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EXCLUSIVE: सिनेमा तभी तक है जब तक दर्शक के मन में हीरो जैसा बनने की चाहत है: सलमान खान

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सलमान खान - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
साल 2009 में फिल्म ‘वॉन्टेड’ से शुरू हुआ सलमान खान की साल दर साल ईद पर रिलीज होने वाली मेगा बजट फिल्मों का सिलसिला इस साल फिल्म ‘राधे: योर मोस्ट वांटेड भाई’ तक पहुंच रहा है। इस बीच सिर्फ दो ऐसे मौके आए जब ईद पर सलमान की फिल्म रिलीज नहीं हुई। एक तो बीते साल कोरोना संक्रमण के चलते फिल्म ‘राधे: योर मोस्ट वांटेड भाई’ की ही रिलीज टली। इससे पहले सलमान ने एक ईद अभिनेता शाहरुख खान की फिल्म ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ के लिए भी खाली की थी। फिल्म ‘राधे: योर मोस्ट वांटेड भाई’ की शूटिंग के दौरान सलमान खान ने ‘अमर उजाला’ के सहायक संपादक पंकज शुक्ल से ये खास बातचीत की थी।
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सलमान खान - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सलमान खान से जो लोग बरसों से मिलते आ रहे हैं, उन्हें साफ समझ आता है कि वह अब काफी बदल चुके हैं। गुस्सा अब उन्हें कम आता है। खुद को बेहतर इंसान बनाने की कोशिश वह हर पल करते रहते हैं। खुद को बेहतर करने का उनका तरीका क्या है? पूछने पर सलमान कहते हैं, ‘गलतियां सबसे हो जाती हैं। मेरा मानना है कि गलती कभी इरादतन नहीं होनी चाहिए। गलती होते ही पता चल जाता है कि गलती हो गई। जहां भी लगे कि ये गलती हो गई, उसमें वहीं से सुधार कर लेना चाहिए। लेकिन, अगर आपको पता है कि ये गलत है और उसके बाद भी किए जा रहे हैं, तो ये ठीक नहीं है। बिग बॉस से मुझे हर सीजन कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। इसी ने मुझे सिखाया कि कब किसी बात को लेकर प्रतिक्रिया देनी है और कब नहीं।’
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सलमान खान - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सलमान सेट पर होते हैं तो कुछ न कुछ करते ही रहते हैं। कुछ नहीं होता है करने को तो वह उठकर टहलना शुरू कर देते हैं। 55 साल की उम्र में उनकी जैसी चुस्ती फुर्ती सब चाहते हैं, लेकिन इसका भी एक राज है। सलमान बताते हैं, ‘लोग समझते हैं कि जिम जाने से इंसान फिट रहता है। जिम तो हर कोई जाता है। लेकिन जिम के बाहर आपका जीवन कैसा है, वह बहुत मायने रखता है। जिम के बाहर खुद को संभाले रखना बहुत जरूरी है। आपके विचारों का सेहत पर सीधा असर होता है। आप जैसा सोचते हैं, वैसे ही आपका स्वास्थ्य रहता है।’

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सलमान खान - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सलमान खान की फिल्में देख लाखों लोग सलमान बनना चाहते हैं। लेकिन, सलमान ने भी कभी किसी को देख ऐसा सोचा होगा क्या? पूछने पर सलमान अपने मन की बात साझा करते हैं, ‘इन दिनों जो मैं फिल्में कर रहा हूं उनमें एक्शन है, प्यार है और कॉमेडी भी आ ही जा रही है। ये लार्जर दैन लाइफ फिल्में मेरे जीवन में अब आ गई हैं तो इसी में सब कुछ है। आप पूरे भारत में कहीं चले जाओ, सबको नायक चाहिए। हम बचपन में ब्रूस ली की फिल्में देखते थे और सोचते थे कि ब्रूस ली बनना है। भारत में सिनेमा तभी तक है जब तक कि दर्शक के मन में हीरो जैसा बनने की लालसा है। ये खत्म तो सिनेमा भी खत्म।’
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सलमान खान - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘राधे: योर मोस्ट वांटेड भाई’ में राधे के अलावा बाकी की टैगलाइन ‘योर मोस्ट वांटेड भाई’ भी सलमान ने खास मकसद से जुड़वाई है। इस बारे में जिक्र चलने पर सलमान कहते हैं, ‘भाई को भाईगिरी में लिया जाने लगा है। उसके पहले भाई बहुत ही इज्जत देने वाल शब्द रहा है। लेकिन एकाएक इसका अभिप्राय काफी नकारात्मक हो गया है। इतना सम्मान देने वाले शब्द ने अपने मायने खो दिए हैं। मुझे बस उसी शब्द को फिर से इज्जत बख्शनी है। उसे एक सकारात्मक ध्वनि प्रदान करनी है।’
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सलमान खान - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
तमाम अभिनेता हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे हैं जो खुद को ‘डायरेक्टर्स एक्टर’ कहलाने में फख्र महसूस करते हैं। लेकिन, सलमान खान ने ऐसे निर्देशक भी हिंदी सिनेमा में तैयार किए जो ‘एक्टर्स डायरेक्टर’ का तमगा पाकर भी चहकते नजर आते हैं। सलमान से इस बारे में बात होती है तो वह कहते हैं, ‘हमारे पिता सलीम खान आज भी देश के सबसे अच्छे लेखक हैं। सिनेमा हमने बचपन से सीखा है। वह जब कहानियां सुनाते थे तो हम वहां बैठा करते थे। हमने ये समझा है कि कहानी में क्या सही है, क्या गलत है। हमने उनकी फिल्में देखी हैं और समझा है कि पारिवारिक फिल्में क्या होती हैं। उनका विलेन भी कभी बलात्कारी नहीं रहा। आप गब्बर सिंह को देख लो। वह छिछोरा किरदार नहीं है। साफ सुथरी फिल्म बनाने का सबक हमने उन्हीं से सीखा।’
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