शोले
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शोले (1975)
सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का दर्जा पाने वाली फिल्म ‘शोले’ सिर्फ रमेश सिप्पी की नहीं, बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा की अबतक की सदाबहार फिल्म है। इस फिल्म के हर छोटे किरदार से लेकर बड़े किरदार तक सिर्फ एक संवाद तक बोलकर भी दर्शकों के जेहन में एक याद बनकर समा चुके हैं। रमेश के अनुसार शोले की सफलता का राज इसकी पटकथा और पार्श्व संगीत है। आसमान में गोलियों की गूंजती आवाज, झूले के चरचराहट, डाकुओं की फिल्म होते हुए भी खून खराबा न होना, इसी सबने मिलकर शोले को महान बनाया। वर्ष 2005 में 50वें फिल्मफेयर समारोह में फिल्म को पिछले 50 साल की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का दर्जा दिया। साथ ही ब्रिटिश फिल्म इंस्टीट्यूट ने वर्ष 2002 की वोटिंग में शीर्ष 10 भारतीय फिल्मों की सूची में 'शोले' को प्रथम स्थान दिया।