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Sahir Ludhianvi: साहिर लुधियानवी को डाकुओं ने भी दिया खूब सम्मान, किस्सा जानकर हो जाएंगे हैरान

Wed, 08 Mar 2023 06:13 AM IST
ज्योति वर्मा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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साहिर लुधियानवी - फोटो : अमर उजाला
साहिर लुधियानवी का आज जन्मदिन है। इनका जन्म आठ मार्च 1921 को करीमपुरा, लुधियाना पंजाब में हुआ था। उनका जन्म एक पंजाबी मुस्लिम परिवार में हुआ था। साहिर का असली नाम अब्दुल हई है। साहिर ने अपनी स्कूली शिक्षा लुधियाना के 'खालसा हाई स्कूल में की थी।  कॉलेज के दिनों में ही वे अपने शेर और शायरी के लिए मशहूर हो गए थे।  वह एक भारतीय कवि और संगीतकार है। उन्होंने हिंदी फिल्मों के लिए तमाम गाने लिखे हैं। उन्होंने हिंदी और उर्दू भाषा में गाने लिखे है। साहिर 20वीं सदी के सबसे बेहतरीन गीतकार और कवि में से एक थे। 
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Sahir Ludhianvi - फोटो : social media
1949 से की थी अपने करियर की शुरुआत
साहिर ने अपने काम से फिल्म उद्योग में अच्छी जगह हासिल की थी। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1949 में आई फिल्म आजादी की राह से की थी। इस फिल्म के लिए उन्होंने चार गाने लिखे थे। उसके बाद उन्होंने 1951 में आई फिल्म नौजवान के लिए गाने लिखे थे। लेखक को सबसे ज्यादा सफलता 1951 में आई फिल्म बाजी से मिली थी। इन गानों के संगीतकार एस डी बर्मन थे। साहिर को उस दौरान गुरुदत्त की टीम का हिस्सा माना जाता था। वहीं, बर्मन के साथ साहिर की आखिरी फिल्म प्यासा थी। इस फिल्म का निर्देशन गुरुदत्त ने किया था। साथ ही गुरुदत्त ने इसमें एक कवि की भूमिका अदा की थी। प्यासा साल 1957 में रिलीज हुई थी, इस फिल्म के दौरान बर्मन और साहिर के बीच कुछ मतभेद हो गए थे, जिसके चलते दोनों के रास्ते अलग हो गए थे। 
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Sahir Ludhianvi - फोटो : social media
कई फिल्मों के लिए लिखे गाने
साहिर ने कई लोगों के साथ काम किया, जिसमें रवि, रौशन, खय्याम और दत्ता नायक शामिल हैं। वहीं, दत्ता नायक को साहिर की कविताएं और शायरी खूब पसंद थीं, जिसके चलते उनके साथ साहिर ने तमाम फिल्मों के लिए गाने लिखे थे। उन्होंने फिल्म मिलाप, चंद्रकांता, इज्जत, दास्तान और यश चोपड़ा की दाग के लिए भी गाने लिखे थे।  

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Sahir Ludhianvi - फोटो : social media
डाकूओं ने साहिर को बना लिया था बंधक
साहिर से जुड़ा डाकुओं का भी एक किस्सा है। बताया जाता है कि डाकू भी उनका खूब सम्मान करते थे। यह उस दौरान की बात है, जब लेखक लुधियाना जा रहे थे। उस वक्त उनके साथ फेमस उपन्यासकार कृष्ण चंदर भी थे। मध्यप्रदेश में शिवपुरी के पास मशहूर डाकू मान सिंह ने उनकी कार को रोका था और सभी को बंधक बना लिया था। जब सभी लोगों को बंधक बना लिया गया तो साहिर ने डाकुओं से बात की थी और उन्होंने बताया कि वही हैं जिन्होंने डाकुओं पर बनी फिल्म मुझे जीने दो के लिए गाने लिखे थे। यह सुनने के बाद डाकू मान सिंह ने सभी को बतौर सम्मान छोड़ दिया था।

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Sahir Ludhianvi - फोटो : social media
लता मंगेशकर के साथ हुआ था विवाद
उनके जीवन से जुड़ा एक और किस्सा है। हालांकि यह किस्सा एक तरह की कॉन्ट्रोवर्सी है। दरअसल बताया जाता है कि साहिर ने लता मंगेशकर से ज्यादा फीस की मांग की थी, उनका कहना था कि भले ही उन्हें लता से एक रुपये ज्यादा दिया जाए, जिसके चलते उनके बीच एक खटास पैदा हो गई थी। साल 1980 में 25 अक्तूबर के दिन साहिर ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था, उस दौरान वह 59 साल के थे। साहिर की मौत के वक्त उनके खास दोस्त जावेद अख्तर उनके पास थे। उन्हें मुस्लिम रीति रिवाज से जुहू में दफनाया गया था। 

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