक मुहाने पर आकर निकलती है, उसमें इसके राइटर सागर सरहदी भी कुछ अलग करते तो सन 1981 में भला क्या करते।
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सिलसिला - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
रेखा का सिंगल टेक और जया के आंसू
सुनते तो यही हैं कि फिल्म बनने के दौरान तमाम कारनामे हुए। अमिताभ बच्चन, रेखा और जया बच्चन का एक साथ होना ही तापमान बढ़ा देने के लिए काफी होता था। यश चोपड़ा मन ही मन हनुमान चालीसा पढ़ रहे होते और रेखा फिल्म के सिनेमैटोग्राफर केजी के कान में बोल देतीं, 'फर्स्ट टेक ही फाइनल टेक होगा, मैं बोल देती हूं। शॉट मिले तो ठीक, न मिले तो ठीक। मैं कट होते ही सीधे निकल जाऊंगी।' लेकिन केजी कभी ये बात न यश चोपड़ा से बोल पाते और न ही अमिताभ बच्चन से। अमिताभ को लगता कि जया ने कुछ किया होगा तभी रेखा का मूड उखड़ गया और जया के पास सिवाय आंसू भर भर के अपनी आंखों का नंबर बढ़ा लेने के कोई दूसरा रास्ता होता नहीं था। 'सिलसिला' की मेकिंग के दौरान यश चोपड़ा जिस तनाव से गुजरे वह इसकी रिलीज के दिन और इसके बाद तक जारी रहा।
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सिलसिला - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
डबिंग के डबल पंगे
फिल्म की ऐन मौके पर बदली गई कास्टिंग के बाद फिल्म जैसे तैसे शूट तो हो गई पर इसकी डबिंग में भी बड़े पंगे हुए। अमिताभ बच्चन अक्सर डबिंग से गायब रहने लगे तो यश चोपड़ा ने अपने जासूस छोड़े कि भाई पता करो चक्कर क्या है। पता चला कि अमिताभ बच्चन किसी तरह अपनी एक और फिल्म 'याराना' जल्दी से जल्दी पूरी करना चाहते थे। उसका पैचअप शूट 30 दिन का निकल आया था। और, इसके बाद वह 'याराना' की डबिंग पर भी ध्यान देने लगे। यश चोपड़ा इससे काफी आहत हुए और उन्होंने अमिताभ बच्चन से ये कहा भी कि अगर यही बात वह उनसे बता देते तो कोई हर्ज नहीं होता। और, पंगे रेखा की डबिंग के दौरान भी खूब हुए। जब भी वह डबिंग करने पहुंचती तो पहले जया बच्चन के सीन दिखाने की जिद करती। वह इसमें किसी तरह के फेरबदल की बात तो नहीं कहती थीं, लेकिन इस दौरान उनके जो रिएक्शन और कमेंट्स होते थे, वे सब डबिंग स्टूडियो के बाहर भी छन छनकर पहुंचते रहते थे।
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सिलसिला - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अमिताभ बच्चन हिट, 'सिलसिला' फ्लॉप
साल 1981 अमिताभ बच्चन के करियर का एक और कामयाब साल था। इस साल उनकी फिल्मों में से 'नसीब', 'याराना', 'कालिया' और 'लावारिस' ने बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर कमाई की। फिल्म 'बरसात की एक रात' भी ठीक ठाक रही थी, लेकिन 'सिलसिला' नहीं चल पाई। हिंदी सिनेमा में ऐसी फिल्मों की लंबी सूची है जिन्हें इनके रिलीज होने के समय की पीढ़ी ने पूरी तरह ठुकरा दिया, लेकिन उनके बाद की पीढ़ी ने उन्हीं फिल्मों को सिर आंखों पर बिठा लिया। 'सिलसिला' फ्लॉप होने की तमाम वजहों में से एक वजह तो यही रही कि फिल्म में जया बच्चन को अमिताभ बच्चन की होने वाली भाभी के तौर पर शुरू में दिखा दिया गया। और, बाद में इतनी शिद्दत से प्यार करने वालों को आखिर में मिलने नहीं दिया गया। अमिताभ और रेखा ने इस फिल्म में जो एहसास कैमरे के सामने बिताए हैं, वे असली एहसास से कम नहीं हैं, ये एहसास जब लोगों को पसंद नहीं आए तो अमिताभ बच्चन ने फिर कभी रेखा के साथ परदे पर काम ही नहीं किया। यहां ये नोट करने लायक है कि किसी फिल्म में पहली बार दोनों ने 'दो अनजाने' में काम किया और फिल्म के बाद दोनों हकीकत में दो अनजाने बनकर रहने लगे।

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सिलसिला - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
शिव-हरि ने पहली ही गेंद पर मारा छक्का
फिल्म का संगीत जरूर अपने जमाने का हिट संगीत रहा। अमिताभ बच्चन तो इसकी म्यूजिक सिटिंग में भी खूब जाया करते। किसी फिल्म के संगीत में इससे ज्यादा उनका शामिल होना कम ही देखा गया। फिल्म में जावेद अख्तर ने दो गाने लिखे हैं। पहला है, 'ये कहां आ गए हम, यूं ही साथ साथ चलते' और दूसरा है 'नीला आसमां खो गया..।' 'नीला आसमां..' गाना फिल्म में दो बार है, एक बार इसे अमिताभ बच्चन गाते हैं और दूसरी बार लता मंगेशकर। जबकि पहला गाना है डुएट। डुएट होते हुए भी उस समय की परंपराओं के विपरीत ये गाना अमिताभ बच्चन और लता मंगेशकर ने अलग अलग समय पर रिकॉर्ड किया। हालांकि, जमाने बाद दोनों ने इस बात पर अफसोस भी जाहिर किया कि ये गाना अगर दोनों ने साथ ही गाया होता तो बेहतर होता। लेकिन, रिकॉर्डिंग के दिनों में दोनों के सुर एक जैसे नहीं लगते थे। 'नीला आसमां खो गया' का किस्सा ये है कि जब फिल्म 'जमीर' की शूटिंग हो रही थी तो शम्मी कपूर और अमिताभ बच्चन ने मिलकर ये ट्यून खूब बजाई थी। बाद में इसे फिल्म 'सिलसिला' में शम्मी कपूर की अनुमति लेकर ही अमिताभ बच्चन ने प्रयोग किया।

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Silsila - फोटो : twitter
'रंग बरसे' जैसा दूसरा प्रेम/होली गीत नहीं
फिल्म 'सिलसिला' का संगीत दिया शिव कुमार शर्मा और हरि प्रसाद चौरसिया ने। दोनों अपने अपने फन के माहिर कलाकार रहे हैं। हिंदी सिनेमा के अनगिनत गानों में दोनों ने वाद्ययंत्र बजाए हैं, लेकिन इनकी काबिलियत को पहचाना यश चोपड़ा ने और अपनी फिल्म 'सिलसिला' में दिया संगीतकार बनने का मौका। अमिताभ बच्चन का फिल्म के संगीत से इतना नाता होना यश चोपड़ा के काफी काम भी आया। बड़े बच्चन अपने बाबूजी यानी हरिवंश राय बच्चन का भी एक गाना फिल्म में लाए। ये गाना फिल्माया गया खुद अमिताभ बच्चन और रेखा पर और हिंदी सिनेमा में वैसे तो होली के तमाम गाने इससे भी ज्यादा हिट हुए हैं और फिल्म 'शोले' के होली गीत में असल जिंदगी के प्रेमियों धर्मेंद्र व हेमा मालिनी की मस्ती भी कैमरे ने खूब खींची पर 'रंग बरसे भीगे चुनर वाली रंग बरसे...' का दूसरा कोई मेल नहीं है। इस गाने की मस्ती के दीवाने हजारों नहीं करोड़ों में हैं, और अगर यही रंग फिल्म का आखिर तक कायम रहता तो इस फिल्म को सुपरहिट होने से कोई रोक नहीं सकता था। लेकिन, फिर समाज आ गया। करेक्शन आ गया। प्लेन क्रैश आ गया और फिल्म के भी क्रैश होने का समय आ गया। खैर, ये बातें बीती बाते हैं, फिल्म के लिए राजेंद्र कृष्ण, निदा फाजली और हसन कमाल के लिखे गाने भी रिकॉर्ड हुए थे। फिलहाल अभी आप लीजिए इस मस्ती भरे गाने का रंगीन मजा..

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सिलसिला - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
ये प्यार था या कुछ और था..
फिल्मी परदे पर किसी हीरो हीरोइन की ऐसी केमिस्ट्री कम ही देखने को मिली है। अमिताभ बच्चन और रेखा की जोड़ी को हिंदी सिनेमा की सबसे रूमानी जोड़ी माना जाता है। लेकिन, दोनों के बीच वाकई प्यार जैसा कुछ था कि नहीं, ये जानने की कोशिश उन पत्रकारों ने जरूर की, जिनके रेखा से करीबी रिश्ते रहे और रेखा ने इस बारे में सवाल पूछे जाने पर अपना पक्ष बहुत ही साफगोई से रखा। वह मानती हैं कि उन्होंने अमिताभ बच्चन से प्यार किया। साथ ही वह यह भी कहती हैं कि अमिताभ के संपर्क में आने के बाद ऐसा कौन होगा जो उन्हें प्यार नहीं करने लगेगा। अमिताभ की तरफ से इस बारे में कभी कुछ न कहे जाने पर भी रेखा ने उनका ही पक्ष लिया, ये कहकर कि उन्हें इस बारे में सबको सबकुछ बताने की जरूरत भी नहीं है। फिल्म को लेकर इतना तनाव रहा उन दिनों कि इस चक्कर में इस फिल्म को फिल्मफेयर का एक भी पुरस्कार नहीं मिला। यश चोपड़ा का तब जलवा हुआ करता था और कहते हैं कि उन्होंने अपनी फिल्म को इन पुरस्कारों की मुख्य अभिनय श्रेणियों में तो नामित तक नहीं होने दिया। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।

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