बॉलीवुड की आइकॉनिक फिल्म 'शोले' से जुड़ी यादें किरदार और किस्से आज भी फिल्मी दुनिया में दोहराए जाते हैं। फिल्म का हर एक सीन, हर एक डायलॉग, हर एक गाना लोगों के जहन में आज भी उसी तरह गूंजता है, जिस तरह वह पहले गुंजा करता था। फिल्म की कहानी, डायलॉग से लेकर फिल्म का हर एक किरदार दर्शकों के जहन में आज भी जिंदा है। ऐसा ही एक किरदार ठाकुर का था, जिसके बिना यह फिल्म अधूरी सी लगती है। इस किरदार में जान डालने वाले अभिनेता संजीव कुमार अगर जिंदा होते तो 84 साल के हो गए होते। 9 जुलाई, 1938 को सूरत में जन्मे संजीव कुमार फिल्मों से कहीं ज्यादा अपनी निजी जिंदगी की वजह से सुर्खियों में रहे हैं। उनके जीवन के बहुत से किस्से लोगों के बीच प्रसिद्ध हैं। लेकिन हम आज उनके जन्मदिन के खास मौके पर उनकी जिंदगी से जुड़ी एक ऐसी रोचक कहानी के बारे बताने जा रहे हैं, जिसे सुन शायद बॉलीवुड के हीमैन यानी धर्मेंद्र को आज भी दिक्कत होगी।