श्वेता त्रिपाठी
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श्वेता ने कहा कि, 'वैसे मुझे अकेले समय बिताना अच्छा लगता है लेकिन जब आप बिल्कुल कमरे से बाहर ना निकल सके और सिर्फ टीवी देखें या किताब पढ़ें क्योंकि कुछ और कर नहीं सकते तो ये बहुत बर्दाश्त से बाहर होने लगता है'। उन्होंने बताया कि क्वारंटीन के चौथे दिन बहुत ही खराब लगा, लेकिन मुझे यही समझ आया कि खुद की काउंसलिंग करना बेहद जरूरी है'। श्वेता ने कहा कि, 'अब सभी को अपनी रक्षा खुद ही करनी है। बहुत से लोग आपकी मदद जरूर करेंगे, लेकिन आपके दिमाग की शांति ना भंग हो इसका ख्याल आपको खुद रखना है'।