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इतने साल की उम्र में सरोज खान ने किया था पहली बार डांस, बॉलीवुड में इस तरह बनाई थी अपनी पहचान

Fri, 03 Jul 2020 03:56 PM IST
anand anand बीबीसी हिंदी
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सरोज खान - फोटो : सोशल मीडिया
एक ऐसी इंडस्ट्री जहां हर हफ्ते नए सितारे बनते हैं और उन सितारों का बनना बिगड़ना न सिर्फ उनकी एक्टिंग की काबिलियत पर निर्भर करता है बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि उस पर कितने गाने फिल्माए गए और वो कितना बेहतर नाचते हैं। ऐसी फिल्म इंडस्ट्री की मास्टरजी थीं सरोज खान। सरोज खान का तीन जुलाई को मुंबई में निधन हो गया। सरोज खान वो डांस मास्टर थीं जिन्होंने साधना से लेकर आलिया भट्ट को अपने इशारों पर नचवाया है। फिल्मों में उनके योगदान को इसी से आंका जा सकता है कि 70 के दशक से लेकर अब तक सरोज खान ने हिंदी सिनेमा को एक से बढ़कर गाने दिए। फिल्म का नाम आपने शायद ही सुना हो- फ्लैट नंबर 9 और गाना था हेलन का। -आंखों से मैंने पी है, चोरी तो नहीं की है। तब सरोज सिर्फ 12 साल की थीं।
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सरोज खान - फोटो : सोशल मीडिया
सरोज के गुरु सोहनलाल ने इस गाने पर उन्हें डांस करने के लिए कहा और इतने प्रभावित हुए कि उन्हें असिस्टेंट बना लिया और 12 साल की उम्र से सरोज खान डांस सिखाने लगीं। अतीत की बात करें तो बंटवारे की त्रासदी के बाद उनका परिवार पाकिस्तान से मुंबई आया और 1948 में उनका जन्म मुंबई में हुआ। बचपन से ही डांस का शौक था तो सलाह मशविरे के बाद उन्हें बतौर बाल कलाकार फिल्मों में भेजा गया। 1961 में फिल्म नजराना में सरोज खान ने चाइल्ड आर्टिस्सट काम किया। सरोज करीब 10 साल की थीं जब उनके पिता की मौत हो गई और 10 साल की उम्र में उनके कंधों पर परिवार का बोझ आ गया और वो बतौर ग्रुप डांसर काम करने लगीं। उनके जीवन में अहम मोड़ आया जब डांस गुरु सोहनलाल ने उन्हें देखा और अपना असिस्टेंट बना लिया।
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सरोज खान - फोटो : ट्विटर
70 के दशक में अभिनेत्री साधना ने गीता मेरा नाम में उन्हें बतौर नृत्य निर्देशक ब्रेक दिया। साधना ने खुद फिल्म बनाई पर पहचान मिली उन्हें सुभाष घई की फिल्मों विधाता और हीरो में जब मीनाक्षी शेषाद्री जब गाना आया तू मेरा हीरो है... हालांकि सरोज खान वाकई बड़ी लीग में शामिल हुई जब उन्होंने श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित के साथ मिलकर जबरदस्त गाने दिए। नगीना में मैं तेरी दुश्मन , तेजाब में एक दो तीन, या चांदनी में मेरे हाथो में नौ नौ चूडियां हैं - इन गानों में वाहवाही भले ही माधुरी या श्रीदेवी को मिली लेकिन पर्दे के पीछे की मेहनत थी सरोज खान की। सरोज खान की खासियत ये थी कि उन्होंने क्लासिकल से लेकर वेस्टर्न से लेकर गरबा, लावणी, भांगडा सबके रंग अपने कोरियोग्राफ किए गानों में डाले। वो भारत के अलग-अलग नृत्यों को अपनी प्रेरणा मानती थीं।

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सरोज खान - फोटो : सोशल मीडिया
90 के दशक बात करें तो एक से बढकर हीरो-हीरोइनों ने उनके नृत्य निर्देशन में काम किया- बेटा, डर, बाजीगर, मोहरा, दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे - इन सब फिल्मों में जो गाने हिट हुए उनमें डांस के जादू के पीछे सरोज का हाथ था। जैसे हर गुरु का एक शिष्य फेवरेट होता है, सरोज खान की ओर से ये सम्मान माधुरी दीक्षित को मिला है। माधुरी के साथ उन्होंने एक दो तीन गाने में काम किया और फिर धक धक करने लगा, मेरे पिया घर आए, दीदी तेरा देवर दीवाना जैसे गाने किए। आप तेजाब में माधुरी को एक दो तीन पर थिरकते हुए देखते हैं तो तालियां भले ही माधुरी के हिस्से गई हों लेकिन ये कमाल जितना माधुरी का था उतना ही सरोज खाना का भी।तेजाब की चंचल मोहिनी को देवदास में सरोज खान ने चंद्रमुखी बना दिया।
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सरोज खान - फोटो : सोशल मीडिया
माधुरी के साथ देवदास के लिए सरोज खान को नेशनल अवॉर्ड भी मिला। इस तरह श्रीदेवी भी उनकी बहुत पसंदीदा थी जिन्हें सरोज खान ने हिम्मतवाला में देखा और चाहती थीं कि ऐसी ही किसी डांसर के साथ वो फिल्म करें। तब सरोज खान का उतना नाम नहीं था।1986 में फिल्म कर्मा के लिए सुभाष घई ने उन्हें श्रीदेवी के साथ करने का मौका दिया। श्रीदेवी के गाने हवा हवाई की कोरियोग्राफी सरोज खान ने इतनी कमाल की थी कि निर्देशक शेखर कपूर कहते थे कि वो गाने में श्रीदेवी के क्लोजअप दिखाना चाहते थे लेकिन जब श्रीदेवी का डांस देखते थे तो लॉग शॉट लेने पर मजबूर हो जाते थे। सरोज खान अपने नृत्य के लिए तो जानी ही जाती थीं सेट पर वो कड़क अंदाज और अनुशासन के लिए भी मशहूर थीं।
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सरोज खान - फोटो : सोशल मीडिया
एक बार इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि सेट पर रवीना टंडन ने एक डांस से पहले गुरु को नमस्कार नहीं किया था जिसके बाद उन्होंने फिल्म ही छोड़ दी। हालांकि रवीना से उनके रिश्ते हमेशा अच्छे रहे। बदलते वक्त के साथ सरोज खान ने अपनी रफ्तार कुछ धीमी की या कहें कि नए-नए कोरियोग्राफर भी फिल्मों में आने लगे। पिछले 10 साल में बहुत कम फिल्में सरोज ने कीं लेकिन कलंक, तनु वेड्स मनु, लव आजकल, राऊडी राठौर उनकी लिस्ट में शामिल रहीं।सरोज खान कहा करती थीं कि बेहतरीन डांस करने वालों के साथ काम करना उन्हें पसंद है लेकिन उससे कहीं ज्यादा संतुष्टि उन्हें मिलती है ऐसे किसी को पर्दे पर नचवाकर जिससे आप थिरकने की उम्मीद नहीं रखते। इसलिए उन्हें गोविंदा के साथ काम करना अच्छा लगता था क्योंकि अच्छे डांसर थे लेकिन सनी देओल को नचाकर वो अलग ही खुशी महसूस करती थीं।
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सरोज खान, माधुरी दीक्षित - फोटो : सोशल मीडिया
वे मुश्किल डांस स्टेप्स को भी आसान बना देती थीं मानो हर कोई डांस कर सकता है।- अक्षय कुमार का ये ट्वीट शायद सरोज खान की हस्ती को एक वाक्य में समेट देता है। 2019 में आई फिल्म कलंक उनकी आखिरी फिल्मों में से थी। किस्मत की बात है कि आखिरी में उन्हें अपनी फेवरट शिष्या माधुरी के साथ कलंक में काम करने का मौका मिला था- गाना था तबाह हो गए। वैसे जिसे लोग आज सरोज खान के नाम से जानते हैं उनका असली नाम था निर्मला नागपाल। नाम कुछ भी हो लोग उन्हें उस्तादों की उस्ताद' मास्टरजी 'के नाम से ही याद रखेंगे। 50 के दशक में बनी फिल्म मधुमती में वो बैकग्राउंड डांसर थीं, खैर बैकग्राउंड में रहना तो एक डांस डायरेक्टर की नियति होती है। लेकिन पार्श्व में रहते हुए भी लोग उन्हें उन बेशुमार गानों में याद रखेगें जिन पर आज भी शादियों और पार्टियों में महफिलें जमती हैं।

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