फिल्म निर्माता और निर्देशक संजय लीला भंसाली के प्रोडक्शन में बनने वाली फिल्म मलाल का ट्रेलर लॉन्च हो गया। मुम्बई में एक चाल की लव स्टोरी पर आधारित फिल्म मलाल के ट्रेलर में शरमीन और मीजान दोनो की केमिस्ट्री खूब जंच रही है। इस मौके पर फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली ने कहा, "मलाल की तैयारी काफी समय पहले से चल रही थी। फिल्म पद्मावत के दौरान एक कॉस्ट्यूम ट्रायल के लिए जब शरमिन मीजान को मेरे पास लेकर आई तो उसे देखते ही मैंने कहा कि एक दिन तुम बड़े स्टार बनोगे।” फिल्म मलाल से दो नए चेहरे लांच होने जा रहे हैं। ये हैं संजय लीला भंसाली की भांजी शरमिन सहगल और अभिनेता जावेद जाफरी के बेटे मीजान।
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- फोटो : amar ujala mumbai
हीरोइन बनने के लिए घटाया वजन
शरमिन के बारे में संजय ने कहा कि शरमिन ने मेरे साथ बाजीराव मस्तानी और पद्मावत में बतौर सहायक निर्देशक काम किया है। उस वक्त शरमिन का वजन 85 से 95 किलो के बीच में रहा होगा। उस वक्त की शरमिन और मलाल की शरमिन के बीच का अंतर उसकी कड़ी मेहनत को दर्शाता है।
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मंगेश को देखकर जलन होती है
फिल्म मलाल का निर्देशन मंगेश हड़ावले कर रहे हैं। निर्देशक मंगेश हड़ावले के बारे में संजय ने कहा कि, "मंगेश इतने अच्छे निर्देशक है कि कभी कभी उनके काम को देखकर मुझे जलन होती है कि इसने यह कैसे किया। मंगेश एक अच्छे निर्देशक होने के साथ साथ एक अच्छे इंसान भी है और मैं उन्हें अपने भाई की तरह मानता हूं। "
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“पिता को जो नही मिला वो पाने मैं आया हूं”
ट्रेलर रिलीज होने के बाद मीडिया से मुखातिब होते ही मीजान ने कहा कि मेरे पिता जावेद जाफरी इसी इंडस्ट्री से ताल्लुक रखते है और मेरे दादाजी जगदीप भी इसी इंडस्ट्री से थे। इन दोनों से मैंने बहुत कुछ सीखा। जगदीप और जावेद जाफरी के घर पैदा होना मेरे लिए गर्व की बात है। जावेद के इंडस्ट्री में अपेक्षा से कम अहमियत दिए जाने के सवाल पर मिजान ने कहा कि मेरे पिता को इस फिल्मी दुनिया मे जो नही मिल सका उसे पाने के लिए मैंने इस दुनिया में कदम रखा है।
हर क्षेत्र में है वंशवाद: शरमिन
फिल्म के बारे में बात करते हुए शरमिन ने बताया कि फिल्म मैरीकॉम के दौरान मैं संजय सर को असिस्ट कर रही थी उस वक्त मेरा वजन बहुत ही ज्यादा था। मुझे दूसरों की जिंदगी जीने का बहुत शौक था, लेकिन उस समय मुझे पता नही था कि मैं एक्टर बन पाऊंगी या नही। वंशवाद के के सवाल पर शरमिन ने कहा," मेरा मानना है कि हर क्षेत्र में वंशवाद है। डॉक्टर के बच्चे डॉक्टर, व्यापारी के बच्चे व्यापारी इसी तरह एक्टरों के बच्चे भी एक्टर बनते है। हां, मैं यह स्वीकार करती हूं कि इंडस्ट्री में पहचान होने से आपको मौके जल्दी मिल जाते है। लेकिन परफॉर्मेंस को लेकर दबाव भी उतना ही ज्यादा होता है।"