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जब शोले में अपना ‘इत्तू’ सा रोल देख रो पड़े थे मैक मोहन, रमेश सिप्पी की भविष्यवाणी ने बदल दी जिंदगी

Fri, 24 Apr 2020 08:57 AM IST
प्रतीक्षा राणावत मुंबई ब्यूरो, अमर उजाला
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मैक मोहन - फोटो : Social Media
24 अप्रैल 1938 को कराची में जन्मे मोहन मकीजानी को दुनिया आज मैक मोहन और सांभा के नाम से जानती है। फिल्म 'शोले' में बोले गए उनके वह तीन शब्द 'पूरे पचास हजार' लोगों के दिल में इस कदर घर कर गए कि उनका असली नाम भूल कर लोग उन्हें सांभा के रूप में ही पहचानने लगे। वैसे तो मैक मोहन डॉन, कर्ज, सत्ते पे सत्ता, जंजीर, रफूचक्कर, शान, खून पसीना जैसी कई फिल्मों में भी शानदार काम करते हुए नजर आए लेकिन जो शोहरत उन्हें 'शोले' से मिली, उसी ने उन्हें अमर कर दिया। ऐसे शानदार कलाकार के बारे में आज हम आपको कुछ अनसुनी बातें बताते हैं।
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Mac Mohan
मैक मोहन का जन्म ब्रिटिश शासन में कराची में हुआ था। उनके पिता सेना में अफसर थे। पिता के आर्मी में होने की वजह से मैक मोहन को बचपन से ही कई शहर बदलने पड़े। मैक मोहन का अपने परिवार के साथ कराची से लखनऊ और फिर लखनऊ से मुंबई आना हुआ। मुंबई पहुंचने के बाद मैक मोहन ने मन बनाया कि वह एक क्रिकेटर बनेंगे। उन्होंने शानदार क्रिकेट खेलते हुए अपना रुतबा बना लिया और उन्होंने कई क्रिकेट टूर्नामेंट में हिस्सा भी लिया।
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Mac Mohan - फोटो : social media
मैक मोहन बनना तो एक क्रिकेटर ही चाहते थे लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था। मुंबई में रहकर इन्होंने अपना कॉलेज शुरू किया और उसी के साथ थिएटर में भी काम करने लगे थे। वहां उनकी मुलाकात शौकत कैफी से हुई। शौकत कैफी ने जब मैक मोहन का अभिनय देखा तो उसकी बहुत तारीफ की। उन्होंने मैक मोहन से कहा कि तुम बहुत अच्छे अभिनेता हो। थिएटर में मन लगाकर काम करो। यहीं से तुम्हें फिल्मों में भी काम मिलने लग जाएगा। उसके बाद मैक मोहन वहीं काम करने लगे और धीरे-धीरे फिल्मों की ओर रुख किया।

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mac mohan - फोटो : social media
मैक मोहन को कपड़े और खुशबूदार इत्रों का बहुत शौक था। उन्होंने फिल्मों में ज्यादातर कपड़े अपने ही पसंद के पहने हैं। उनके डिजाइनर कपड़े ज्यादातर बांद्रा के मशहूर दर्जी माधव के यहां सिलवाए जाते थे। उन्हें घूमना फिरना भी बहुत पसंद था। वह घूमने फिरने लॉस एंजेलिस इतना जाते थे कि उनके पिता ने उनका दूसरा घर अमेरिका ही समझ लिया था। मैक मोहन वहां से महंगे महंगे सूट और परफ्यूम लेकर आते थे।
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Mac Mohan - फोटो : Social Media
मैक मोहन की बहुत सारी अच्छी आदतों में से एक आदत यह थी कि उन्हें पढ़ने का बहुत शौक था। उनका परिवार भी उनके इस शौक को बहुत अच्छा मानता है। वह अपने बच्चों को भी अनुशासन में रहकर पढ़ने की हिदायत देते थे। मैक मोहन की अंग्रेजी भाषा पर बहुत अच्छी पकड़ थी। वह अंग्रेजी बहुत अच्छे से बोल भी लेते थे और लिख भी लेते थे। दैनिक अखबारों को पढ़ने के अलावा वह 'रीडर्स डाइजेस्ट' मैगजीन को पढ़ना बहुत पसंद करते थे।
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Mac Mohan - फोटो : social media
आप यह जानते होंगे कि हिंदी सिनेमा की अब तक की सबसे बड़ी फिल्म 'शोले' में मैक मोहन ने सांभा का किरदार निभाया है। और आप यह भी जानते होंगे कि लगभग तीन घंटे लंबी फिल्म में सांभा ने सिर्फ एक ही संवाद बोला है। और वह है 'पूरे पचास हजार'। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इस छोटे से संवाद के लिए मैक मोहन को मुंबई से बेंगलुरु 27 बार यात्रा करनी पड़ी थी। शुरुआत में फिल्म में उनका किरदार थोड़ा लंबा था। लेकिन, फिल्म को संपादित होने के बाद सिर्फ तीन शब्द ही बचे।
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Mac Mohan - फोटो : Social Media
मैक मोहन ने फिल्म 'शोले' को संपादित होने के बाद जब देखा तो उन्हें बहुत निराशा हाथ लगी। एक इंटरव्यू के दौरान मैक मोहन ने बताया, 'जब मैंने फिल्म को देखा तो मैं रोने लग गया था। मैं सीधे फिल्म के निर्देशक रमेश सिप्पी के पास गया और उनसे बोला कि रमेश जी आपने मेरा इतना थोड़ा सा किरदार भी क्यों रखा? आप चाहते तो इसे भी हटा ही देते। इस सवाल पर रमेश जी ने मुझसे कहा कि अगर यह फिल्म हिट हुई तो दुनिया मुझे सांभा के नाम से जानेगी। और हुआ भी ऐसा ही। पता नहीं वह कौन सी घड़ी थी जिस घड़ी में रमेश जी ने यह शब्द बोले।'

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मैक मोहन - फोटो : Social Media
हिंदी सिनेमा की फिल्म 'शोले' इतनी बड़ी हिट फिल्म है कि इस फिल्म का छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा किरदार पूरी दुनिया में मशहूर हैं। एक बार जब मैक मोहन अमेरिका के शहर न्यूयॉर्क घूमने के लिए गए थे तो उन्हें वहां एक अफसर ने सांभा कहकर बुलाया। उसने 'शोले' फिल्म देखी जरूर थी लेकिन सांभा का असली नाम उसे नहीं पता था। यह उस बड़ी सी फिल्म में छोटे से किरदार का ही कमाल था जिससे लोग मैक मोहन को सांभा के नाम से ही जानने लगे थे।

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मैक मोहन - फोटो : Social Media
एक बार जब मैक मोहन अपने परिवार के साथ पुणे गए तो भीड़ को वहां पता चल गया कि यहां मैकमोहन आए हुए हैं। उन्होंने 'सांभा सांभा' चिल्लाना शुरु कर दिया। भीड़ को बेकाबू देख वहां पुलिस को बुलाया गया। लेकिन, पुलिस के आने से पहले ही मैक मोहन वहां से चुपचाप निकल गए। इस घटना को देखकर मैक मोहन का परिवार बहुत हैरान रह गया। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि सिर्फ उन तीन शब्दों से मैक मोहन इतने मशहूर हो गए थे। किसी ने ठीक ही कहा है कि आपकी पिछली सारी असफलताओं को भुलाने के लिए एक सफलता ही काफी है।

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mac mohan daughter
मैक मोहन ने 30 जून 1986 में एक आयुर्वेदिक चिकित्सक मिनी से शादी की थी। इस शादी से उन्हें तीन बच्चे विनती, विक्रांत और मंजरी हुए। मंजरी पेशे से फिल्म निर्माता और निर्देशक हैं। उन्होंने थिएटर करने के बाद 'द लास्ट मार्बल' जैसी शॉर्ट फिल्म लिखी और खुद ही निर्देशित भी की। उनकी दूसरी बेटी विनती अभिनेत्री हैं वहीं उनका इकलौता बेटा विक्रांत भी एक अभिनेता है। आपके लिए आश्चर्य की बात तो यह होगी कि मैक मोहन हिंदी सिनेमा की शानदार अभिनेत्री रवीना टंडन के रिश्ते में मामा थे।
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मैक मोहन - फोटो : Social Media
वर्ष 2010 में अजय देवगन, परेश रावल, कोंकणा सेन शर्मा, सतीश कौशिक, संजय मिश्रा जैसे सितारों से सजी फिल्म 'अतिथि तुम कब जाओगे' आई। इस फिल्म में मैक मोहन को भी एक किरदार के लिए लिया गया था। लेकिन, फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले ही मैक मोहन बीमार पड़ गए और उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यहां से वह ठीक नहीं हुए और 10 मई 2010 में उन्होंने इसी अस्पताल में अपनी अंतिम सांसें लीं।
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