शाहरुख खान के इंटरव्यू तो आपने बहुत सुने होंगे लेकिन जब अमर उजाला ने 'जीरो' के इस स्टार से गुफ्तगू की उनके दिल में छिपे कई राज भी सामने आ गए । शाहरुख खान दो दिन के लिए लखनऊ के मेहमान रहे । इस दौरान उन्होंने अमर उजाला से खास बातचीत की। उन्होंने अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को लेकर कई अनसुनी बातें शेयर की।
विज्ञापन
2 of 8
शाहरुख खान
शाहरुख खान कहते हैं, 'मैं अपने बच्चों और देश के सभी युवाओं से कहूंगा कि जिंदगी में ऐसा कुछ भी खराब नहीं होता, जिससे आपको लगे कि जिंदगी खत्म हो गई। इसका उलटा भी जान लीजिए... कोई सफलता ऐसी नहीं होती जिसके मिलने पर आप मान लें कि जिंदगी पूरी हो गई।’
विज्ञापन
3 of 8
शाहरुख खान
शाहरुख से सवाल किया गया कि अगर दुनिया की सभी किताबें खत्म हो रही हों और किन्हीं तीन को बचाने का मौका मिले तो किसे बचाएंगे? शाहरुख ने कहा-'मैं सबसे पहले रामायण बचाना चाहूंगा। इसकी कहानी बहुत खूबसूरत है। दूसरी, अंग्रेजी की किताब डगलस एडम्स की ‘हिचहाइकर्स गाइड टू द गैलेक्सी’ होगी जो बहुत फनी है। तीसरी किताब, अगर मेरी अपनी पूरी हो सकी, तो उसे बचाना चाहूंगा।'
4 of 8
शाहरुख खान
वो आगे कहते हैं, 'अपनी बायोग्राफी को मैं 16 साल से लिख रहा हूं लेकिन पूरी नहीं हो रही। मुझे लगा था कि बेटे आर्यन के जन्म पर पूरी हो जाएगी लेकिन फिर बेटी सुहाना हो गई, उसे नहीं छोड़ सकता था। अब अबराम हो गया है। जीवन में कई छोटे-बड़े मील के पत्थर जैसे क्षण आए हैं, जिन्हें उसमें समेटना चाहता हूं।'
विज्ञापन
5 of 8
shahrukh khan
- फोटो : bollywoodlife
'जीवन इतनी घटनाओं से भरा है। बच्चों के आंखों में पिता की छवि बहुत बड़ी होती है, स्टार के लिए यह छवि और विशाल हो जाती है। दिल्ली का मेरा जीवन और उसकी यादें इस पुस्तक में बच्चों के लिए छोड़ जाना चाहता हूं, किसी आम पिता की तरह। वे पढ़ें और जानें कि किन मौकों पर मैं उदास हुआ, क्या वजहें थीं, क्या क्या किया।’
विज्ञापन
6 of 8
shahrukh khan
- फोटो : bollywoodlife
बताें-बातों में शाहरुख खान ने ये भी बताया कि ईद के मौके पर सारी तैयारियां गौरी खान करती हैं । वहीं दीवाली पार्टी का सारा जिम्मा शाहरुख खान का होता है । शाहरुख खान ने अपने घर में राधा-कृष्ण का एक मंदिर भी बनाया हुआ है । फिल्मों के फ्लॉप होने या असफल होने को लेकर भी शाहरुख खान ने अपना अनुभव साझा किया ।
विज्ञापन
7 of 8
shahrukh khan
- फोटो : indian express
उन्होंने कहा, 'दुखी होना सफलता या असफलता से संबंधित नहीं है। व्यक्ति किसी भी बात से प्रभावित हो सकता है। पत्नी को कहा है कि बच्चों को प्रभावित न होने दो । उनकी असफलता पर भी जश्न मनाओ। अभी कुछ दिन पहले आर्यन परीक्षा के दौरान एक पूरा पेपर ही पढ़ना भूल गया।'
'गौरी ने उसे बहुत डांटा...मैंने समझाया कि फेल होना सामान्य है, इसकी वजह से बच्चों पर दबाव न बनाएं। मैंने जामिया से मासकॉम किया है। इंजीनियर बनना चाहता था, लेकिन यह भी जानता हूं कि स्कूल के दिनों में गणित में 100 में से तीन अंक तक पा चुका हूं।'