संजय लीला भंसाली
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संजय लीला भंसाली को इस दौरान शायद ये उम्मीद रही कि उनसे इंटरव्यू पूरा करने की फिर से गुजारिश की जाएगी। कुछ मिनटों में ही उन्हें समझ भी आ गया कि उन्होंने कैमरे के सामने क्या कर दिया है। उनकी मंशा भी दिखी कि वह वापस अपनी कुर्सी पर आकर बैठें और इंटरव्यू पूरा करें। वह इस गुंताड़े में दिखे कि कोई उनकी फिर से चिरौरी करे। लेकिन, मैंने ये इंटरव्यू आगे करने से साफ मना कर दिया। मैंने उनसे कहा भी कि इसमें उस स्टाफ की कोई गलती नहीं है जो उनकी ही कंपनी की अधिकारी से मिले निर्देश का पालन कर रही थी। इस बीच उनके स्टाफ ने भंसाली के महिला कर्मी पर भड़कने का फुटेज डिलीट कराना शुरू कर दिया। भंसाली का पारा नीचे लाने के लिए इस दौरान मैंने उन्हें वे दिन भी याद दिलाए जब वह ’हम दिल दे चुके सनम’ की रिलीज से पहले खुद फोन करके इसके संगीत की तारीफें लिखने की मिन्नतें किया करते थे। शर्म से पानी पानी हो चुके भंसाली के मुंह से बस इतना निकला, ‘तब वो मेरी जरूरत थी।’
इंटरव्यू शुरू करने के लिए मैंने जिस श्लोक को सहारा बनाया, उसका अर्थ भी लगे हाथ बताते चलते हैं। श्लोक है, ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रिया:।’ और इसका अर्थ है, जहां नारियों का सत्कार होता है, वहां देवता निवास करते हैं या कहें कि वहां दिव्य फल प्राप्त होते हैं। लेकिन जहां स्त्रियों का सम्मान नहीं होता। वहां के सारे कर्म निष्फल होना तय हैं।