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Satyajit Ray: सत्यजीत रे जिनके पास खुद चलकर आया था ऑस्कर, पत्नी के गहने बेचकर बनाई थी पहली फिल्म

Sun, 23 Apr 2023 09:19 AM IST
रुपाली रामा जायसवाल एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

सत्यजीत रे ने अपनी पहली फिल्म 'पाथेर पांचाली' बनाने के लिए पत्नी के गहने बेच दिए थे। वहीं, एक समय ऐसा आया जब ऑस्कर सम्मान उनके पास खुद चलकर आया।
 
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सत्यजीत रे - फोटो : अमर उजाला
सत्यजीत रे ने आज ही के दिन यानी 23 अप्रैल 1992 को कोलकाता में आखिरी सांस लेकर दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था। सत्यजीत भले ही आज इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन फिल्मों के प्रति उनका त्याग और समर्पण यादगार है। 2 मई 1921 को कोलकाता में जन्मे सत्यजीत रे पहले ऐसे भारतीय फिल्म निर्देशक थे जिनके पास खुद 'ऑस्कर अवॉर्ड' चलकर आया था। निर्देशक खुद में एक चलता-फिरता सिनेमा थे। आइए आज उन्हें याद करते हुए उनके जीवन से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से जान लेते हैं-
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सत्यजीत रे - फोटो : सोशल मीडिया
सत्यजीत रे महज तीन साल के थे, जब उनके पिता का स्वर्गवास हो गया। उनकी मां सुप्रभा ने तमाम दिक्कतों का सामना करते हुए उनका पालन-पोषण किया। बतौर ग्राफिक डिजाइनर करियर की शुरुआत करने वाले सत्यजीत ने कई किताबों के कवर पेज डिजाइन किए थे। इन किताबों में जवाहर लाल नेहरु की डिस्कवरी ऑफ इंडिया और जिम कार्बेट की मैन इट्स ऑफ कुमाऊं भी शामिल है। 
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सत्यजीत रे - फोटो : सोशल मीडिया
विभूतिभूषण बंधोपाध्याय के लोकप्रिय उपन्यास 'पाथेर पांचाली' के बाल संस्करण को तैयार करने में सत्यजीत रे की अहम भूमिका थी। अम अंतिर भेपू (आम के बीज की सीटी) किताब से सत्यजीत रे इस कदर प्रभावित हुए कि उन्होंने इस किताब के कवर के साथ इसके कई रेखाचित्र भी तैयार किए। यही आगे चलकर उनकी पहली फिल्म 'पाथेर पांचाली' के खूबसूरत और मशहूर शॉट्स साबित हुए। 

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सत्यजीत रे - फोटो : सोशल मीडिया
सत्यजीत रे को काम के सिलसिले में साल 1950 में लंदन जाने का मौका मिला। लंदन में सत्यजीत ने कई फिल्में देखी और उन फिल्मों से वह इस कदर प्रभावित हुए कि उन्होंने ठान लिया कि वह भारत आकर 'पाथेर पांचाली' पर फिल्म बनाएंगे। साल 1952 में सत्यजीत ने बिल्कुल नई टीम के साथ फिल्म की शूटिंग शुरू की। नया फिल्ममेकर होने की वजह से कोई भी उन पर पैसा लगाना नहीं चाहता था। इसे बनाने के लिए सत्यजीत ने अपने सभी पैसे लगा दिए साथ ही पत्नी के गहने तक बेच दिए थे। आखिरी में पश्चिम बंगाल सरकार ने उनकी मदद की और 1955 में 'पाथेर पांचाली' परदे पर रिलीज हो पाई। 
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सत्यजीत रे - फोटो : सोशल मीडिया
'पाथेर पांचाली' ने कई राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय पुरस्कार जीते, जिनमें  फ्रांस के कांस फिल्म फेस्टिवल में मिला विशेष पुरस्कार बेस्ट ह्यूमन डॉक्यूमेंट भी शामिल है। 1992 में सत्यजीत रे को ऑस्कर देने की घोषणा की गई थी लेकिन उस वक्त वह बीमार चल रहे थे और सम्मान प्राप्त करने नहीं जा सके। ऐसे में ऑस्कर के पदाधिकारियों ने फैसला लिया कि यह अवॉर्ड उनके पास पहुंचाया जाएगा। पदाधिकारियों की टीम कोलकाता में सत्यजीत रे के घर पहुंची और उन्हें अवॉर्ड से नवाजा गया। अवॉर्ड मिलने के एक महीने के अंदर ही सत्यजीत रे को दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया। 
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